sulabh swatchh bharat

मंगलवार, 22 जनवरी 2019

झांकी हिंदुस्तान की

गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाले परेड में देश की ताकत, विकास, और लोकजीवन की झांकियां नहीं होती, बल्कि इसमें देश का पूरा जीवन समाहित होता है, जिसमें धड़कते भारत का अक्स देखा जा सकता है

गणतंत्र दिवस हम भारतीयों की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण दिन है। 26 जनवरी 1950 की भारत का संविधान लागू हुआ था और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 को हटा दिया गया था। इसी दिन भारत को गणतंत्र राष्ट्र होने का गौरव प्राप्त हुआ था। 

भारत के स्वायत्त होने के अवसर पर यह दिन हर वर्ष राजपथ पर बड़ी भव्यता से मनाया जाता है। महामहिम झंडारोहण करते हैं और सेना के जवानों को उनकी वीरता के लिए अशोक चक्र, कीर्ति चक्र, परमवीर चक्र और शौर्य चक्रसे सम्मानित करते हैं। बच्चों को भी इस अवसर पर उनकी बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार से नवाजा जाता है। राजपथ पर देश की ताकत, विकास, संस्कृति, परंपरा, लोक-कला और जीवन के बहुत सारे रंग घुल जाते हैं।

गणतंत्र दिवस की परेड में विभिन्न झांकियों का इंतजार सभी को होता है। भारत की रचनात्मकता की गवाह बनती हैं ये सुंदर झाकियां। गणतंत्र दिवस, जो कि 1950 में भारत का संविधान लागू करने की खुशी में हर वर्ष मनाया जाता है, इन सुंदर झांकियों के बिना अधूरा है। इन झांकियों की सजावट थीम-बेस्ड होती है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक चयन समिति हर वर्ष इन झांकियों का चुनाव करती है। इस वर्ष कुल 23 झांकियों का चयन हुआ है, जिनमें से 17 राज्यों की और 6 अलग-अलग मंत्रालयों की है। हर वर्ष इन सबसे सुंदर और अनूठी दिखने वाली झांकियों से प्रथम तीन को पुरस्कृत भी किया जाता है।

2017 के गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष दिल्ली की झांकी को पूरे तीन वर्ष के अंतराल के बाद शामिल किया गया है। इस झांकी की थीम शिक्षा एवं विद्यालय पर आधारित है। इसमें सरकार द्वारा किए गए प्रमुख प्रयास जैसे मॉडल स्कूल परियोजना, कौशल विकास केंद्र, पैरेंट-टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम, और खास तौर पर सरकारी स्कूलों में पेरेंट्स- टीचर मीटिंग की शुरुआत जैसे प्रयास प्रदर्शित किए जाएंगे।

हालांकि इस वर्ष बिहार और तेलंगाना राज्य की झांकी राजपथ पर नहीं दिखेगी। दोनों ही राज्य चयन समिति को कुछ खास प्रभावित नहीं कर सके। बिहार की झांकी प्राचीन शिक्षा संस्थान विक्रमशिला पर आधारित थी, जबकि तेलंगाना की झांकी बठुखाम्मा पर्व पर आधारित थी। डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक तेलंगाना की झांकी ने चयन प्रक्रिया के छह चरण पार कर लिए थे, पर अंतिम चरण में आकर वह इस प्रतियोगिता से बाहर हो गई।

2016 में राजपथ पर 17 राज्यों की और 6 मंत्रालयों की झांकियां प्रदर्शित की गई थीं। पश्चिम बंगाल की झांकी, जो कि 'बौल’ लोक गीत पर आधारित थी, उसने इस प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि त्रिपुरा की झांकी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया यह शिव के तीर्थ स्थल पर पाई जाने वाली उनाकोटी प्रतिमाओं पर आधारित थी। तीसरा स्थान प्राप्त किया असम की झांकी ने, जिसमें 'रंगोली’ और 'बिहू’ उत्सव को दर्शाया गया था। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की झांकी को खास पुरस्कार से नवाजा गया, यह डिजिटल इंडिया थीम पर आधारित थी।

2016 में प्रदर्शित होने वाली झाकियों में खास थी, बाबा साहब आंबेडकर की प्रतिमा वाली झांकी जो उनकी 125वीं जयंती पर उन्हें समर्पित की गयी थी। महात्मा गांधी के चंपारण आंदोलन बिहार की झांकी कि खासियत रही। 'स्वच्छ भारत’ और 'डिजिटल इंडिया’ की झांकियां भी इस समारोह में शामिल की गई थीं। राजस्थान की झांकी हवा महल ने सबका दिल जीत लिया। वहीं अन्य झांकियां गोवा, सिक्किम और जम्मू कश्मीर के 'जागोर लोक नृत्य’, 'सगा दावा’ और 'मेरा गांव मेरा जहान’ जैसी थीम पर आधारित थीं। चंडीगढ़ कि झांकी में वहां के आलीशान वास्तु की छाप थी।

1950 से 1954 तक गणतंत्र दिवस मानाने का कोई स्थान तय नहीं था। गणतंत्र दिवस परेड को पहली बार 1955 में प्रदर्शित किया गया। और तब से आज तक इसने हमेशा राजपथ की शोभा बढ़ाई है। झांकियों कि प्रतियोगिता में 1980 से लेकर अब तक सबसे अधिक 6 बार पहला स्थान प्राप्त करने वाला राज्य महाराष्ट्र है और उसके बाद गोवा, जो 5 बार प्रथम स्थान पर रह चुका है। केरला ने भी कई बार पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि अधिकतर परेड में जम्मू-कश्मीर और नगालैंड कि झांकियां बेहद खूबसूरत  लगती हैं। भारत सरकार के मंत्रालय भी इस मामले में राज्यों से कम नहीं हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 2012 में पहला और 2008 में दूसरा स्थान जीता। रेल मंत्रालय तथा संस्कृति मंत्रालय 2001 और 2010 में दूसरे पायदान पर रहीं। हर वर्ष कि तरह इस वर्ष भी राजपथ खूबसूरत झांकियों के मनमोहक रंगों से सराबोर होगा और आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। 



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो