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शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

स्वच्छ ऊर्जा के लिए निवेश

मराकेश में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की धूम सिर्फ औद्योगिकृत देशों तक सीमित नहीं रह गई है, क्योंकि विकसित दुनिया के मुकाबले इस तरह की प्रौद्योगिकियों में भारत ने ज्यादा निवेश किया है।

भारत के लिए स्वच्छ ऊर्जा के लिए पर्यावरणोन्मुखी प्रौद्योगिकियों को अपनाना अपरिहार्य भी है। क्योंकि भारत में अस्थमा के जो करीब दो करोड़ मामले सामने आए हैं वे सभी कोयला संबंधित वायु प्रदूषण से जुड़े हैं। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में भारत 20वें नंबर पर है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्रों में कितना प्रयास कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इस प्रकार की प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर दिया है। केरी ने कहा कि आज दुनिया के हर देश के लिए नवीकरणीय ऊर्जा एक अहम जरूरत बन गई है। दरअसल भारत के साथ चीन और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने नवीकरणीय प्रौद्योगिकियों में पिछले साल विकसित देशों से कहीं ज्यादा निवेश किया है। उन्होंने कहा कि अकेले चीन ने 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। उम्मीद है कि दुनिया में अब तक का ज्ञात स्वच्छ उर्जा का बाजार खरबों डॉलर का बनेगा। इस मौके पर केरी उन देशों को चेताने से भी बाज नहीं आए, जो स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने की आस में अभी हाशिए पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया बहुत ही तीव्र गति से बदल रही है। केरी ने पर्यावरण बदलाव के दुष्प्रभाव के बारे में बताते हुए कहा कि वैश्विक तापमान में इजाफे के प्रभाव अब विश्व भर में महसूस किया जा रहा है। समुद्री जल स्तर में इजाफा होने के कारण अस्वाभाविक रूप से तूफान आ रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं की वजह से लाखों लोग विस्थापित होने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में चाहे विकसीत हों या विकासशील देश, अगर सभी ने एक साथ पर्यावरण को बचाने का प्रयास नहीं किया तो प्राकृतिक आपदाएं दुनिया के किसी भी हिस्से में दस्तक देकर हम सभी को प्रभावित करेगी।


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