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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

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चैतन्य कारम्चेडू - खारा पानी, बना मीठा

113 सप्ताह पहले
इस धरती पर 70 प्रतिशत हिस्से में पानी होने के बावजूद पीने योग्य पानी की काफी कमी है। अधिकांश पानी खारा है, जिसे पीने में इस्तेमाल करना संभव नहीं। खारे पानी की अधिकता में सभी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना आसान नहीं होता, लेकिन अमेरिका में भारतीय मूल के छात्र चैतन्य कारम्चेडू ने खारे पानी को पीने योग्य जल में तब्दील करने का एक सस्ता और आसान तरीका खोज निकाला है। इस छात्र के शोध ने कई बड़ी तकनीकी कंपनियों और विश्वविद्यालयों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। ऑरेगान के पोर्टलैंड में रहने वाले चैतन्य ने पूरे देश का ध्यान अपनी कक्षा में शुरू हुए विज्ञान के एक प्रयोग के कारण खींचा है। जेसुट हाई स्कूल सीनियर ने केपीटीवी को बताया कि कारम्चेडू के पास...
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डॉक्टर सुब्रतो दास - हाई-वे का मददगार

113 सप्ताह पहले
वडोदरा के रहने वाले डॉक्टर दास की कार अगस्त 1999 को राजमार्ग के किनारे एक पेड़ से टकरा गई। घटना में तीन लोग घायल हो गए लेकिन मदद पहुंचने तक तकरीबन पांच घंटे का वक्त लग गया। उसी वक्त उन्होंने फैसला किया कि राजमार्ग (हाईवे) में होनेवाली दुर्घटनाओं में पीडि़तों की मदद के लिए वह कोई कारगर उपाय ढूंढेंगे। डॉ. दास वह भाग्यशाली थे कि वह जिंदा बच गए, लेकिन वह सुनिश्चित करना चाहते थे कि मदद के इंतजार में राजमार्ग पर कोई दम ना तोड़े। जुलाई 2002 में उन्होंने फैसला किया कि राजमार्ग पर एंबुलेंस रखने की बजाए एंबुलेंसों, दमकल वाहनों और क्रेनों का नेटवर्क तैयार करना बेहतर रहे...
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मीनाक्षी अम्मा - तलवारबाज अम्मा को पद्मश्री

114 सप्ताह पहले
      इस साल पद्म पुरस्कारों में मुख्य जोर देश के गुमनाम नायकों को सम्मानित करने पर रहा। विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए इस साल 89 हस्तियों को पद्म पुरस्कार के लिए चुना गया। सात हस्तियों को पद्म विभूषण और सात हस्तियों को पद्म भूषण सम्मान देने का ऐलान किया गया। इस बार के पद्म पुरस्कारों में तरजीह उन लोगों को दी गई, जो किसी न किसी तरह से अपने अनेक कार्यों से देश की सेवा और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतरीन मिसाल कायम कर रहे हैं। इसी पहल के तहत 'ग्रैनी विद द सोर्ड’ यानी कि तलवार वाली दादी अम्मा के नाम से मशहूर 76 साल की मीनाक्षी अम्मा को भारतीय मार्शल आर्ट 'कलारीपयट्टू’ में अपने विशेष योगदान के लिए पद्मश्री के लिए चु...
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जी.एन राव - अमेरिकन हॉल ऑफ फेम में राव

114 सप्ताह पहले
डॉक्टर गुल्लापल्ली एन राव को अमेरिकन सोसाइटी ऑफ कैटरेक्ट एंड रिफ्रेक्टिव सर्जरी (एएससीआरसी) के वर्ष 2017 के प्रतिष्ठित ऑप्थालमोलॉजी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। 6 मई को लॉस एंजेल्स में एएससीआरएस की वार्षिक बैठक के अधिष्ठापन समारोह में उनको सम्मानित किया जाएगा। गौरतलब है कि नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वालों को हॉल ऑफ फेम का सम्मान दिया जाता है। इस सम्मान की शुरुआत 1999 में हुई थी। तब से अब तक 55 वैज्ञानिकों और भौतिकविदों को ऑप्थालमोलॉजी हॉल ऑफ फेम में स्थान दिया गया है। जी.एन.राव, एल वी प्रसाद नेत्र संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। इस संस्थान के माध्यम से नेत्र चिकित्सा के लिए स्थापित किए गए प्रारू...
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चंद्रभूषण - मुसहर बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा

115 सप्ताह पहले
'भइया जी! स्कूलवा में कब नममा लिखतई। टोलवन के सब लड़कवन स्कूलवा जाय लगलई, ...त हमर लड़कवा काहे न पढ़तई 'यह मार्मिक आवाज मुसहर समाज के लाल बिहारी मांझी या मीना पासवान भर की नहीं, बल्कि चारों ओर से उठ रही है। दरअसल, मुसहर बिहार की एक अनुसूचित  जन जाति है, जो लोग पारंपरिक तौर पर खेतों से मूसा (चूहा) पकड़ कर उसी को आहार बनाते रहे हैं। शायद इसीलिए उन्हें मुसहर कहा जाता है। आज़ादी के बाद भी अनुसूचित जन जातियों में मुसहर समाज वर्षों तक शिक्षा से वंचित रहा है। 2005 में पूरे भारत में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत देश के सभी राज्यों में प्राथमिक शिक्षा पर जोर दिया गया। जिस कारण गांव-टोले प्राथमिक विद्यालय से ...
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उषा किरण -बस्तर की नई 'उषा’

116 सप्ताह पहले
उषा किरण सीआरपीएफ में असिसटेंट कमांडेंट हैं। वे ट्रिपल जंप की राष्ट्रीय विजेता भी रही हैं। नक्सल प्रभावति क्षेत्र बस्तर में पहली महलिा अधिकारी के तौर पर उनकी तैनाती इन दिनों चर्चा में है। उषा बताती हैं कि उन्हें भविष्य में सेवाएं देने के लिए तीन के लिए ऑप्शन्स दिए गए थे, जिसमें से उन्होंने नक्सल प्रभावित बस्तर में आना स्वीकार किया। इसके पीछे की मुख्य वजह ये थी कि ये इलाका नक्सली हिंसा हमलों के कारण विकास नहीं कर पाया है। साथ ही स्थानीय लोगों की अज्ञानता व पुलिस और ग्रामीणों के बीच अपनत्व का अभाव भी है। उनकी नियुक्ति से आदिवासियों और महिलाओं में आशा की किरण जगी है। बस्तर में अपना पद संभालने के बाद किए अपने पहले अभियान से मिले एक्...
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एन चंद्रशेखरन - मिली टाटा की कमान

116 सप्ताह पहले
एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया है। वर्तमान में वह टाटा समूह की अहम कंपनी टीसीएस के प्रबंध निदेशक हैं। उन्होंने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज से 1987 में मास्टर इन कंप्यूटर एप्लीकेशंस (एमसीए) की डिग्री हासिल की। डिग्री करने के तुरंत बाद उन्होंने टीसीएस ज्वॉइन कर लिया था। यहीं काम करते हुए 2009 में वह टीसीएस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी नियुक्त हुए। वर्तमान में वह इसी पद पर अपना पांच साल दूसरा कार्यकाल संभाल रहे हैं। उन्होंने अपने समय में देश को सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र का सुपरपावर बनते देखा है और टीसीएस को इस क्षेत्र की सिरमौर कंपनी बनाने में अहम योगदान दिया है, जो पूरे टाटा समूह ...
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विरल आचार्य - आरबीआई के नए डिप्टी गवर्नर

117 सप्ताह पहले
विरल आचार्य को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का डिप्टी गवर्नर बनाया गया है। शानदार अकादमिक बैकग्राउंड रखने वाले आचार्य फाइनेंस सेक्टर के एक्सपर्ट माने जाते हैं। 42 वर्षीय आचार्य न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के फाइनेंस डिपार्टमेंट में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे थे। फाइनेंशियल सेक्टर में रिस्क पर बेहतर विश्लेषण और रिसर्च के लिए जाने जाते हैं। शुरुआती दिनों से ही पढ़ाई में अच्छे रहे आचार्य ने 1995 में आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। इसके बाद  2001 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस से पीएचडी की। वर्ष 2001 से 2008 तक आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल में रहे। विरल आचार्य न्यूरोपिय...
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रोहन सूरी - छोटी उम्र बड़ी सफलता

117 सप्ताह पहले
कामयाबी उम्र की मोहताज नहीं होती। जिस उम्र में लोग खेल-कूद और बाकी शौक पूरे करने में वक्त खर्च करते हैं, उस उम्र में किशोर रोहन सूरी ने अपनी कंपनी खड़ी कर कामयाबी की मिसाल कायम की है। 17 वर्षीय रोहन सूरी ने अपने गजब के आत्मविश्वास और हुनर के दम पर हेल्थकेयर कंपनी अवेरिया हेल्थ सोल्यूशन्स खड़ी कर सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सूरी को हेल्थकेयर सेक्टर में उनके योगदान के फोब्र्स ने साल 2017 के 30 अंडर 30 सुपर अचीवर में शामिल किया है। उन्होंने सिर पर लगने वाली चोट के जांच के विधि विकसित की है। उन्होंने एक ऐसा ऐप बनाया है, जो ब्लू ट्रूथ के जरिए इंफेक्शन्स का पता लगाता है। इस ऐप का नाम है केट्रेस। इस ऐप के जरिए चोट का भी पता...
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अनिल बैजल - दिल्ली को मिला नया उपराज्यपाल

118 सप्ताह पहले
1969 बैच के आईएएस ऑफिसर अनिल बैजल को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के इस्तीफे के बाद यह पद खाली था। 70 वर्षीय बैजल बेहतर प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। 2006 में वह शहरी विकास मंत्रालय के सचिव पद से बैजल सेवानिवृत हुए थे। बैजल अटल बिहारी वायपेयी की सरकार में केंद्रीय गृह सचिव भी रह चुके हैं और दिल्ली विकास प्राधिकारण के वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। वह विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में एक्जिक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेके्रटरी नृपेंद्र मिश्रा भी विवेकानंद इंटरनेशनल काउंसिल से जुड...
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जे एस खेहर - भारत के नए मुख्य न्यायाधीश

118 सप्ताह पहले
पिछले माह तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश यानी न्यायमूर्ति खेहर को इस पद पर नियुक्त किए जाने की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति खेहर 27 अगस्त तक इस पद पर रहेंगे। एनजेएसी मामले में पीठ की अध्यक्षता करने के अलावा न्यायमूर्ति खेहर उस पीठ की भी अध्यक्षता कर चुके हैं, जिसने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के सरकार के फैसले को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति खेहर उस पीठ के भी सदस्य थे, जिसने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की दो कंपनियों द्वारा निवेशकत्र्ताओं की रकम वापस नहीं किए जाने की स्थिति में रॉय को जेल भेज दिया था। वह नियमित कर्मचारियों जैसे कर्तव्यों का निवर्हन करने वाले दिहाड़ी मजदूर...
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वसंत शर्मा - रोटी के रहनुमा

119 सप्ताह पहले
भगवान की कृपा से इस बूढ़े व्यक्ति को कोई रोग नहीं है। ये तीन बच्चों के पिता भी हैं। इन्हें अपने बेटों पर गर्व है। इनके बड़े बेटे का नाम आजाद शर्मा और छोटे बेटों का नाम डबलू कुमार और शशि कुमार है। तीनों बेटे पिता के डेयरी के व्यापार और किसानी में मदद करते हैं। वह सायकिल से करीब 250 लोगों के घर जाते हैं। रोटी और दाल इक्ट्ठा करते हैं। वे शाम 5 बजे तक इसे एकत्रित करते हैं और शाम 6 बजे तक इसे लोगों को बांटकर फ्री हो जाते हैं। वसंत ने यह काम पूरे लगन और समर्पण के साथ किया। इसे देखकर जिन लोगों ने उन्हें यह काम सौपा था, वे इस कार्य के बदले इन्हें पैसा देने की पेशकश क...


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