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शुक्रवार, 21 जून 2019

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मॉडल गांव

117 सप्ताह पहले
गुवाहाटी: सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर एक नई अवधारणा का उद्घाटन किया गया। गांधीगांव के लिए एकीकृत विकास योजना की कल्पना बहुत पहले की गई थी और असम के कोलाघाट जिले के इस पिछड़े गांव को एक स्मार्ट मॉडल गांव में बदलने के लिए सफलतापूर्वक काम भी किया गया। एनआरएल द्वारा प्रायोजित इस सीएसआर परियोजना के अंतर्गत तीन मुख्य काम- स्वच्छता, पेयजल और वैकल्पिक ऊर्जा (होम सोलर सिस्टम्स और स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम) में किया गया। इसके अलावा, विभिन्न मनोरंजन सुविधाओं के साथ एक सामुदायिक घर का निर्माण भी किया गया। एनआरएल डीजीएम सीएसआर पंकज कुमार बरुआ और सीनियर जीएम (एचआर) ए के भट्टाचार्य द्वारा शेफर्ड, परियोजना में पाया गया कि ग्रामीणों को पानी से पैद...
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कचरा प्रबंधन

117 सप्ताह पहले
गुवाहाटी: असम के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (पीएचडी) के मंत्री रिहान डेमरी ने औपचारिक रूप से इस परियोजना का उद्घाटन स्थानीय आमदार अतुल बोरा की उपस्थिति में किया था। डेमैरी ने परियोजना के 'मुंह भाषण' को भी जारी किया और एनवाइरॉन द्वारा तैयार किए गए एक विशेष ट्रिसिकल वैन "सेज बहन" के माध्यम से गैर-बायोडिग्रेडेबल ठोस अपशिष्ट के संग्रह के लिए डोर-टू-डोर ड्राइव लॉन्च किया। उद्घाटन बैठक की अध्यक्षता पीईपी के चीफ इंजीनियर बिरेन भट्टाचार्य ने की थी। स्थानीय विधायक अतुल बोरा; एडीसी, कामरूप (मेट्रो) बरनाली सरमा; सौम्य कुमार बरुआ, मुख्य अभियंता डॉ. अमरज्योति कश्यप, पर्यावरण के अध्यक्ष और अभियंता निकुन्जा उज़िर इस अवसर पर मौजूद रहे। एसएलडब्लूएम...
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शिक्षण को तर्कसंगत बनाना

117 सप्ताह पहले
इटानगर: शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इंटीरियर इलाकों में लगभग 900 स्कूल एकल शिक्षक के साथ चल रहे हैं; जबकि कुछ स्कूलों में अपेक्षित संख्या से अधिक शिक्षकों की संख्या है, जो ज्यादातर इटानगर और जिला मुख्यालयों की राजधानी परिसर क्षेत्र में स्थित है। यहां तक ​​कि एसएसए शिक्षक, जो दूरस्थ क्षेत्रों के विशिष्ट स्कूलों के लिए हैं, को राजधानी या राजधानी के स्कूलों से जोड़ा जा रहा है या जुड़ा हुआ है। शिक्षा सचिव बिधोल तायंग ने कहा कि इस वर्ष जून में छुट्टी के बाद स्कूलों को फिर से खोलने से पहले पोस्टिंग के युक्तिसंगत बनाने की प्रक्रिया को पूरा करने का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि विभाग ने विद्यार्थियों के नामांकन के साथ-साथ शिक्षकों की स्कूलवार तै...
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आजीवन कैदी को डिग्री

120 सप्ताह पहले
उम्र कैद की सजा भोग रहे असम के दो कैदियों ने स्नातक की परीक्षा पास कर मिसाल कायम की है। इन कैदियों ने यह डिग्री राज्य के मुक्त विश्वविद्यालय से हासिल की है। दरअसल, चंद्रा सेतिया और बुद्धा बेनिया जब केकेएच मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित समारोह में अपनी इस तालीमी कामयाबी के बूते डिग्री हासिल कर रहे थे, तो कहीं न कहीं इसके साथ वे अपनी जिंदगी को एक नया अर्थ भी दे रहे थे। इन दोनों को मानविकी में स्नातक की डिग्री मिली है। सेतिया और बेनिया उन लोगों में से हैं, जिन्होंने जोरहट में मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रीय कारा में खोले गए अध्ययन केंद्र में अपना निबंधन कराया था। बेनिया पिछले आठ सालों से एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। सेतिया भी हत्या मामले ही सजा भोग रहा है...
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देश का सबसे स्वच्छ गांव

121 सप्ताह पहले
मेघालय के पहाड़ी इलाके में बसे मावलीनोंग को 2003 में 'डिस्कवर इंडिया’ पत्रिका ने सबसे साफ-सुथरा गांव होने का खिताब दिया था। इस खबर के लंबे समय के बाद उत्तर-पूर्व से एक और ऐसी ही सुखद खबर है। असम के पर्वतीय जिले कार्बी आंगलोंग ने मावलीनोंग की दिशा में बढ़ते हुए अपनी पहचान बनाई है। गुवाहाटी से 70 किलोमीटर दूर कार्बी जिले के सिकदामखा गांव को कार्बी आंगलोंग स्वायत्तशासी परिषदï् ने सबसे स्वच्छ गांव का खिताब दिया है। दिलचस्प है कि इस गांव में शुरू हुए स्वच्छता अभियान की कहानी दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'स्वच्छ भारत अभियान&rs...
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असम का कैशलेस मेला

122 सप्ताह पहले
जोनबील मेले में अपका स्वागत है। यहां आप नाचने-गाने और आमोद-प्रमोद के साथ सामूहिक तौर पर मछली पकडऩे के लिए आ सकते हैं, पर अगर यहां आप कुछ खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए नकदी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। अगर ऐसा करेंगे तो गोभा 'राजा’ आपको दंडित कर सकते हैं। दरअसल, जोनबील देश का अकेला ऐसा मेला है, जो पूरी तरह कैशलेस है। तीन दिनों तक यहां पैसे की कोई कीमत नहीं रह जाती, नकदी पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है। लिहाजा, नोटबंदी जैसे खतरे का भी यहां कोई असर नहीं दिखता। यह सब इसीलिए भी इस मेले में स्वाभाविक और कारगर लगता है, क्योंकि जनजातीय लोगों के पास वैसे भी खर्च करने या भुनाने के लिए दो हजार या पांच सौ रुपए के नोट आमतौर पर होते ही न...


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