sulabh swatchh bharat

शुक्रवार, 21 जून 2019

after-global- tobacco-control-pacts-smoking-population-decline

धूम्रपान जनसंख्या में गिरावट

117 सप्ताह पहले
नई दिल्लीः वैश्विक तंबाकू नियंत्रण संधि ने दुनियाभर में तंबाकू सेवन कटौती उपायों को स्वीकार करने की गति तेज कर दी है और वैश्विक धूम्रपान में दो फीसद की कमी आयी है। भारत भी इस संधि से जुड़ा है। लांसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन कहता है कि डब्ल्यूएचओ तंबाकू नियंत्रण प्रारूप संधि के 2005 में प्रभाव में आने के बाद से दुनियाभर में प्रगति के बावजूद मांग में कमी के सभी अहम उपाय पूरी तरह लागू नहीं किये गए हैं, ऐसा करने से तंबाकू के सेवन में और कमी आ सकती है। बता दें कि यह संधि इससे जुड़े 180 देशों को संबद्ध नियमों को कड़ाई से लागू करने एवं धूम्रपान रोकने की सेवाओं में सहयोग करने को बाध्य करती है। इन नीतियों में उच्च तंबाकू कर, धूम्रपान मुक्त सार्वजनिक स्थल, चेतावन...
central-cabinet-approved-amendment-to-rte-acts

आरटीई कानून में संशोधन को मिली मंजूरी

117 सप्ताह पहले
नई दिल्लीः केंद्रीय कैबिनेट द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने से सेवारत अप्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षक अपना प्रशिक्षण पूरा कर सकेंगे, जो शिक्षण गुणवत्ता का स्तर बनाए रखने के लिए जरूरी है । एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संशोधन से सुनिश्चित होगा कि सभी शिक्षक, 31 मार्च 2015 की स्थिति में, शैक्षणिक अधिकारी की ओर से निर्धारित न्यूनतम योग्यताएं हासिल करें ताकि ऐसे प्रशिक्षण की अवधि चार साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2019 तक किया जा सके। इस बयान के मुताबिक शिक्षकों, शिक्षण की प्रक्रियाओं और बच्चों के सीखने के परिणामों की समग्र गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर सरकार का फिर से जोर बढ़ सकेगा।&n...
needs-to-more-focus-on-mdr-tb-research-in-india

एमडीआर टीबी के शोध पर ध्यान देने की जरूरत 

117 सप्ताह पहले
नई दिल्लीः इंडियन सोसाइटी फॉर क्लीनिकल रिसर्च (आईएससीआर) ने कहा है कि शोध से औषधि रोधी टीबी का नवोन्मेषी इलाज विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे देश में टीबी का जोखिम कम होगा। इससे देश में स्वास्थ्य पर आने वाला खर्च घटेगा और 2025 तक टीबी मुक्त बनने की दिशा में भी तेजी आएगी। आईएससीआर ने कहा कि औषधि की खोज एक लंबी और गहन प्रक्रिया है और इसके लिए काफी निवेश की जरूरत है। आईएससीआर की अध्यक्ष सुनीला थाट्टे ने बताया कि डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट के मुताबिक विशेष रूप से टीबी के इलाज के लिए आखिरी बार एक औषधि 1960 के दशक में पेश की गई थी। प्रतिरोध से पार पाने के लिए अधिक सक्षम औषधि की खोज की तुलना में सूक्ष्मजीवरोधी के प्रति प्रतिरोध तेजी से बढ़ा है। विश्व स्वास्थ्य ...
usha-is-coming-a-new-morning-in-rajasthan

एक नई सुबह की आगाज़ है - उषा

120 सप्ताह पहले
आकाश के चिलमन से झांकने की तैयारी में हैं सूरज देवता भारत की राजधानी दिल्ली से महज एक सौ सत्तर किलोमीटर दूर राजस्थान के एक छोटे से ऐतिहासिक शहर अलवर में अभी भोर की पहली किरण नहीं फूटी है पर जागने की आहटों के बीच उठने से पहले की बेचैन करवटें हैं ये उषा, नंदा, लक्ष्मी, शकुंतला, ललिता नींद में तुम भी हो पर तुम्हें हमेशा जागना पड़ा है कहीं पहले अपने पति और बच्चों को सोता छोड़ तुम्हें हरदम निकलना पड़ा है, हाथ में झाड़ू और तसला लिए भौंकते कुत्तों और रिरियाते सूअरों से लोहा लेती और एक ऐसे काम को अंजाम देती आई हो तुम जिसकी न तो कोई पहचान है और न ही मानवीय चेहरा बदबू से बजबजाते घरों के कमाऊ शौचालयों को निपट नंगे हाथों से साफ करने की बेबसी अनवरत कई अनुत्तरित सवालों के कश्मकश से जूझने का असफल यत्...
green-signal-save-life-hospitals-delhi

जिंदगी का ग्रीन सिग्नल

120 सप्ताह पहले
दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ता मासूम अभिराज। हृदय की गंभीर समस्या से जूझ रहे इस मासूम के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। अपने घर के इकलौते चिराग को बचाने के लिए घरवाले हार्ट की तालाश हर जगह किए, लेकिन सिवाए निराशा के कुछ हाथ नहीं लगी। निराशा में डूबे अभिराज के पिता को आशा की किरण दिखाई उनके डॉक्टर ने। जब डॉक्टर ने उन्हें बताया कि शहर के ही एक अन्य अस्पताल में एक ब्रेन डेड मरीज दीपक है, जिसके परिजन उसका अंग डोनेट करना चाहते हैं। दीपक का हार्ट अभिराज की बॉडी में ट्रांसप्लांट करने की बात हुई, लेकिन इन दोनों अस्पतालों के बीच की लंबी दूरी सबसे बड़ी बाधा बन रही थी। 20 किमी की लंबी दूरी का पता चलते ही आशा की किरण फिर से धुंधली नजर आने लगी। हेवी ट्...

बदली गांव की तस्वीर

126 सप्ताह पहले
प्रवासी भारतीय डॉक्टर दीपेंद्र सिन्हा भले ही भारत से लाखों किलोमीटर दूर बसे हों, लेकिन उनका दिल हिन्दुस्तान के लिए हरदम धड़कता है। यही कारण है कि अमेरिका में रह रहे दीपेंद्र बिना कोई चंदा या सरकारी मदद जुटाए पैतृक गांव नौबस्ता की तस्वीर बदलने में जुटे हैं। बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को अपने पैसे से उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। दीपेंद्र द्वारा भेजे गए पैसे से अभी तक गांव में 125 बिजली के खंभे, 96 शौचालय, 200 हैंडपंप और 10 नि:शुल्क आवास बनवाए जा चुके हैं। गांव के बेसहारा गरीबों को दीपेंद्र की ओर से बनवाए गए आवास दिए गए हैं। गांव में विकास कार्यों की निगरानी के लिए दीपेंद्र ने 17 लोगों की एक टीम बनाई है।...
d917d11d-b797-4f87-9871-68805aa4aadf

भारतीय उपक्रमों के साथ गूगल

126 सप्ताह पहले
प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल की योजना भारत के लघु एवं मझोले उपक्रमों को डिजिटल बनाने की है। इसके तहत गूगल ने एक पहल की है। इससे उसे इन उपक्रमों में अपनी पैठ मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी। कंपनी के भारतीय मूल के प्रमुख सुंदर पिचाई के मुताबिक कंपनी भारत के लिए उत्पादों पर काम कर रही है। बाद में इसे वैश्विकविस्तार दिया जाएगा। भारती की अहमियत रेखांकित करते हुए पिचाई ने कहा, 'जब हम भारत जैसे देश के लिए कोई समाधान सोचते हैं, तो वह पूरी दुनिया में हर किसी के लिए समाधान होता है। इससे हमें प्रेरणा मिली कि हम यहां अपनी टीम बनाएं और ज्यादा समय यहां गुजारें, ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि हमारे उत्पाद हर किसी के लिए उपयोगी हों।’ उ...
e9533d9f-425d-4381-b0c1-1971f483d007

अगले सत्र से आरक्षण

126 सप्ताह पहले
सरकार हाल में पारित दिव्यांगता विधेयक के नियमों को 14 अप्रैल तक अंतिम रूप देना चाहती है, ताकि अगले शैक्षणिक सत्र से दिव्यांगों को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में पांच फीसदी आरक्षण मिलने लगे। विधेयक के मुताबिक छह वर्ष से 18 वर्ष के बीच के दिव्यांगों को नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार प्राप्त होगा। संसद के शीत सत्र के दौरान पारित दिव्यांगों के अधिकार विधेयक में दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में तीन से चार फीसदी आरक्षण और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में तीन से पांच फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने बताया, 'दिव्यांगता विधेयक को संसद के शीत सत्र में पारित किया गया और इसे अधिसूचित...
301c6ba1-bdc4-4379-9818-f405e73768c6

अपने गड्ढ़े आप भरेंगी सड़कें !

132 सप्ताह पहले
इन सड़कों को बनाने में कोई अतिरिक्त लागत भी नहीं लगेगी। आधुनिक मटीरियल और तकनीक के इस्तेमाल से उन्होंने ऐसी सड़कें बनाई हैं जो खुद को रिपेयर कर सकती हैं और जो किफायती के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं। नागपुर से आने वाले नेमकुमार बनथिया यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में सिविल इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट में प्रफेसर हैं। 34 साल पहले कनाडा पहुंचने के बाद बेहतर सड़कों की उनकी खोज शुरू हो गई। बेंगलुरु से करीब 
87c834c6-86f0-456b-b503-d3a350cc8fd4

रेलवे के लिए ग्रीन एनर्जी

132 सप्ताह पहले
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की बात करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में अच्छी खासी बिजली का खर्चा है। ट्रेनों के परिचालन के लिए डीजल का भी इस्तेमाल होता है। इस वजह से रेलवे कहीं न कहीं प्रदूषण फैलाती है। मौजूदा परिप्रेक्ष्य में यह जरूरी है कि रेलवे को कैसे इको फ्रेंडली बनाया जाए। इसके लिए वातावरण पर कम से कम दुष्‍प्रभाव डालते हुए एक ऊर्जा सिस्‍टम को साकार करने के लिए कम लागत का...


Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो