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शनिवार, 22 सितंबर 2018

साइकिल पर शान से

कोपेनहेगेन साईकिल की सवारी के लिए दुनिया भर में मशहूर है और यह दुनिया की बेस्ट बाइक सिटी के नाम से जाना जाता है

 

डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन ने पिछले दिनों नया वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया है। यहां की सड़कों पर कारों से ज्यादा संख्या साइकिल की है। पिछले साल 35,080 अधिक साइकिलें सड़कों पर बढ़ गई और इनकी कुल संख्या 265,700 हो गई, जबकि सड़कों पर दौडऩे वाली कारों की संख्या 252,600 है। कोपेनहेगेन शहर को पिछले साल 'बेस्ट सिटी फॉर साइकिलिस्ट’ और 'वल्र्ड्स मोस्ट इन्हैबिटबल सिटी’ का खिताब मिला है।  

सन 1970 में वहां पर 351,133 कारें थीं और 100,071 साइकिल। तब से कोपेनहेगेन नगर पालिका ने बहुत से सिटी सेंटरों पर यातायात की गिनती की। 2009 में साइकिल सवारों के लिए मुफ्त हवाई पंप और अन्य सुविधाओं से लैस शहर में पहला इलेक्ट्रिक साइकिल काउंटर खुला। बाइक लेन से कुछ ही दूरी पर एक एक सेंसर लाइन थी जो साईकिल चालक को इस काउंटर पर पंजीकृत करती थी। इस सेंटर पर सिम कार्ड भी थे जो साइकिल सवारों की सारी जानकारी ऑटोमेटिकली 'कोपेनहेगेन’ सेंटर फॉर ट्रैफिक तक पहुंचा देते थे। यह सब कार से ज्यादा साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।

शहर की मेहनत रंग लाने लगी। पिछले 20 वर्षों में साइकिलों की संख्या बढ़ कर 68 प्रतिशत हो गई। पूर्व तकनीकी एवं पर्यावरण मेयर (2006-2009) क्लाउस बोल्दम जो की अब डेनिश साइकिल फेडरेशन के मुख्य अधिकारी हैं, इसके लिए राजनैतिक इच्छा और मजबूत नेतृत्व को इस बदलाव की वजह मानते हैं। उनका कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह रिट बिअरिगार्ड (पूर्व मेयर) का मजबूत नेतृत्व था जो कि खुद एक समर्पित साइकिल चालक थे और साइकिल के लिए अद्भुत प्रेम रखते थे। अब साइकिल रोज़मर्रा के इस्तेमाल से बढ़कर इस शहर की पहचान बन गई है।

शहरीकरण और विकास में स्थिरता के नए पैमानों ने यातायात के परंपरागत तौर तरीकों के मायने ही बदल दिए और यह शहर अब साइकिल चालकों के लिए स्वर्ग बन गया है। इस शहर में 390 किलोमीटर की बाइक लेन है जो सिर्फ साइकिल चालकों के लिए है।

2005 से अब तक साइकिलिंग के लिए बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर पर डेनमार्क सरकार लगभग 115 मिलियन यूरो खर्च कर चुकी है। साइकिल चालकों और पैदल चलने वालों को समर्पित दर्जनों ब्रिज बनाये जा चुके हैं। उदाहरण के तौर पर साइकिल स्लैंगन (साइकिल स्नेक) या फिर हाल ही में बना किसिंग ब्रिज। तकनीकी और पर्यावरण मामलों के वर्तमान महापौर मोर्टेन काबेल, का कहना है कि उनके लिए 'हरी परिवहन प्रणाली’ सबसे महत्वपूर्ण है। वे चाहते है की 50 प्रतिशत आवाजाही साइकिल से होनी चाहिए। अगले दशक तक वे सिटी हॉल और कोंग्स निटो एरिया को कार फ्री जोन बनाना चाहते हैं। उनका यह सपना जल्द ही हकीकत बन सकता है क्योंकि वर्तमान समय में यह संख्या 41 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है ।

काबेल का अगला कदम होगा लोगों को कारों का अच्छा विकल्प मुहैया करना। उनका कहना है कि इस समस्या से निबटने के लिए हम कारों को सड़क से एकदम से नहीं हटा सकते। यही कारण है कि हम मेट्रो, ट्रेनों और बाइक के बुनियादी ढांचे में निवेश का विस्तार कर रहे है। वे आगे कहते हैं कि लोगों को विकल्प दे दो और फिर धीरे धीरे कारों को सड़कों से कम कर दो और वह जगह बाइक को दे। साइकिल कारों के मुकाबले सस्ती भी हैं। पिछले 12 वर्षों में साइकिल पर इंवेस्टमेंट नार्थ सिटी में सिंगल व्हीकल बाईपास बनाने की कीमत से आधा है ।

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि साइकिल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने पर चार गुना फायदा मिलता है। लोगों को स्वस्थ्य संबंधी परेशानियां कम होती है, लोग कम बीमार होने की वजह से ज्यादा काम कर पाते हैं और दफ्तर भी रेगुलर जा पाते हैं। ट्रैफिक भी कम होता है प्रदूषण भी कम और सड़क दुर्घटनाएं भी कम होती है। इन सभी कारणों से स्टेट को चिकित्सा पर कम खर्च करना पड़ता है।

जहां तक भारत का संबंध है यहां लोग साइकिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रख कर बनाए हुए शहरों को लेकर काफी उत्साहित हैं। लोग सक्रिय परिवहन, बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर जीवन चाहते हैं, लेकिन ऐसा शहर के डिजाइन को देखकर लगता नहीं कि साइकिलिंग के बारे में यहां गंभीरता से सोचा जाता है। यहां साइकिल के लिए नाम मात्र लेन हैं और बड़े वाहन उनके लिए खतरा हैं। दुनिया के ज्यादातर पैदल यात्री और साइकिल फ्रेंडली देशों में वाहनों की गति की अधिकतम सीमा 30 किमी प्रति घंटा है। इसीलिए साइकिल के अनुकूल बनाने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ साथ साइकिल लेन के अतिक्रमण को रोकने के लिए बेहतर कानून बनाने और उसे सख्ती से लागू करने की जरूरत है। लोगों की मानसिकता भी एक परिवर्तन की जरूरत है। लोग यह सोचते हैं कि साइकिल चलाने से उनके रुतबे में कमी आ जाएगी और या फिर कार चलाने से उन्हें वीआईपी का दर्जा मिलेगा। ऐसी मानसिकता बदलनी चाहिए। हैलमेट लगाए और शॉर्ट्स पहने हुए दिल्ली की सड़कों पर एक आधुनिक साइकिल सवार अभी भी लोगों की कल्पना से परे है। हालांकि हाल ही में कुछ मेट्रो स्टेशन पर रेंट फ्री साइकिल का चलन जोरों पर है और कई इलाकों में साइकिल सवारों के लिए अलग से लेन भी बनायी गयी है।

कोपेनहेगन ने खुद को साइकिल सवारों के लिए स्वर्ग बना कर दूसरे देशों के लिए एक मिसाल कायम की है। उम्मीद है कि आने वाले समय में और देश भी इससे सबक लेंगे।



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