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शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

राजपथ पर सांस्कृतिक विविधता का शानदार प्रदर्शन

नई दिल्ली। देश के 68वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विजय चौक से ऐतिहासिक लालकिले तक देश की आन-बान-शान का शानदार नजारा देखा गया जिसमें प्राचीन काल से चली आ रही भारत की अनूठी एकता में पिरोई विविधताओं वाली विरासत, आधुनिक युग की विभिन्न क्षेत्रों की उसकी उपलब्धियां और देश की सुरक्षा की गारंटी देने वाली फौज की क्षमता का भव्य प्रदर्शन हुआ।

गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि अबु धाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान थे। परेड में यूएई के सैनिकों की एक टुकड़ी ने अपने देश के ध्वज के साथ हिस्सा लिया जिसमें उसका संगीत बैंड शामिल था । यूएई के दस्ते में 149 जवान शामिल थे जिसमें 35 संगीतकार थे। सलामी मंच पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मौजूदगी में राजपथ पर आज भारत की संस्कृति के रंगों और रक्षा क्षेत्र की ताकत का प्रदर्शन किया गया। परेड में जहां सारी दुनिया में सबसे अधिक विभिन्नता वाले देश भारत को एक सिरे में पिरोने वाली उसकी हर कोने की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाया, वहीं अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइलों, विमानों और भारतीय सैनिकों के दस्तों ने देश के किसी भी चुनौती से निपट सकने की ताकत का अहसास कराया। सबसे अंत में रोमांच से भर देने वाले वायु सेना के अत्याधुनिक विमानों को राजपथ के उपर से हैरतअंगेज कारनामों के साथ उड़ान भरते देख कर उन विमानों की ताकत के साथ ही वायुसेना के पायलटों का हुनर और जांबाज़ी का अहसास हुआ।

विजय चौक से ऐतिहासिक लालकिले तक दोनों ओर उत्साही जनता के विशाल हुजूम के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सलामी मंच से परेड का निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुबह अमर जवान ज्योति पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की ।

गणतंत्र दिवस परेड में ही नहीं बल्कि उसे देखने आए देश के हर क्षेत्र, समुदाय, जाति और धर्म के उमड़े जन सैलाब ने अनेकता में एकता के जज़्बे का अनूठा प्रदर्शन किया। परेड के 8 किलोमीटर के रास्ते में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वृद्धों के चेहरों की चमक और उत्साह देखते ही बनता था। करीब 10 बजे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तिरंगा फहराया। राष्ट्रगान की धुन के बीच 21 तोपों की सलामी एवं हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा के बाद परेड शुरू हुई। परेड से पहले सलामी मंच पर हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। यह शांति काल में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। आंखों में गर्व का भाव लिये हंगपन दादा की पत्नी श्रीमति चासेल लवांग ने सम्मान स्वीकार किया।

राष्ट्रपति भवन के समीप से रायसीना हिल्स की ओट से परेड की अगुवाई करने वाली सेना की पहली टुकड़ी की झलक पाते ही विजय चौक से राजपथ तक, पूरा माहौल लोगों की करतल ध्वनियों से गूंज गया। चार एमआई-17 हेलिकॉप्टर आकाश से पुष्प वर्षा करते हुए राजपथ के उपर से गुजरे, इनमें से एक हेलिकॉप्टर तिरंगा लेकर उड़ रहा था जबकि तीन अन्य हेलिकॉप्टरों पर सेना, नौसेना और वायु सेना की पताका फहरा रही थी। इसके बाद परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवाने और उनके नायब मेजर जनरल राजेश सहाय ने सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर-- भारत के राष्ट्रपति के प्रति सम्मान प्रकट किया।

परेड की कमान संभाले जांबाजों व परमवीर चक्र एवं अशोक चक्र विजेताओं की अगुआई में परेड शुरू हुई। मार्चिंग दस्ते में सबसे पहला स्थान अतिथियों को दिया गया। भारत के निमंत्रण पर परेड में शामिल यूएई के दस्ते ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रीय पर्व का हिस्सा बन आन-बान-शान के प्रतीक राष्ट्रध्वज तिरंगे को सलामी दी। दर्शक दीर्घा ने तालियों से उनका स्वागत किया।

61 कैविलरी दस्ते के पीछे भीमकाय टैंक टी90 को राजपथ से गुजरते देख दर्शक रोमांच से भर उठे। इसके पीछे आए बाल्वे मशीन पिकेट, ब्रह्मोस, आकाश, स्मर्च एवं मिसाइलों को देख कर देशवासियों को सैन्य क्षमता का परिचय मिला। एकीकृत संचार व युद्धक प्रणाली से लैस उन्नत हेलिकॉप्टरों ने राष्ट्राध्यक्ष व राष्ट्रध्वज को सलामी दी। परेड के बड़े आकषर्ण में से एक एमआई-35 हेलिकॉप्टरों, स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस, जगुआर, मिग 29 और सुखोई की सलामी उड़ान रही । इसमें सुपरहक्यूलियस विमान सी17ग्लोब मास्टर मुख्य आकषर्ण रहा । इसके बाद एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर रूद्र के साथ ध्रुव ने भी परेड में हिस्सा लिया ।

परेड में हथियार का स्थान बताने वाले रडार स्वाति, ढुलाई करने लायक उपग्रह टर्मिनल और आकाश हथियार प्रणाली को भी दर्शाया गया। इसका एक और आकषर्ण धनुष तोप प्रणाली रहा । मध्यम क्षमता के रडार अरूध्रा का भी प्रदर्शन किया गया। इसके बाद आए भारतीय सेना की टुकड़ियों की एवं अर्धसैनिक बलों के माचि’ग दस्ते के एक लय में चल रहे कदमताल देख सभी मंत्रमुग्ध हुए। इनमें गोरखा राइफल्स, गढ़वाल राइफल्स, सिख लाईट रेजीमेंट आदि प्रमुख थे।

लड़ाई के मोर्चे पर महिलाओं की भूमिका पर चल रही बहस के बीच गणतंत्र दिवस परेड में महिला शक्ति की मजबूत मौजूदगी दिखी। सेना की तीनों टुकड़ियों और नेशनल कैटेड कोर (एनसीसी) के महिला दस्तों ने परेड में ओजपूर्ण सलामी देते हुए कंधे से से कंधा मिलाकर चलने की क्षमता का प्रदर्शन किया। सीमा सुरक्षा बल, रेलवे सुरक्षा बल, दिल्ली पुलिस केंद्रीय औद्योगिक पुलिस बल व स्कूली छात्रों के माचि’ग दस्ते ने शौर्यपूर्ण धुनों से तमाम राजपथ को गुंजायमान कर दिया। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके जैसलमेर में स्थित गंगा रिसाला के नाम से पहचाना जाने वाला बीएसएफ का उंट दस्ता राजसी शान के साथ राजपथ से गुजरा। यह दस्ता बीकानेर रॉयल फोर्स की विरासत को संजोए हुए है।

वीरता पुरस्कार से नवाजे गए बहादुर बच्चों का कारवां राजपथ से गुजरा तो गर्व एवं तालियों की गड़ग राहट के साथ राजपथ के दोनों ओर से लोगों ने बच्चों को हाथ हिलाकर शाबासी दी। इसके बाद पेश हुई देश की समृद्धि व संस्कृति की झ्लक दिखाती झांकियां। गणतंत्र दिवस परेड में मेकैनाइज्ड इन्फैन्ट्री रेजीमेंट, बिहार रेजीमेंट, गोरखा ट्रेनिंग सेंटर, गोरखा राइफल्स और पंजाब रेजीमेंटल सेंटर, सिख रेजीमेंटल सेंटर, मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप, इन्फैन्ट्री, बटालियन (क्षेत्रीय सेना) सिख लाइट इन्फैन्ट्री का संयुक्त बैंड ने सधे कदमों के साथ प्रस्तुति दी ।

परेड में नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और नौसेना की भी एक झांकी भी दिखी । वायु सेना के मार्चिंग टुकड़ी के बाद वायु सेना की भी एक झांकी पेश की गई जिसमें भारतीय वायु सेना के सैन्य कौशल को प्रदर्शित किया गया। राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के अलावा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य और विभिन्न दलों के नेता उपस्थित रहे ।

ओड़िशा, अरूणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, गुजरात, लक्षद्वीप, कर्नाटक, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर, असम समेत विभिन्न राज्य एवं विभागों ने अपनी-अपनी झांकियों के माध्यम से अपनी परंपरा और संस्कृति की झलक पेश की ।

वित्त मंत्रालय के तहत केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क बोर्ड विभाग के साथ कौशल विकास मंत्रालय की भी झांकी गणतंत्र दिवस परेड में देखने को मिली जिसका जोर वस्तु एवं उत्पाद शुल्क (जीएसटी) रहा। परेड में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के माचि’ग दस्ते ने हिस्सा लिया जिसमें 148 जोशीले जवानों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के दस्ते ने भी परेड की शान बढ़ाई । राजपथ पर परेड में बिरला बालिका विद्यालय की छात्राओं के मार्चिंग दस्ते ने हिस्सा लिया जिसमें 52 छात्राएं शामिल हैं। परेड में सेना की विभिन्न बटालियनों के चुने हुए जवानों के सामूहिक पाइप और ड्रम बैंड दस्ते ने हिस्सा लिया।

देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करती झांकियों में ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत दोल यात्रा और अरूणाचल प्रदेश की झांकी में प्रदेश के याक नृत्य का प्रदर्शन किया गया । महाराष्ट्र की झांकी इस साल महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को समर्पित रही। मणिपुर की झांकी में लाई हराउवा उत्सव को पेश किया गया जबकि गुजरात की झांकी कच्छ की लोक संस्कृति को समर्पित रही ।

लक्षद्वीप की झांकी पर्यटन और दिल्ली की झांकी शिक्षा को समर्पित रही। कर्नाटक की झांकी परंपरागत कला को समर्पित रही । हिमाचल प्रदेश की झांकी में कसीदाकारी, चम्बा शहर को प्रदर्शित किया जबकि हरियाणा की झांकी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को समर्पित रही। पश्चिम बंगाल की झांकी शरद उत्सव को समर्पित रही जबकि पंजाब की झांकी में जागो आइया नृत्य का चित्रण किया गया। गोवा की झांकी में वहां की संगीत विरासत को दर्शाया गया तो तमिलनाडु की झांकी में वहां के पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया गया । त्रिपुरा की झांकी में होजगिरी नृत्य तो जम्मू कश्मीर की झांकी में शीतकालीन खेलों का प्रदर्शन किया गया । असम की झांकी में प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर को पेश किय गया।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय ने अपनी झांकी में खादी उत्पादों का प्रदर्शन किया । आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय की झांकी में प्रधानमंत्री आवास योजना को दर्शाया गया। वैज्ञानिक एवं औद्योगिकी अनुसंधान परिषद की झांकी में वैश्विक स्थिति को तथा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की झांकी में वातावरण में स्वच्छता का संदेश दिया गया । कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की झांकी में स्किल इंडिया को पेश किया गया। इसके बाद स्कूली बच्चों ने शानदार सांस्कृति कार्यक्रम पेश किये।

परेड के दौरान हल्की बूंदाबादी ने जहां मौसम को खुशनुमा बना दिया तो वहीं माहौल में थोड़ी ठंड में भी इजाफा हुआ। हर बार की तरह इस बार भी मोटरसाइकलों पर कौशल और जाबांजी दिखाने वाले डेयरडेविल स्टंट को लोगों ने खूब सराहा। राष्ट्रगान के साथ परेड का समापन हुआ। समापन पर राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों वाले गुब्बारों ने पूरे आसमान को ढक लिया।



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