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मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

साकार होगा स्वच्छ भारत का सपना

स्वच्छ भारत अभियान 2 अक्टूबर को दो साल का हो चुका है, इसीलिए उससे पहले 25 सितंबर को 'मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पर बोलना लाजिमी था। उसमें उन्होंने विस्तार से इसका जिक्र किया। पिछले दो वर्षों में स्वच्छता पर मोदी के प्रसारित विचार के मुख्य अंश...

नरेंद्र मोदी ने पहली बार जब प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित किया तो उन्होंने कहा था कि हम छोटे-छोटे काम करके ही देश के लिए बड़ा काम कर सकते हैं। उन्होंने स्वच्छता अभियान शुरू करने का देशावासियों से आह्वान किया था। उन्होंने साल 2019 में दो अक्टूबर को गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर देश को पूर्ण रूप से स्वच्छ कर उन्हें असली श्रद्धांजलि देने की बात कही थी, क्योंकि गांधी के जीवन में भी स्वच्छता का बहुत बड़ा महत्व था। स्वच्छ भारत अभियान अब दो साल का हो चुका है। इन दो वर्षों में स्वच्छता अभियान पर नजर दौड़ाने पर पाते हैं कि प्रधानमंत्री का आह्वान आज एक जन आंदोलन का रूप अख्तियार कर चुका है। इन दो वर्षों में स्वच्छता अभियान के विभिन्न पड़ावों पर मोदी अपने विचार रखते आ रहे हैं। इसी संदर्भ में 25 सितंबर को 'मन की बात’ कार्यक्रम के तहत स्वच्छता पर बोलते हुए उन्होंने देशवासियों के प्रयासों की तारीफ की।   

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि दो साल पहले, 2 अक्टूबर को पूज्य बापू की जयंती पर 'स्वच्छ भारत मिशन’ को हमने प्रारंभ किया था। उस दिन मैंने कहा था कि स्वच्छता स्वभाव बनना चाहिए, हर नागरिक का कर्तव्य बनना चाहिए, गंदगी के प्रति नफरत का माहौल बनना चाहिए। अब 2 अक्टूबर को जब दो वर्ष हो रहे हैं, तब मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि देश के सवा-सौ करोड़ देशवासियों के दिल में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है। और मैंने कहा था 'एक कदम स्वच्छता की ओर’ और आज हम सब कह सकते हैं कि हर किसी ने एक कदम आगे बढऩे का प्रयास किया है। मतलब कि देश के सवा-सौ करोड़ कदम स्वच्छता की ओर आगे बढ़े हैं।

ये भी पक्का हो चुका है, दिशा सही है, फल कितने अच्छे होते हैं, थोड़े से प्रयास से क्या होता है, वो भी नजर आया है और इसीलिए हर कोई चाहे सामान्य नागरिक हो, चाहे शासक हो, चाहे सरकार के कार्यालय हों या सड़क हो, बस-अड्डे हों या रेल हो, स्कूल या कॉलेज हो, धार्मिक स्थान हो या  अस्पताल हो, बच्चों से लेकर बूढ़ों तक, गांव गरीब, किसान महिलाएं, सब कोई, स्वच्छता के लिए कुछ-न-कुछ योगदान दे रहे हैं। मीडिया के मित्रों ने भी एक सकारात्मक भूमिका निभाई है। लेकिन हमें अभी और भी आगे बढ़ना है।

करीब ढाई करोड़ शौचालय बने

शुरुआत अच्छी हुई है, प्रयास भरपूर हुए हैं, और हम कामयाब होंगे, ये विश्वास भी पैदा हुआ है। ये भी तो ज़रूरी होता है। ग्रामीण भारत की बात करें, तो अब तक दो करोड़ अड़तालीस लाख, यानी करीब-करीब ढाई-करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है। आने वाले एक साल में डेढ़ करोड़ और शौचालय बनाने का इरादा है। आरोग्य के लिए, नागरिकों के सम्मान के लिए, खास कर माताओं-बहनों के सम्मान के लिए, खुले में शौच जाने की आदत बंद होनी ही चाहिए और इसीलिए 'खुले में शौच जाने की आदतों से मुक्ति’ (ओडीएफ ), उसका एक अभियान चल पड़ा है। राज्यों के बीच, जिलों के बीच और गांवों के बीच एक स्वस्थ स्पर्धा चल पड़ी है। आंध्र प्रदेश, गुजरात और केरल खुले में शौच जाने की आदत से मुक्ति की दिशा में बहुत ही निकट भविष्य में पूर्ण सफलता प्राप्त कर लेंगे। मैं अभी गुजरात गया था, तो मुझे अफसरों ने बताया कि पोरबंदर, जो कि महात्मा गांधी का जन्मस्थान है, इस 2 अक्टूबर को पूरी तरह ओडीएफ  का लक्ष्य हासिल कर लेगा। जिन्होंने इस काम को किया है, उनको बधाई, जो करने का प्रयास कर रहे हैं, उनको शुभकामनाएं और देशवासियों से मेरा आग्रह है कि मां-बहनों के सम्मान के लिए, छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए, इस समस्या से हमें देश को मुक्त करना है। आइए हम संकल्प लेकर के आगे बढ़ें।

1969 पर स्वच्छता मिशन की जानकारी

खासकर मैं, नौजवान मित्र, जो कि आज-कल टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग करते हैं, उनके लिए एक योजना प्रस्तुत करना चाहता हूं। स्वच्छता मिशन का आपके शहर में क्या हाल है? ये जानने का हक हर किसी को है और इसके लिए भारत सरकार ने एक टेलीफोन नंबर दिया है-1969। हम जानते हैं, 1869 में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। 1969 में हमने महात्मा गांधी की शताब्दी मनाई थी। और 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने वाले हैं। ये 1969 नंबर- पर आप फोन करके न सिर्फ अपने शहर में शौचालयों के निर्माण की स्थिति जान पाएंगे, बल्कि शौचालय बनवाने के लिए आवेदन भी कर पाएंगे। आप जरूर उसका लाभ उठाएं। इतना ही नहीं, सफाई से जुड़ी शिकायतों और उन शिकायतों के समाधान की स्थिति जानने के लिए एक स्वच्छता ऐप की शुरुआत की है। आप इसका भरपूर फायदा उठाएं, खासकर के युवा पीढ़ी फायदा उठाए। भारत सरकार ने कॉरपोरेट वर्ल्ड से भी अपील की है कि वे आगे आएं। जो स्वच्छता के लिए काम करना चाहते हैं, ऐसे यंग प्रोफेशनल को स्पॉन्सर करें। जिलों के अन्दर 'स्वच्छ भारत फेलो’ के रूप में उनको भेजा जा सकता है।

'वेस्ट टू कम्पोस्ट की तरफ हो कदम

सिर्फ संस्कारों तक सीमित रहने से ही स्वच्छता अभियान की बात बनने वाली नहीं है। स्वच्छता स्वभाव बन जाए, इतने से भी काफी नहीं है। आज के युग में स्वच्छता के साथ स्वास्थ्य जैसे जुड़ता है, वैसे स्वच्छता के साथ रेवेन्यू मॉडल भी अनिवार्य है। 'वेस्ट टू वेल्थ’ भी उसका एक अंग होना जरूरी है और इसीलिए स्वच्छता मिशन के साथ-साथ 'वेस्ट टू कम्पोस्ट’ की तरफ हमें आगे बढऩा है। सॉलिड वेस्ट की प्रोसेसिंग हो। कम्पोस्ट में बदलने के लिए काम हो। इसके लिए सरकार की तरफ से पॉलिसी इंटरवेंशन की भी शुरुआत की गई है।

फर्टिलाइजर कंपनियों को कहा है कि वे वेस्ट से तैयार कम्पोस्ट खरीदें। जो किसान ऑर्गेनिक फार्मिंग में जाना चाहते हैं, उनको ये मुहैया कराएं। जो लोग अपनी जमीन का स्वास्थ्य सुधारना चाहते हैं, धरती की तबीयत की फिक्र करते हैं, जो केमिकल फर्टिलाइजर के कारण काफी नुकसान हो चुका है, उनको अगर कुछ मात्रा में इस प्रकार की खाद की जरूरत है, तो वो मुहैया कराएं। श्रीमान अमिताभ बच्चन जी ब्रांड एंबेसडर के रूप में इस काम में काफी योगदान दे रहे हैं। मैं नौजवानों को 'वेस्ट टू वेल्थ’ मूवमेंट में नये-नये स्टार्ट अप के लिए भी निमंत्रित करता हूं। वैसे साधन विकसित करें,  वैसी टेक्नोलॉजी विकसित करें, ताकि सस्ते में उसका मास प्रोडक्शन किया जा सके। यह काम करने जैसा है। बहुत बड़ा रोजगार का भी अवसर है। बहुत बड़ी आर्थिक गतिविधि का भी अवसर है। अगर वेस्ट में से वेल्थ क्रिएशन का यह प्रयोग सफल होता है तो इसी वर्ष 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एक विशेष कार्यक्रम 'आईएनडीओएसएएन’, इंडियन सैनिटेशन कांफ्रेंस आयोजित हो रहा है। देश भर से मंत्री, मुख्यमंत्री, महानगरों के मेयर, कमिशनर- ये सब मिल करके सिर्फ और सिर्फ 'स्वच्छता’ पर गहन चिंतन और मनन करने वाले हैं। टेक्नोलॉजी में क्या हो सकता है?  फाइनेंशियल मॉडल क्या हो सकता है? जन-भागीदारी कैसे हो सकती है? रोजगार के अवसर इसमें कैसे बढ़ाए जा सकते हैं? सब विषयों पर चर्चा होने वाली है।

आमजन का प्रयास सराहनीय

मैं देख रहा हूं कि लगातार स्वच्छता के लिए नई-नई खबरें आती रहती हैं। अभी एक दिन मैंने अखबार में पढ़ा कि गुजरात टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने 107 गांवों में जाकर शौचालय निर्माण के लिए जागरण अभियान चलाया। स्वयं श्रम किया और करीब-करीब 9 हजार शौचालय बनाने में उन्होंने अपना योगदान दिया। पिछले दिनों आपने देखा होगा, विंग कमांडर परमवीर सिंह की अगुवाई में एक टीम ने तो गंगा में देवप्रयाग से लेकर गंगा सागर तक, 2800 किलोमीटर की यात्रा तैर कर पूरी की और स्वच्छता का संदेश दिया। भारत सरकार के अपने-अपने विभागों ने, साल-भर का कैलेंडर बनाया है। हर डिपार्टमेंट 15 दिन विशेष रूप से स्वच्छता पर फोकस करता है। 1 से 15 अक्टूबर तक ड्रिंकिंग वाटर एंड सैनिटेशन डिपार्टमेंट, पंचायती राज डिपार्टमेंट, रूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट- ये तीनों मिल कर अपने-अपने क्षेत्र में स्वच्छता का रोड मैप बना कर काम करने वाले हैं।

सरकारी विभागों के साथ करें सफाई

अक्टूबर महीने के लास्ट टू वीक, 16 से 31 अक्टूबर तक डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर,  कृषि और किसान कल्याण विभाग, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, कंज्यूमर अफेयर्स जैसे तीन मंत्रालय अपने साथ संबद्ध क्षेत्र में 15 दिनों तक सफाई अभियान चलाने वाले हैं। मेरा नागरिकों से भी अनुरोध है कि ये विभागों के द्वारा जो काम चलता है, उसमें आपका कहीं संबंध आता है, तो आप भी जुड़ जाइए। आपने देखा होगा, इन दिनों स्वच्छता का सर्वे अभियान भी चलता है। पहले एक बार 73 शहरों के सर्वे करके स्वच्छता की क्या स्थिति है, उसे देश की जनता के सामने प्रस्तुत किया था। अब 1 लाख से ऊपर जनसंख्या वाले जो 500 के करीब शहर हैं, उनकी बारी है और इसके कारण हर शहर के अन्दर एक विश्वास पैदा होता है कि चलो भाई, हम पीछे रह गए, अब अगली बार हम कुछ अच्छा करेंगे। स्वच्छता के लिए स्पर्धा का माहौल बना है। मैं आशा करता हूं, हम सभी नागरिक इस अभियान में जितना योगदान दे सकते हैं, देना चाहिए। 2 अक्टूबर यानी गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती है।

'स्वच्छ भारत मिशन’ को 2 वर्ष हो रहे हैं। मैं गांधी जयंती से दिवाली तक, खादी का कुछ-न-कुछ खरीदने के लिए तो आग्रह करता ही रहता हूं। इस बार भी मेरा आग्रह है कि हर परिवार में कोई-न-कोई खादी की चीज होनी चाहिए, ताकि गरीब के घर में दिवाली का दीया जल सके। 2 अक्टूबर को, जबकि रविवार है, एक नागरिक के नाते हम स्वयं स्वच्छता में कहीं न कहीं जुड़ सकते हैं क्या? 2 घंटे, 4 घंटे शारीरिक रूप से आप सफाई के काम में अपने-आप को जोड़िए और मैं आपसे कहता हूं कि आप जो सफाई अभियान में जुड़ें, उसकी एक फोटो मुझे “NarendraModiApp” पर शेयर कीजिए। वीडियो हो, तो वीडियो शेयर कीजिए। देखिए, पूरे देश में हम लोगों के प्रयास से फिर एक बार इस आंदोलन को नई ताक़त मिल जाएगी, नई गति मिल जाएगी। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को पुण्य स्मरण करते हुए हम देश के लिए कुछ-न-कुछ करने का संकल्प करें।

28 अगस्त 2016, 'मन की बात

सपना साकार करने वालों को नमन

मेरे प्यारे देशवासियो, विकास जब जन-आंदोलन बन जाए, तो कितना बड़ा परिवर्तन आता है। जनशक्ति ईश्वर का ही रूप माना जाता है। भारत सरकार ने पिछले दिनों 5 राज्य सरकारों के सहयोग के साथ स्वच्छ गंगा और उसकी सफाई के लिए लोगों को जोडऩे का एक सफल प्रयास किया। इस महीने की 20 तारीख को इलाहाबाद में उन लोगों को निमंत्रित किया गया जो गंगा के तट पर रहने वाले गांवों के प्रधान थे। पुरुष भी थे, महिलाएं भी थीं। वे इलाहाबाद आए और गंगा तट के गांवों के प्रधानों ने मां गंगा की साक्षी में शपथ ली कि वे गंगा तट के अपने गांवों में खुले में शौच जाने की परंपरा को तत्काल बंद करवाएंगे, शौचालय बनाने का अभियान चलाएंगे और गंगा सफाई में गांव पूरी तरह योगदान देगा और गंगा को गंदा नहीं होने देगा। मैं इन प्रधानों को इस संकल्प के लिए इलाहाबाद आने पर बधाई देता हूं। कोई उत्तराखंड से आया, कोई उत्तर प्रदेश से आया, कोई बिहार से आया, कोई झारखंड से आया और कोई पश्चिम बंगाल से आया। अलग-अलग जगहों से आने वाले निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं। मैं भारत सरकार के उन सभी मंत्रालयों को भी बधाई देता हूं, उन मंत्रियों को भी बधाई देता हूं जिन्होंने इस कल्पना को साकार किया। मैं उन सभी 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने जनशक्ति को जोड़ करके गंगा की सफाई में एक अहम कदम उठाया। मेरे प्यारे देशवासियो, 'स्वच्छ-भारत’ ये हर भारतीय का सपना बन गया है। कुछ भारतीयों का संकल्प बन गया है। कुछ भारतीयों ने इसे अपना मकसद बना लिया है। लेकिन हर कोई किसी-न-किसी रूप में इससे जुड़ा है, हर कोई अपना योगदान दे रहा है। रोज खबरें आती रहती हैं, कैसे-कैसे नये प्रयास हो रहे हैं।

15 अगस्त 2016,

लाल किले से संबोधन

दो करोड़ से ज्यादा शौचालय बने

इस साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब लालकिले से भाषण दिया तो स्वच्छता अभियान को एक बार फिर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जब मैंने पहली बार इस लाल किले के प्राचीर से आपलोगों का दर्शन किया था तो मैंने अपनी भावनाएं भी साझा की थीं। मैंने कहा था कि मेरा देश ऐसा कैसे हो सकता है। मैंने स्वच्छता अभियान चलाने का संकल्प लिया था। आज मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि इतने कम समय में हिंदुस्तान के गांवों में दो करोड़ से ज्यादा शौचालय बन चुके हैं। इतना ही नहीं 70 हजार से अधिक गांव भी आज खुले में शौच जाने के शाप से मुक्त हो चुके हैं। सामान्य जीवन में बदलाव लाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं।

15 अगस्त 2015, लाल किले से संबोधन

'मैं छोटी बातें करने वाला ही प्रधानमंत्री हूं’

पिछली बार जब मैंने लाल किले से देश में शौचालय की दशा और उसे बनाने की बात की थी तो देश के लिए शुरू के घंटे दो घंटे का समय अजूबा लगने जैसा था। लोग सोचते होंगे कि कैसा प्रधानमंत्री है कि लाल किले से शौचालय जैसी महत्वहीन चीजों पर अपना अमूल्य समय जाया कर रहा है। उस समय मैंने कहा था कि हां मैं छोटी-छोटी समस्या सुलझाने के लिए बात करने वाला प्रधानमंत्री हूं। और आज देखिए पूरे देश में जितने भी सर्वे होते हैं, हर सर्वे में एक बात उजागर हो रही है कि इस टीम इंडिया की सबसे महत्वपूर्ण जन-जन को छूने वाली कोई बात है तो वह है स्वच्छता का अभियान। भाइयो-बहनो, हमने स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समाज के लोगों का आह्वान कर 9-9 लोगों को नामांकित करने का काम किया। आज इस टीम इंडिया को मुझे बधाई देनी है, उन सबका आज हृदय से अभिनंदन करता हूं। लेकिन एक बात जो मुझे सबसे ज्यादा कहनी है वो यह कि स्वच्छ-भारत अभियान को सबसे बड़ी ताकत कहां से मिली है। उसका सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर कौन है। आपका ध्यान नहीं गया होगा, लेकिन आप अपने परिवार में याद कीजिए क्या हुआ था। हिंदुस्तान में ऐसे कोटि-कोटि परिवार हैं जिन परिवारों में 5 साल, 10 साल और 15 साल के बालक ही इस स्वच्छ भारत अभियान के सबसे बड़े एंबेसडर हैं। घर में कोई कूड़ा-कचरा करता है तो बच्चे मां-बाप को रोकते हैं कि नहीं, गंदगी मत करो, कूड़ा-कचरा मत फेंको, किसी पिता को गुटखा खाने की आदत है और कार का शीशा खोलता है तो बच्चा रोक देता है कि दादा बाहर थूकना नहीं, भारत स्वच्छ रहना चाहिए। कार्यक्रम की सफलता उन छोटे-छोटे बालकों के कारण है। मैं, मेरे देश के भविष्य के प्रति, उन बालकों के प्रति अपना सर झुकाना चाहता हूं। सर झुका कर नमन करना चाहता हूं। जो बात बड़े-बड़े लोगों को समझने में देर लगती है वो भोले-भाले निर्मल मन के बालकों ने तुरंत पकड़ ली है। मुझे विश्वास है जिस देश का बालक इतना सजग हो, स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध हो वह देश स्वच्छ होकर रहेगा। गंदगी के प्रति नफरत पैदा होकर रहेगी। 2019, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती हम मनाने वाले हैं और महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर स्वच्छ भारत को हमें उन्हें अर्पित करना है। महात्मा गांधी को 150वीं जयंती पर इससे बड़ी कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती। और इसीलिए अभी तो काम शुरू हुआ है लेकिन मुझे इसको आगे बढ़ाना है।

15 अगस्त 2014,

लालकिले से संबोधन

2019 तक देश को स्वच्छ बनाने का संकल्प  

राष्ट्र के चरित्र के रूप में सबसे बड़ी रूकावट अगर कुछ है तो वह है हमारे चारों ओर दिखाई दे रही गंदगी। मैंने यहां आकर सरकार में सबसे पहला काम सफाई का किया। लोगों को आश्चर्य हुआ कि क्या यह प्रधानमंत्री का काम है। मेरे लिए तो बहुत बड़ा काम है। अगर सवा सौ करोड़ देशवासी यह तय कर ले कि मैं कभी गंदगी नहीं फैलाऊंगा, तो दुनिया की कौन-सी ताकत है जो हमारे शहर गांव को आकर गंदा कर सके। हम तय करें कि 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे, हमारा गांव, हमारा देश, हमारा मोहल्ला, हमारे स्कूंल, हमारे मंदिर, हमारे अस्पताल, सभी क्षेत्रों में गंदगी का नामोनिशान नहीं रहने देंगे। लेकिन यह काम अकेले सरकार की वश की बात नहीं है। इस संकल्प को कोई पूरा कर सकता है तो वह है देश की जनता। यह काम जन भागीदारी से होता है। आज हमारी माताओं बहनों को खुले में शौच जाना पड़ता है, क्या हम ये चाहते हैं?  क्या, हम सबका दायित्व नहीं है ? हमें कम से कम शौचालय का प्रबंध करना चाहिए। मुझे स्वच्छ भारत का अभियान इसी 2 अक्टूबर से आरंभ करना है और चार साल के भीतर हम इस काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं। एक काम तो मैं आज ही शुरू करना चाहता हूं वो है हिंदुस्तान के सभी स्कूलों में टॉयलेट। बच्चियों के लिए अलग टॉयलेट हो तभी तो हमारी बच्चियां स्कूल छोड़कर के भागेंगी नहीं। मैं एमपी फंड का उपयोग करने वाले सांसदों से आग्रह करता हूं कि एक साल के लिए अपना धन स्कूलों में टॉयलटों को बनाने में खर्च कीजिए। अगले 15 अगस्त को जब हम यहां खड़े हों तो विश्वास के साथ खड़े हों, तब हिंदुस्तान का कोई स्कूल ऐसा न हो जहां बच्चे और बच्चियों के लिए अलग टॉयलेटों का निर्माण होना बाकी हो। 

 

3 अक्टूबर 2014

स्वच्छ भारत का सपना साकार होने का विश्वास

महात्मा गांधी की जयंती पर स्वच्छ भारत का अभियान सवा सौ करोड़ देशवासियों ने आरंभ किया है। मुझे विश्वास है कि आप सब इसको आगे बढ़ाएंगे। मैंने कल एक बात कही थी स्वच्छ भारत अभियान में कि मैं नौ लोगों को निमंत्रित करूंगा और वे खुद सफाई करते हुए अपने वीडियो को सोशल मीडिया में अपलोड करेंगे और वे 'और’ नौ लोगों को निमंत्रित करेंगे। आप भी इसमें जुड़िए, आप सफाई कीजिए, आप जिन नौ लोगों का आह्वान करना चाहते हैं, उनको कीजिए, वे भी सफाई करें, आ अपने साथी मित्रों को कहिए, बहुत ऊपर जाने की जरूरत नहीं, और नौ लोगों को कहें, फिर वो और नौ लोगों को कहें, धीरे-धीरे पूरे देश में ये माहौल बन जाएगा। मैं विश्वास करता हूं कि इस काम को आप आगे बढ़ाएंगे। मेरे देशवासियों, सवा सौ करोड़ देशवासियों के भीतर अपार शक्ति है, अपार सामर्थ्य है। हमें अपने आपको पहचानने की जरूरत है। आज विजयदशमी का पर्व है। ये विजयदशमी का पर्व बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का पर्व है। हर कोई जरूर सोचता होगा अपने-अपने भीतर की जितनी ज्यादा बुराइयों को पराजय करके विजय प्राप्त करे, लेकिन राष्ट्र के रूप में मुझे लगता है कि आओ विजयदशमी के पावन पर्व पर हम सब गंदगी से मुक्ति का संकल्प करें और गंदगी को खत्म कर के विजय प्राप्त करना विजयदशमी के पर्व पर हम ये संकल्प कर सकते हैं।

एक नज़र में

देश के हर स्कूल में शौचालय बनाने का लिया फैसला

लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाने के निर्देश

सांसदों से सांसद निधि के उपयोग करने का किया आग्रह

जन भागीदारी से स्वच्छता अभियान चलाने की अपील की

(प्रस्तुति: प्रसन्न प्रांजल)

हाईलाइट

''स्वास्थ्य से संबंधित है स्वच्छता। इसे राजस्व से जोडऩा उतना ही महत्त्वपूर्ण है। कई कारकों में से एक कचरे से आय होनी चाहिए। इसीलिए यह अनिवार्य है कि हमलोगों को 'कचरे से खाद मॉडल की ओर अग्रसर होना चाहिए।”

यह सुनकर मुझे अति प्रसन्नता और संतुष्टि होती है कि आमलोगों ने यह महसूस करना शुरू कर दिया है कि उन्हें अपने आस-पास गंदगी नहीं फैलानी चाहिए और जो गंदगी है उसमें वे और इजाफा नहीं करेंगे।

देश के सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय होना चाहिए। तभी हमारी बेटियों को बीच में स्कूल छोडऩे को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मैं सभी सांसदों से अपील करता हूं कि वे अपना सांसद कोष शौचालय निर्माण में खर्च करें।



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