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गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

विजय चड्ढ़ा, सीईओ, भारती फाउंडेशन

लुधियाना में स्वच्छता अभियान में एक अलग मानक स्थापित करने वाले भारती फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय चड्डा ने खास बातचीत में शौचालय निर्माण की प्रक्रिया, उसकी तकनीक और सामाजिक जागरूकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। अशोक कुमार ज्योति ने उनसे विस्तार से बातें कीं, प्रस्तुत है उसी बातचीत के महत्त्वपूर्ण अंश-

आपके मन में कैसे यह विचार आया कि लुधियाना जिले के प्रत्येक गांव के हर घर में शौचालय हो? कैसे आपने 'सत्य भारती अभियान’ की शुरुआत की?

भारत के माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान के प्रति निष्ठा और जवाबदेही के रूप में 'सत्य भारती अभियान’ की शुरुआत हुई। इस अभियान का मूल उद्देश्य लुधियाना के गांवों में स्वच्छता की सुविधाओं में सुधार लाना है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लुधियाना जिले में शौचालय की उपलब्धता के मामले में शहर और गांव के बीच 13 प्रतिशत का फासला है। ग्रामीण घरों में स्वच्छता की सुविधाओं की कमी न सिर्फ महिलाओं के लिए आक्रोश का एक बड़ा कारण है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन की स्वच्छता से जुड़ी एक बड़ी व्यापक समस्या की जड़ भी है।

राष्ट्र के समग्र विकास में स्वच्छता वाकई आधार-स्तंभ का कार्य करती है?

स्वच्छता की खराब स्थिति व्यक्तियों तथा समुदायों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। भारत-जैसा एक देश अस्वच्छता के गंभीर परिणाम भुगतता है। खुले में शौच के घातक परिणाम निकलते हैं, शिशुओं की मौत होती है, जीवित रह गए बच्चों का शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास अवरुद्ध होता है और देश की कार्यशक्ति की मानव-संसाधन पूंजी घटती है। अस्वच्छता ऐसे अनेक नकारात्मक आयामों को अपने में समेटे रहती है। यह खतरनाक जीवाणुओं से वातावरण को दूषित करती है और धनी और गरीब पर इसका समान असर पड़ता है। पूरी दुनिया में अब भी 2.5 अरब लोग शौचालय-जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। डायरिया-जैसे रोग से सालाना लगभग 15 लाख बच्चे मरते हैं, अर्थात् लगभग साढ़े चार हजार हर रोज। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हर दस में सात व्यक्ति समुचित स्वच्छता-सुविधा के बगैर जीते हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट 'भारत में अपर्याप्त स्वच्छता के आर्थिक प्रभाव’ के आकलन के मुताबिक अपर्याप्त स्वच्छता की वजह से वर्ष 2006 में जो आर्थिक क्षति हुई, वह भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 6.4 प्रतिशत था।

आपने पंजाब के लुधियाना को ही क्यों चुना?

इसकी दो वजह रही है। पहली तो यह कि हमारे प्रोमोटर की जड़ें लुधियाना में हैं और वे चाहते थे कि जन्मस्थान के लोगों के लिए कुछ करें। दूसरी वजह यह कि हम वर्ष 2006 से ही लुधियाना जिले में बड़ी संख्या में स्कूल संचालित कर रहे हैं और हमने पिछले वर्षों में इस क्षेत्र की एक अच्छी समझ विकसित की है और हमारा समुदाय के साथ अच्छा जुड़ाव रहा है। हमने सोचा कि स्वच्छता के इतने बड़े कार्यक्रम की सफलता के लिए हमारा अनुभव काम आ सकता है।

आपने कैसे सुलभ इंटरनेशनल का चयन किया?

सुलभ स्वच्छता के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और हमने उसके अनुभव एवं दक्षता को देखते हुए उन्हें यह कार्यभार सौंपा।

आपकी दृष्टि में ग्रामीण घरों में शौचालय नहीं होने के क्या कारण हैं?

लुधियाना का ही उदाहरण लें, यहां ग्रामीण घरों में शौचालय नहीं होने के अनेक कारण हैं। गरीबी, शौचालय के लिए जगह की कमी, खुले में शौच के लिए उपलब्ध पर्याप्त जमीन और आदतें। इसके अलावा घर के भीतर शौचालय न बनाए जाने की सदियों से चली आ रही गलत सोच।

ग्रामीण इलाकों में आपके कई स्कूल चल रहे हैं, उसे साफ कैसे रखते हैं?

हम पूरे देश में 254 से अधिक स्कूल चला रहे हैं, जहां लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। स्कूल-परिसरों में स्वच्छता की गारंटी हमारी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। हमने स्कूल में स्वच्छता के लिए प्रक्रियागत मानदंड निर्धारित कर रखे हैं और इसके तहत 'सफाई एजेंट’ हर दिन स्कूल के शौचालयों की सफाई करते हैं। हर स्कूल में एक स्टाफ इस कार्य के लिए जिम्मेदार होता है। हमारे उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में, जहां काफी संख्या में विद्यार्थी हैं, वहां हम 'स्टूडेंट काउंसिल’ को स्वच्छता की गारंटी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन करने के लिए कहते हैं।

भारती फाउंडेशन को सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने 25 लाख रुपए के 'सुलभ-स्वच्छता-सम्मान’ से सम्मानित किया है। इसे आप कैसे लेते हैं?

मैं अभिभूत हूं। हमें अपनी टीम के सदस्यों पर गर्व है, जिन्होंने यह सब संभव कर दिखाया है।

 

हाईलाइट

छात्रों के हित में स्वास्थ्य और स्वच्छता पहले से ही हमारे स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जा चुके हैं

सत्य भारती अभियान के कारण ही लोगों के चेहरों पर मुस्कान आ पाई है

 

संपादकीय

“भगवान की भक्ति के बाद स्वच्छता ही सबसे बड़ी भक्ति है। अशुद्ध मन और अस्वच्छ शरीर से भगवान का आशीर्वाद हम लोग कतई प्राप्त नहीं कर सकते। एक अस्वच्छ शहर में कोई भी स्वच्छ नहीं रह सकता है”

-महात्मा गांधी, यंग इंडिया, 19-11-25



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