sulabh swatchh bharat

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

सुलभ’ का काम यानी साक्षात गांधी दर्शन

अमेरिका से आए शिक्षाविदें का मानना है कि सुलभ प्रणेता डॉ. पाठक के काम के जरिए सिर्फ गांधी को ही नहीं, बल्कि शांति की पूरी अवधारणा को आसानी से समझा जा सकता है

महात्मा गांधी से जुड़े भाव स्थलों का दौरा कर रहे अमेरिका के आठ शिक्षाविदों ने सुलभ परिसर का दौरा कर अभिभूत होते हुए कहा कि सुलभ स्वच्छता आंदोलन के संस्थापक डॉ.पाठक के काम के जरिए न सिर्फ महात्मा गांधी, बल्कि शांति की पूरी अवधारणा को समझा जा सकता है। अमेरिका के कार्डिनलस्ट्रिक यूनिवर्सिटी से जुड़े ये शिक्षाविद् सर्वेंट लीडरशिप प्रोग्राम के तहत सुलभ ग्राम पहुंचे तो वहां डॉ. विन्देश्वर पाठक द्वारा किए गए कार्यों को देखकर चकित रह गए। उन्होंने कहा इन कार्यक्रमों को देख कर समझ में आता है कि नेता जब सेवक के भूमिका निभाता है तो समाज में बदलाव होना निश्चित है।

सुलभ ग्राम में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए सुलभ संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने गांधी जी के कार्यांे और सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि सर्वेंट लीडरशिप कार्यक्रम गांधी जी के सिद्धांतों को समझने में न सिर्फ मददगार होगा, बल्कि उनकी सोच को उनके द्वारा बताए गए कार्यों में लागू करने में भी सहायक होगा। डॉ. पाठक ने कहा कि सरकार को भी सर्वेंट लीडरशिप यानी 'नेतृत्व भी सेवक’ के सिद्धांत के मुताबिक काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांधी का सिद्धांत भी यही है। गांधी जी का खान-पान, कपड़े पहने का तरीका और जीवन शैली सब आम लोगों की तरह इसी वजह से थी। डॉ. पाठक ने कहा कि उन्होंने भी खुद गांधी जी के ही सिद्धांतों पर चलते हुए उन्हीं की तरह काम किया और अहिंसा के जरिए सामाजिक बदलाव लाने की कोशिश की है। टोंक, राजस्थान से आई उन महिलाओं से भी अतिथियों ने मुलाकात की जो कभी अपने सिर पर मैला ढ़ोती थीं। अब सुलभ की वजह से इनका जीवन काफी बदल गया है। डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा, 'एक समय था जब इन महिलाओं को अछूत समझा जाता था। इन्हें घर में आने तक नहीं दिया जाता था। इनका काम सिर्फ और सिर्फ गंदगी साफ करना था। आज ये महिलाएं मुक्त कंठ से मंत्रोच्चार करती हैं। इनकी जिंदगी पहले से काफी बदल गई है। अब इनके बच्चे भी स्कूल जाते हैं और एक बेहतर जीवन की उम्मीद इन्हें दिख रही है। यह बापू का सपना था जिसे मैंने साकार करने की कोशिश की है।’ इन महिलाओं से बातचीत करना अतिथियों के लिए एक नया अनुभव था। मिस. मार्था ड्रेक शिफ्लर ने कहा इन महिलाओं की बदलती सामाजिक और आर्थिक स्थिति के लिए मैं डॉ. विन्देश्वर पाठक को बधाई देती हूं। उनके इस मिशन की वजह से ही इन महिलाओं का जीवन आज बदल पाया है। ये अपने आप में समाज सुधार का एक बहुत बड़ा काम है। भारत के प्रधानमंत्री के नरेंद्र मोदी भी स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय के इस्तेमाल, खुले में शौच न करने और शौचालय निर्माण को लेकर काफी गंभीर हैं। प्रधानमंत्री की इस सोच को देखकर डेव जैशमैन ने कहा कि हर किसी को रहने के लिए साफ और स्वच्छ वातावरण मिले यह एक मानवता का काम है। इससे राजनीति का कोई संबंध नहीं। पीएम मोदी काम बहुत ही सराहनीय है।

सुलभ की सोच और डॉ. विन्देश्वर पाठक के त्याग और समर्पण को देख सारे अतिथि काफी प्रभावित हुए। मार्क लीविस जेस्नर ने कहा, 'डॉ. विन्देश्वर पाठक ही सही मायने में गांधी और सेंट फ्रॉन्सिस के सच्चे सपूत हैं। हम तो इन दोनों की बातों को सिर्फ पसंद करते हैं, पढ़ाते हैं और इस पर वाद-विवाद करते हैं, लेकिन डॉ. पाठक ने इन सिद्धांतों को अपने जीवन में ढालकर साकार कर दिखाया है। धरातल पर इन विचारों को उतारना किसी जंग से कम नहीं।’ सुलभ की सोच को देखकर सभी आश्चर्यचकित थे कि आखिर एक व्यक्ति ने इतना कुछ कैसे सोचा और फिर कैसे इसे प्रभावी ढ़ंग हकीकत में बदला। इस काम को करने के लिए एक टीम तैयार करना भी कठीन टास्क है, लेकिन जिस लयबद्ध तरीके से सुलभ की टीम काम करती है, उसे देखकर सभी काफी प्रभावित थे।  सुलभ द्वारा आयोजित सम्मेलन में अमेरिका के कार्डिनल स्ट्रीच यूनिवर्सिटी से इरिक जॉन डीम्मिट, मिस. मार्था ड्रेक शिफ्लर, माईकल ड्रेक शिफ्लर, नैन्सी माइकल स्टैंडफोर्ड ब्लेयर, मार्क लीविस जेस्नर, मोनिका क्लिंग, डेव जैशमैन और चार्ली मोर कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

इनके अलावा सुलभ इंटरनेशनल के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक, सेवा ग्राम आश्रम के सचिव और संयोजक जीवीवीएसडीएस प्रसाद, गांधीवाद के विशेषज्ञ अनिल दत्त, चंडीगढ़ से प्रोफेसर

एम. एल शर्मा, गायत्री विद्या परिषद्,

विशाखापत्तनम् से पीवी शर्मा और सुलभ इंटनेशनल से एस.पी. सिंह, आर.सी. झा, बी.बी. सहाय, अरुण पाठक, एसपीएन सिंहा और पंकज जैन आदि मौजूद थे।



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो