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बुधवार, 23 मई 2018

श्री श्री रविशंकर के आगमन से खिले आस्था के फूल

श्री श्री रविशंकर के सुलभ ग्राम में आते ही पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया। सुलभ की उपलब्धियों से श्री श्री अभिभूत हुए तो उनको अपने बीच पाकर सुलभ परिवार

विख्यात आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर दो फरवरी को दिल्ली स्थित सुलभ ग्राम पधारे और यहां चल रही विभिन्न तरह की गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने सुलभ में टू-पिट-पोर फ्लश टॉयलेट, बायोगैस प्लांट, वाटर एटीएम, मानव मल से बनने वाली खाद आदि के बारे गहरी दिलचस्पी दिखाई। श्री श्री ने सुलभ ग्राम में बायो गैस पर भोजन बनाने की जानकारी भी ली।

सुलभ ग्राम में आध्यात्मिक गुरु का स्वागत डॉ. विन्देश्वर पाठक और उनकी पत्नी अमोला पाठक ने माल्यार्पण करते हुए किया। इस मौके पर सुलभ इंटरनेशनल की अध्यक्ष ऊषा चौमड़ ने भी श्री श्री का तहे दिल से सुलभ ग्राम आगमन पर अभिनंदन किया। गौरतलब है कि ऊषा चौमड़ पूर्व में एक स्कैवेंजर थीं। स्वागत के बाद सुलभ ग्राम का दृश्य तब अचानक ही आस्थामय हो गया जब पूर्व स्कैवेंजर महिलाओं के समूह ने वैदिक मंत्रोच्चार शुरू किया। इन लोगों को संस्कृत की शिक्षा हिंदू पंडितों ने दी है।

सुलभ ग्राम में श्री श्री पहली बार पधारे थे। उनका स्वागत करते हुए सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा, 'सुलभ परिवार आपको अपने बीच पाकर धन्य हो गया है। गुरुदेव हमारे ग्राम में पहली बार आए हैं, लेकिन इनके विचार को और इनके दिखाए गए मार्ग पर हम हमेशा से ही चलते आ रहे हैं। गुरुदेव कहते हैं कि क्रोध नहीं करना चाहिए। मनुष्य के विचार और कर्म जब ऊंचे होते हैं तब वह क्रोध को त्याग देता है। हमारे आश्रम में भी क्रोध के लिए कोई जगह नहीं है।’

इस मौके पर डॉ. पाठक ने आगे कहा, 'गुरुदेव देश को जीना सिखा रहे हैं, वे देश से कुछ चाहते नहीं, बल्कि देश को देने की बात करते हैं। हमारा सुलभ भी वही करता है। हम पिछले 50 वर्षों से देश की सेवा में लगे हुए हैं। हम देश से कुछ चाहते नहीं, देश को स्वच्छ बनाना चाहते हैं।’ इस मौके पर डॉ. पाठक ने श्री श्री के सुलभ कैंपस में आने के लिए आभार जताया।

सुलभ कैंपस में अपने अनुभवों के बाद श्री श्री ने डॉ. पाठक की सराहना की और कहा कि सुलभ परिवार में एक जीवन को जीने के लिए जरूरी हर चीज को खुद बनाने की क्षमता है, जो कहीं और देखने को नहीं मिलती। आध्यत्मिक गुरु ने कहा कि सुलभ एक स्वायत्त ग्राम है। प्रसाद से लेकर प्रसाधन तक आधुनिक जीवन जीने के लिए जरूरी हर चीज यहां खुद से बनाई जाती है। उन्होंने बायो गैस पर खाना तो बनाया ही साथ-साथ वहां किस तरह से पानी को शुद्ध किया जाता है, यह भी देखा। उन्होंने खुद अपने हाथों से बायो गैस से चलने वाले लैंप को जलाकर देखा। ये सब देखने-करने के बाद उनके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव दिखा।

श्री श्री ने वृंदावन से आईं विधवा माताओं के समूह से भी भेंट की। उन्होंने कहा, 'सुलभ ग्राम में जहां एक तरफ विज्ञान दिखता है, तो वहीं दूसरी तरफ वृंदावन से आई हुई राधाएं भी हैं।’  सुलभ ग्राम में श्री श्री उन दो गांवों के लोगों से मिले, जहां खुले में शौच की प्रथा पूरी तरह खत्म हो गई है। इसके बाद आध्यात्मिक गुरु सुलभ इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों से मिले और सुलभ डिस्पेंसरी को देखा।

श्री श्री ने डॉ. पाठक को कर्मयोगी बताया और कहा कि उन्होंने अपने ग्राम को कर्म और योग दोनों से जोड़ा है। उन्होंने अपने विजन को ही अपना मिशन बना लिया और देश में एक बड़ा परिवर्तन ले आए। सुलभ ग्राम के अपने अनुभवों को लेकर उन्होंने कहा, 'यहां दीया भी जल रहा है, मोटर भी चल रहा है। यह परिवर्तन देश की उन्नति के लिए बहुत ही जरूरी है।’

श्री श्री ने अपने आर्ट और लिविंग को सुलभ के कार्यों से जोड़ते हुए कहा कि योग में सबसे पहला नियम है शौच यानी खुद को शुचित रखना। इसके बाद बारी आती है संतोष, तप, स्वाध्याय और भक्तिकी। ये सारे ही नियम इस सुलभ ग्राम में देखने को मिलते हैं। इस मौके पर सुलभ इंटरनेशनल के चेयरमैन एसपी सिंह ने श्री श्री को सुलभ ग्राम आगमन पर धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'श्री श्री के आने से हमें मुक्ति का द्वार मिल गया है।’ उन्होंने सुलभ आंदोलन को एक धर्मयुद्ध बताया। सिंह ने कहा कि हम कानून में कोई बदलाव या संशोधन लाने के लिए काम नहीं कर रहे हैं। हम तो राजा राम मोहन राय और गांधी जी के संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं। यही नहीं, कानून बदलने के बाद भी जो बदलाव नहीं आ सके, वो बदलाव डॉ. पाठक ने लाकर दिखाया है। डॉ. पाठक और श्री श्री रविशंकर वैसे तो अलग- अलग मिशन से जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों के ही विचारों को सुनकर ऐसा लगता है मानो वे एक दूसरे के पूरक हैं। बेहतर जीवन, स्वच्छता, सुंदरता और प्रकृति यह दोनों के ही जीवन का ध्येय है। इन्हीं विचारों के साथ ये दोनों देश और देशवासियों के जीवन को बेहतर और समृद्ध बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

 



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