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सोमवार, 18 जून 2018

अपना समाज, अपना कानून

सिक्कम के सुदूरवर्ती इलाके में जोम्सा की सरकार चलती है। कानून बनाने से लेकर अपराधियों को सजा देने का अधिकार उसी के पास सुरक्षित है

अपने दफ्तर में बैठे सिक्किम के नए पुलिस महानिदेशक ने अपने एक अधीनस्थ से पहली बार 'जोम्सा’ शब्द सुना। सहज और व्यावहारिक रूप से अपराध रहित माने जाने वाले इस सूबे में काफी समय पहले एक बिहारी स्क्रैप व्यापारी की हत्या हुई थी। इस हत्या के बारे में तब पुलिस महानिदेशक को बताया गया था कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है। इस तरह इस घटना को लेकर कोई भी पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई। जब नए डीजीपी ने इसकी वजह तफ्सील से जाननी चाही तो उन्हें बताया गया, ऐसा जोम्सा की वजह से हुआ। उसने सारा मामला अपनी तरफ से सेट कर दिया। यह इस्लामपुरी वालों की गलती थी कि उसने कुछ सुंदर लड़कियों को लाचुंग में छेड़ा, जहां जोम्सा की बैठक हुई थी। हत्यारे पर जुर्माना लगाया गया, क्योंकि ऐसा माना गया कि बौद्ध ऐसा नहीं कर सकते। सजा के तौर पर उसे स्थानीय बौद्ध मठ में तपस्या करने को कहा गया। इस तरह यह पूरा मामला निपटा दिया गया। जाहिर है कि इसके बाद पुलिस कुछ नहीं कर सकती।

गौरतलब है कि सिक्किम में नामगल्य राजवंश के चोग्याल राजाओं के समय से सामंतीवादी शासन का एक लंबा दौर रहा है। दरअसल 'चोग्यालग’ शब्द का मतलब ही है 'धर्म राज’ यानी जो लिखा या बोल दिया गया उसी के मुताबिक राज चलेगा। जहां तक रही बात 'जोम्सा’ शब्द की तो इसका अर्थ है -'एक जगह पर बैठक’। यह उत्तरी सिक्किम के लेचेन और लाचुंग गांवों में परंपरागत प्रशासनिक संस्था है। इन गांवों के लिए यह स्वशासन इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि राज्य की राजधानी में बैठकर इस सुदूरवर्ती इलाके में कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालना मुश्किल तो है ही व्यावहारिक भी नहीं है।  

तिब्बत और उत्तरी सिक्किम

उत्तरी सिक्किम के लोग तिब्बतियों से काफी जुड़े हैं, इसीलिए उनके अंदर कभी-कभी तिब्बतियों की तरह स्वतंत्रता की भावना भी जगती है, जिसे संभालना खासा मुश्किल होता है। जोम्सा अपने अधिकार क्षेत्र में शासन की एक तरह से सर्वोच्च इकाई है। यह समय-समय पर अपनी बैठकें करती है और सार्वजनिक कल्याण के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों को प्रस्तावित करती है। एसएसबी के साथ बातचीत में अनिल लेचेन्पा ने बताया, 'इस तरह से होने वाली सामान्य किस्म की बैठकों के दिन पहले से तय होते हैं। सुबह से ठीक पहले स्थानीय बौद्ध मठ में नगाड़े बजने लगते हैं, ताकि लोगों को पता चल सके कि बैठक जल्द ही शुरू होने वाली है और वे सामुदायिक भवन में इक_ा हो जाएं।’  दरअसल, जोम्सा एक जन परिषद की तरह है, जिसमें लोगों को एक तय समय के निर्वाचित या मनोनीत किया जाता है।

पर्यटकों पर पाबंदी

एक बड़े टूर आपरेटर पेल्जर लाचुंगपा ने बताया, 'सिक्किम के अलग राज्य के रूप में 1975 में अस्तित्व में आने के बाद से कोई चोग्याल नहीं रहा पर जोम्सा को अब भी अधिकार है कि वह लोगों पर कर लगा सके। 2003 के करीब जोम्सा की तरफ से कहा गया कि दूसरे जिलों से यहां पर्यटकों को टैक्सी से लाने पर पर मनाही रहेगी, क्योंकि उत्तरी सिक्किम के नौजवान बेरोजगार हो रहे हैं। काफी आरजू-मिन्नत के बाद हमें नकदी तौर पर भारी कर चुकाने के अलावा घी, चावल और किरासन तेल बौद्ध मठों के लिए देने पड़े, तब जाकर हमें दोबारा इस इलाके में आने की इजाजत मिली।’    

जोम्सा का होगा विस्तार

जोम्सा के साथ एक विशिष्ट बात यह है कि मौके के और अनुकूलता के हिसाब से यह आमतौर पर उदारवादी फैसले लेती है। साथ ही यहां विवादों को खासे लोकतांत्रिक तरीके से निपटाया जाता है। यही नहीं, यह तकरीबन ऐसे तमाम काम करती है जो देश के दूसरे हिस्सों में पंचायत करते हैं। पंचायतों के मुकाबले जोम्सा की एक खासयित यह भी है कि इसके पास न्यायिक अधिकार भी हैं और यह बकायदा अपने अधिकार क्षेत्र से जुड़े गांवों के मामलों की अपने तरीके से सुनवाई करती है। गौरतलब है कि जोम्सा के कामकाज को बेहतर करने के लिए अब इसमें ज्यादा सामुदायिक सदस्यों को जोडऩे की बात हो रही है। इससे जोम्सा के काम करने का अपना ढांचा ज्यादा  व्यापक और सुदृढ़ होगा।

अभी कुछ ही दिनों में यहां नए चुनाव की तैयारी हो रही है। कोशिश है कि न्याय और प्रशासन के इस पारंपरिक ढांचे को न सिर्फ और सुदृढ़ किया जाए, बल्कि इसे और ज्यादा अधिकार संपन्न भी बनाया जाए। लाचेन में जो आम ग्राम परिषद है, उसमें महिलाओं को शामिल होने का अधिकार नहीं दिया गया है। हां, यह जरूर है कि अगर किसी का पति मर गया है तो वह उसकी जगह उसकी पत्नी को परिषद की सदस्यता तब तक के लिए मिल जाएगी, जब तक के लिए उसका पति निर्वाचित या मनोनित हुआ था। यह भी कि अगर उसे कोई बच्चा नहीं तो वह कोई बच्चा गोद ले सकती है। 

लाचुंगपा के मुताबिक, 'यह एक मजबूत संस्था है। यह न सिर्फ गति के साथ काम करती है बल्कि कानून और व्यवस्था की स्थिति संभालने में बड़ी भूमिका निभाती है। इस काम का महत्व इस लिहाज से ज्यादा है कि पुलिस के लिए इस सुदूरवर्ती इलाके में दूर बैठकर यह सब संभाल पाना आसान नहीं है। बड़ी बात यह है कि यह पूरी नियामकीय व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार-मुक्त है और पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।’

 



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