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शुक्रवार, 22 जून 2018

जय पांडा - काम नहीं, वेतन नहीं

बीजू जनता दल (बीजेडी) के लोकसभा सांसद जय पांडा इस समय सुर्खियों में हैं। बतौर सांसद उन्होंने मिलने वाली सैलरी का वह हिस्सा वापस करने का फैसला किया है जितने दिनों तक लोकसभा में कोई कामकाज नहीं हुआ।

उन्होंने यह फैसला संसद के शीतकालीन सत्र में कामकाज न होने के कारण किया है। पांडा ने बताया कि वो पिछले चार-पांच सालों से जितने दिन लोकसभा में कामकाज नहीं होता, सैलरी का उतना हिस्सा वापस लौटा देते हैं।  

जय पांडा, केंद्रपाड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। पांडा पिछले 16 सालों से संसद सदस्य हैं। 2000 से 2009 तक वे राज्यसभा के सांसद रहे और फिर उसके बाद 2009 और 2016 में लोकसभा चुनाव जीतकर लोकसभा के सदस्य बने। पांडा ने कहा कि उन्होंने पिछले 16 सालों में कभी भी संसद की कार्यवाही में गतिरोध उत्पन्न नहीं किया।

गौरतलब कि संसद की एक मिनट की कार्यवाही पर दो लाख 50 हजार, एक घंटे पर 1 करोड़ 50 लाख और एक दिन पर 9 करोड़ रुपए का खर्च आता है। जय पांडा

ने कहा, 'संसद न चलने से जो समय का नुकसान हुआ, उसे ध्यान में रखकर मैं हमेशा की तरह अपना वेतन वापस लौटाने की पेशकश करता हूं।    जय पांडा अपनी तकरीबन 85 फीसदी सैलरी और भत्ते वापस करेंगे। उनका यह कदम बेहद सराहनीय ही नहीं अनुकरणीय भी हैं।



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