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मंगलवार, 25 जून 2019

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उषा किरण - पहली महिला कोबरा कमांडो

29 सप्ताह पहले
छत्तीसगढ़ में नक्सली वारदातों में पुलिस और कई बार आम लोगों के भी मारे जाने की खबरें आए दिन सुनने में आती हैं। घने जंगलों या दूरदराज गांवों में इस खौफ की वजह से अच्छे-अच्छे जाने से घबराते हैं, वहीं कोबरा कमांडो फोर्स की पहली महिला उषा किरण यहां बेखौफ घूमती हैं। वह सीआरपीएफ से देश की पहली महिला अफसर हैं, जो नक्सली इलाके में तैनात हैं। यह तैनाती उषा ने खुद मांगकर ली। महज 27 साल की उम्र में उषा के पास उपलब्धियों की अच्छी-खासी फेहरिस्त है।गुरुग्राम की रहने वाली उषा ने 2013 में सीआरपीएफ की परीक्षा में देश में 295वां रैंक हासिल किया। इनके पिता और दादा भी सीआरपीएफ में रह चुके हैं। 25 वर्ष की उम्र में उषा ने स...
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अरूप मुखर्जी - गरीब बच्चों के लिए स्कूल

30 सप्ताह पहले
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में ट्रैफिक विभाग में कांस्टेबल अरूप मुखर्जी ने अपनी तनख्वाह और मां से लिए गए पैसों से गरीब बच्चों के लिए स्कूल बनवा दिया है। इस स्कूल का नाम पुंचा नबादिशा मॉडल स्कूल है, जिसकी शुरुआत 2011 में हुई थी। यहां पढ़ने वाले बच्चे खास तौर पर अनुसूचित जाति के हैं। अरूप ने अपनी मां से 2.5 लाख रुपए उधार लिए थे, ताकि वह स्कूल बनवा सकें।  नेल्सन मंडेला ने कहा था, ‘शिक्षा वह शक्तिशाली हथियार है जिसकी बदौलत दुनिया बदली जा सकती है।’ भारत में शिक्षित समाज बनाने के लिए वैसे तो कई प्रयास किए गए, लेकिन आज भी एक बड़ी आबादी शिक्षा के अधिकार से वंचित है। इस आबादी में दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप...
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एसवी राव - एक रुपए में संगीत सिखाते हैं गिटार राव

31 सप्ताह पहले
आंध्र प्रदेश के सिविल इंजीनियर एसवी राव के सिर पर 55 साल की उम्र में ऐसा जुनून सवार हुआ कि इंजीनियरिंग की लगी-लगाई नौकरी छोड़कर स्वयं संगीत की शिक्षा लेने के बाद लोगों को सिर्फ एक-एक रुपया में संगीत सिखाने लग गए। गिटार, बांसुरी की टीचिंग करते-करते अब तो उनका नाम ही ‘गिटार राव’ पड़ गया है। दरअसल, सिर्फ एक रुपया में गिटार-बांसुरी बजाना सिखाने वाले राव संगीत सिखाने की भारतीय परंपरा का नया रूप लेकर आए हैं। संगीत सिखाते-सिखाते आंध्र के सिविल इंजीनियर राव लगी-लगाई नौकरी छोड़कर इतने मशहूर हो चले हैं कि अब लोग उन्हें ‘गिटार राव’ कहकर पुकारते हैं। वह सिर्फ सिखाते ही नहीं, सीखने वालों को गिटार और बांसुरियां भी देते...
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प्रवीण रंजन - लड़कियों का मददगार ऑटो ड्राइवर

32 सप्ताह पहले
रात में यात्रा करना खासकर लड़कियों और महिलाओं के लिए चिंताजनक होता है और यह चिंता गलत भी नहीं है। आए दिन ऐसी वारदातें होती रहती हैं, जिससे डर और बढ़ जाता है, लेकिन दिल्ली के एक ऑटो ड्राइवर ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे जानकर आपको भी सुखद आश्चर्य होगा। कुछ दिनों पहले एक लड़की देर रात अपने ऑफिस से घर लौट रही थी। इसी बीच, उसकी मुलाकात एक ऑटो-रिक्शा वाले से हुई। लेकिन उस रिक्शा चालक ने उस लड़की से साथ ऐसा नेक व्यवहार किया है, जिसकी सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। कोलकाता की रहने वाली नेहा दास ने फेसबुक पर अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले दिल्ली में ऑफिस से निकलने के बाद वो बाहर ऑटो का इंतजार कर रही थी। इसी ब...
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निवेधा आरएम - स्वच्छता की ‘निवेधा’

34 सप्ताह पहले
देश में स्वच्छता को लेकर आई नई जागृति से इस क्षेत्र में अभिनव प्रयोगों को करने की प्रेरणा को काफी बल मिला है। इस वर्ष बेंगलुरु में चल रहे ‘ट्रैश कॉन’ नाम के स्टार्टअप को टेक 30 स्टार्टअप के रूप में चुना गया। कंपनी लोगों के घरों से कूड़ा-कचरा इकट्ठा करती है और फिर उसमें से सॉलिड वेस्ट को अलग करने के साथ-साथ रीसाइकल करती है। ट्रैश कॉन की फाउंडर निवेधा आरएम बताती हैं कि उनके दोस्त कॉलेज जाने वाले रास्ते से गुजरना पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वहां पर कूड़े आदि की वजह से गंदी महक आया करती थी। सब इस समस्या से मुंह फेर लेते थे, लेकिन इसका समाधान ढूंढने का प्रयास कोई भी नहीं करता था। निवेधा ने इस समस्या को व्यापक तौर पर...
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गुरबचन सिंह - पर्यावरण प्रेम की मिसाल

35 सप्ताह पहले
यदि पर्यावरण को बचाना है तो पंजाब के तरनतारन के किसान गुरबचन सिंह जैसा जज्बा जरूरी है। गुरबचन खुद तो पराली नहीं ही जलाते, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। 40 एकड़ जमीन के मालिक हैं। वह वर्ष 2000 में धान की कटाई के बाद पराली को आग लगाने से तौबा कर चुके हैं। 2008 से पराली न जलाने के इतने अच्छे नतीजे आने लगे कि उन्होंने फैसला किया कि अपने बच्चों की शादी वहीं करेंगे, जहां पराली को आग नहीं लगाई जाती। गुरबचन सिंह ने अपने बड़े बेटे गुरदेव सिंह का रिश्ता उस घर में किया, जिन्होंने पराली न जलाने का संकल्प लिया। आने वाले दिनों में गुरबचन सिंह अपनी लड़की की शादी भी उसी घर में करने जा रहे हैं, जिस परिवार ने उनकी बेटी को बहू बनाने ...
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रिफत मसूदी - अमन का बल्ला

36 सप्ताह पहले
कश्मीर घाटी में हमेशा तनाव झेलने वाले इलाके नरवर में जब रिफत मसूदी नाम की महिला की चर्चा होती है तो कुछ देर के लिए ही सही पत्थरबाजी और सुरक्षाबलों से झड़पों के बीच बदलाव की उम्मीद जगती दिखती है। यह महिला अपनी हिम्मत के दम पर कई साल से घाटी की शक्ल बदलने में अपनी भूमिका निभा रही हैं। जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट बैट बनाने वाली अकेली महिला रिफत का सपना है कि भारतीय क्रिकेट स्टार्स उनके बैट्स से चौके-छक्के उड़ाएं। फिलहाल, वह घाटी के युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।   रिफत की कहानी साल 1999 में शुरू हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से पाकिस्तान गए थे। रिफत बताती हैं, ‘शांति के लिए...
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ऋतु सेन - स्वच्छता की ऋतु

37 सप्ताह पहले
इस वर्ष भी स्वच्छता के क्षेत्र में नए प्रयोग के लिए छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर को पहला पुरस्कार मिला था। इससे पहले देश में दो लाख आबादी वाले शहरों की स्वच्छता में गत वर्ष अंबिकापुर जब पूरे देश में पहला शहर बना तो उसके साथ वहां उल्लेखनीय कार्य करने वाली एक आईएस अधिकारी का नाम भी चर्चा में आया। यह अधिकारी हैं ऋतु सेन। अंबिकापुर को यह सम्मान दिलाने में तत्कालीन कलेक्टर ऋतु सेन का दो वर्ष लंबा परिश्रम शामिल था। उन्होंने आमिर खान के शो ‘सत्यमेव जयते’ के एक एपिसोड से प्रभावित होकर यह निर्णय लिया था। उन्होंने इस एपिसोड में शामिल केसी श्रीनिवासन से संपर्क किया और फिर उनके सहयोग से ‘सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट’ ...
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ई-कैंपेन - वायरल फोटो से गरीब परिवार की मदद

39 सप्ताह पहले
एक दुखभरी फोटो के वायरल होने की वजह से एक गरीब परिवार को करीब 57 लाख रुपये लोगों ने दिए हैं। इस तस्वीर को ट्विटर पर 31 हजार से अधिक बार शेयर किया गया था। दिल्ली के 37 साल के सफाईकर्मी अनिल की हाल में सीवर में काम करते हुए मौत हो गई थी। इसके बाद पत्रकार शिव सन्नी ने ट्विटर पर एक फोटो पोस्ट की, जिसमें पिता के शव के पास 11 साल के बच्चे को रोता हुआ दिखाया गया था। सोशल मीडिया पर इस तस्वीर के वायरल होने के बाद कई लोगों ने गरीब परिवार को मदद की पेशकश की। इसके बाद क्राउड फंडिंग वेबसाइट केट्टो डॉट ओआरजी पर एक एनजीओ की मदद से फंड जमा करने का कैंपेन चलाया गया। यह अभियान कारगर रहा और 2 दिनों में ही लोगों ने कुल 57 लाख रुपए अनिल के पर...
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राजेश कुमार सुमन - जज्बे को सलाम

42 सप्ताह पहले
शिक्षा उस सुगंध की तरह होती है, जो हर जगह फैलती है और समाज में सकारात्मक बदलाव का कारण बनती है। इन्हीं बातों को समझते हुए छात्रों को शिक्षा प्रदान करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने के मिशन में लगे हैं राजेश कुमार सुमन। सुमन ने बिहार में रहते हुए इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। वे शुरू से ही गरीब बच्चों को पढ़ाने में रूचि रखते थे। कुछ समय बाद सुमन को विदेश मंत्रालय में नौकरी मिल गई। वो अपनी नौकरी से खुश तो थे, लेकिन उनके मन में गरीब छात्रों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की इच्छा अब भी बाकी थी। वे चाहते थे कि अपने गृह क्षेत्र रोसड़ा के लिए कुछ करें। यह बिहार का एक पिछड़ा क्षेत्र है। यही सोचकर सुमन ने अपनी नौकरी छोड़ दी...
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शकीला शेख - संघर्ष की कला

45 सप्ताह पहले
महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अपनी मेहनत और स्मार्टनेस के कारण वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं। ऐसी ही एक कहानी है आर्टिस्ट शकीला शेख की, जिन्होंने अपनी गृहस्थ भूमिका से हटकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।  शकीला कोलकाता से 30 किमी दूर स्थित एक गांव में रहती थीं। आम महिलाओं के तरह वह भी अपने परिवार को खाना बनाकर देती थीं और घर का काम करती थीं। मगर एक दिन अचानक शकीला ने अपना गृहस्थ जीवन छोड़ दिया। बाद में कला के क्षेत्र में लगातार संघर्ष करते हुए उसने एक मशहूर और कामयाब आर्स्टिस के रूप में अपनी पहचान बनाई।  शकीला जब बहुत छोटी थीं, जब उनके पिता उन्हें छोड़ कर चले गए थे। पिता के जाने क...
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तिलक शाह मेहता - बड़ों पर भारी बच्चे का बिजनेस आइडिया

46 सप्ताह पहले
तिलक अभी 8वीं कक्षा में पढ़ते हैं और उसकी उम्र महज 13 वर्ष है। उसने एक टेक-स्टार्टअप की शुरुआत की है, जो मुंबई के लोकप्रिय डब्बावाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए, बेहद कम दामों पर बाक़ी सामानों की डिलिवरी की सुविधा भी सुनिश्चित करता है। तिलक ने ‘पेपर्स एंड पार्सल्स’ नाम से इस स्टार्टअप की शुरूआत की है। तिलक अपने स्टार्टअप के माध्यम से मुंबई के अंदर 4-8 घंटों के भीतर सामान की डिलिवरी की सुविधा दे रहा है। तिलक के पिता लंबे समय से लॉजिस्टिक के बिजनेस से जुड़े हुए हैं और उन्होंने अपने बेटे का पूरा साथ दिया। एक बार तिलक अपने ही रिश्तेदार के घर पर अपनी किताबें भूल गया था। उसको घर आकर जब यह बात ध्यान आई, तब उसका मन हुआ कि क...


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