sulabh swatchh bharat

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

डॉ. विन्देश्वर पाठक - ‘पेश करेंगे स्वच्छता की मिसाल’

समाज सुधारक, स्वच्छ रेल मिशन के ब्रांड एंबेसडर और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक से प्रसन्न प्रांजल की विशेष बातचीत के अंश

आप अपनी इस नई जिम्मेदारी को किस रूप में देखते हैं?

जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। एंबेसडर का मतलब होता है दूत। यह पद बहुत बड़ी जिम्मेदारी का अहसास कराता है। हम पूरी लगन के साथ काम करेंगे। प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। रेल मंत्री महोदय ने हम पर जो भरोसा दिखाया है उस पर खरे उतरेंगे। स्वच्छता की मिसाल पेश कर हम उनके नाम को आगे बढ़ाएंगे। हम स्टेशनों को इतना साफ-सुथरा कर देंगे कि गंदगी फैलाने से पहले लोगों के मन में यह ख्याल आएगा कि गंदगी फैलाएंगे तो प्रभु जी देख लेंगे।

रेलवे की सफाई कितनी बड़ी चुनौती है?

रेलवे देश की लाइफलाइन है। देश में 8 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन हैं। ऐसे में इसे साफ-सुथरा करना और उस सफाई को बरकरार रखना बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन हम इस चुनौती को तहे-दिल से स्वीकार करते हैं। हम अपने समर्पित 50 हजार वॉलेंटियर की टीम के साथ इस काम को पूरे दिल से करेंगे।

कैसे करेंगे आप स्टेशन की साफ-सफाई?

स्टेशनों की साफ-सफाई के लिए हमारे वॉलेंटियर के साथ-साथ स्थानीय लोगों की मदद की भी जरूरत है। हमारी योजना है कि हर रविवार स्कूल के 300-400 बच्चों के साथ स्थानीय लोग और हमारे वॉलेंटियर, स्टेशन मास्टर के साथ मिलकर स्टेशन और उसके आस-पास सफाई का काम करेंगे। बच्चों को इस अभियान से जोडऩे का मुख्य मकसद है उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाना और आम लोगों को इसके लिए प्रेरित करना। सफाई में हाथ बंटाने के लिए इन बच्चों को हम सर्टिफिकेट देंगे जो भविष्य में उनके ही काम आएंगे।

कब से शुरू करेंगे सफाई अभियान?

स्टेशनों की साफ-सफाई का काम हम शुरू कर चुके हैं। सितंबर महीने में रेल सप्ताह के तहत हमें पांच स्टेशनों की जिम्मेदारी दी गई थी। पुरानी दिल्ली, ग्वालियर, जयपुर, अहमदाबाद और गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर हम सफाई का काम कर रहे हैं। अब हमें देश के इतने सारे स्टेशनों की जिम्मेदारी दी गई है तो क्रमबद्ध तरीके से सभी स्टेशनों पर सफाई अभियान शुरू करेंगे। हमें उम्मीद है कि अगले छह महीने के अंदर सभी स्टेशनों पर हमारा सफाई अभियान शुरू हो जाएगा।

सफाई के लिए तकनीक की कितनी जरूरत है?

सफाई के लिए तकनीक के महत्व को ध्यान में रखकर ही हमने आज से लगभग पांच दशक पहले टू पिट पोर फ्लश शौचालय विकसित किया था। हम रेलवे की सफाई के लिए भी बेहतर तकनीक पर ध्यान देंगे। इसीलिए हम नई तकनीक पर काम भी कर रहे हैं।

लोगों का माइंडसेट कितना मायने रखता है?

हमारे समाज में और आस-पास साफ-सफाई तभी

जारी रह सकती है, जब लोग इसे करेंगे। लोगों को माइंडसेट बदलने की जरूरत है। अपने घरों को साफ रखने के साथ घर के बाहर और आस-पास भी सफाई का ध्यान देना चाहिए। लोगों की सोच और विचार को विकसित करने की हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। स्वच्छता की संस्कृति विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि

इसे जरूर हासिल कर ‘स्वच्छ भारत, सुंदर भारत’ के सपने को साकार करेंगे।



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो