sulabh swatchh bharat

मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

हुनर को हौसला

संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है। इसीलिए प्रत्येक सरकार अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए विशिष्ट नीतियों का निर्माण एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करती है, ताकि देश के सामाजिक जीवन में समरसता बनी रहे

आजादी के बाद से बहुत-सी सरकारें आईं और गईं। सभी सरकारों ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए नीतियां और कार्यक्रम बनाए। लेकिन इस संदर्भ में मौजूदा मोदी सरकार से काफी अपेक्षा है। चूंकि मोदी सरकार सुशासन और कुशल प्रबंधन के लिए जानी जाती है, इसीलिए स्वाभाविक है कि समाज के कमजोर तबके के लोग उनसे कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करें। भाजपा नीत राजग सरकार में इस महती कार्य के प्रति विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो 'सबका साथ सबका विकास     की अवधारणा में विश्वास करती है। अल्पसंख्यकों के लिए नीतियों और कार्यक्रम का निर्माण कोई नई बात नहीं है, लेकिन वर्तमान शासन में उम्मीद की जा रही है कि इसका लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा, क्योंकि इस बार जागरुकता अभियान पर समान भाव से ध्यान दिया जा रहा है। जाहिर है जब लोगों के पास ज्यादा सूचनाएं होंगी और वे अपने अधिकारों से अवगत होंगे, तो वे उसे पाने के लिए प्रयास भी करेंगे। इस परिप्रेक्ष्य में मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कुछ कार्यक्रमों का ब्यौरा इस प्रकार है-

उस्ताद

वर्ष 2015 में सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के शिल्पकारों के लिए एक योजना की शुरुआत की थी। अल्पसंख्यक समुदाय के कला-शिल्प संबंधी पारंपरिक कौशल के संरक्षण और उन्नयन के लिए शुरू हुई इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत शिल्पकारों को रोजगार पाने लायक बनाया जा रहा है। ये प्रशिक्षित शिल्पकार युवाओं को प्रशिक्षण देंगे। इससे पारपंरिक ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचेगा। इसके अलावा इस योजना के तहत शोध एवं विकास के लिए उस्ताद छात्रवृत्ति, पारंपरिक कला-शिल्प के संरक्षण के लिए शिल्प संग्रहालय की मदद और अल्पसंख्यक समुदाय के शिल्पकारों द्वारा तैयार उत्पादों को बेचने में मदद की जा रही है। हाल ही में सरकार ने उस्ताद योजना के तहत अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा उत्पादित सामान को बेचने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में 'हुनर     नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस प्रकार सरकार न केवल विनिर्माण के स्तर पर ऐसे लोगों को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि उनके उत्पादों की बिक्री भी सुनिश्चित करना चाहती है।  

अल्पसंख्यक पंचायत

पंचायत कार्यक्रम की शुरुआत हरियाणा के मुस्लिम बहुल मेवात क्षेत्र में की गई थी। केंद्र्रीय अल्पसंख्यक राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार मुख्तार अब्बास नकवी की योजना के अनुसार स्थापित करना है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ जमीनी स्तर पर सीधा संवाद हो सके। नकवी का मानना है, 'अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इसके पहले वोट के सौदागरों द्वारा ठगे जाते रहे हैं। अब वोट के लिए ऐसा कोई कारोबार नहीं है, बल्कि उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए विकास का एक एजेंडा है।     इस प्रकार का यह कार्यक्रम पहली बार हो रहा है। इसे इस प्रकार बनाया गया है, जिससे लोगों को सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचा क्षेत्र में विकासात्मक गतिविधि और उनके रोजगार के बारे में सूचना मिल सके। इस कार्यक्रम के जरिए  शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में समुदाय के लिए बनाई गई नीतियों और योजनाओं में सुधार के लिए स्थानीय लोगों का सहयोग और सुझाव भी लिया जाएगा।

नई उड़ान

यह देखा गया है कि सिविल सेवाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की उपस्थिति नाम मात्र की है। इसके कई कारण हो सकते हैं। यह जागरुकता की कमी या आर्थिक रूप से कमजोर के कारण हो सकता है या राजनीतिक इच्छा शक्ति के। इसीलिए वर्तमान सरकार इस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। इसी के मद्देनजर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों की मदद के लिए नई उड़ान की शुरुआत की गई। इससे वही छात्र लाभांवित होंगे, जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली है और मुख्य परीक्षा के प्रत्याशी बन चुके हैं। इस योजना के तहत देश भर के 800 प्रत्याशियों को वित्तीय मदद दी जाएगी। इनमें मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के क्रमश: 568, 96, 80, 32, 17 और 7 छात्र होंगे। प्रत्याशी के परिवार की कुल आय एक साल में 4.5 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।

नई मंजिल

वर्ष 2015 में 650 करोड़ रुपए के बजट से 'नई मंजिल     योजना योजना शुरू की गई। इसमें शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ा गया है। उम्मीद की जा रही है कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय के करीब एक लाख युवकों को फायदा होगा। विश्व बैंक भी ऐसे कार्यक्रमों में 50 प्रतिशत की वित्तीय भागीदारी के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है। वर्ष 2016-17 में इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए 155 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। यह कार्यक्रम बीच में ही विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के लिए चलाया जा रहा है। जाहिर है यह उनके कैरियर को संवारने में सहायक होगा। ध्यान देने की बात है कि बीच में ही स्कूल छोडऩे वाले छात्रों की संख्या अन्य समुदायों की तुलना में अल्पसंख्यकों में, खासकर मुसलमानों में ज्यादा है। माना जा सकता है कि अल्पसंख्यक मंत्रालय अल्पसंख्यक समुदाय में शिक्षा एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।

नई रोशनी

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 25 से 30 तक देश के नागरिकों के धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषायी अधिकारों का प्रावधान किया गया है। इसमें लैंगिक समानता पर भी जोर है, लेकिन यहां आदर्श और व्यवहार में भारी अंतर है, क्योंकि महिलाएं, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय की देश के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे में पीछे घिसट रही हैं। अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं की हालत बेहतर बनाने के लिए सरकार उनका सशक्तिकरण करने के लिए तत्पर है। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मसले पर सरकार ने जो रुख अपनाया है, उस लिहाज से वर्ष 2017 उनके लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। बहरहाल, नई रोशनी मुस्लिम महिलाओं में नेतृत्व के विकास की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें ज्ञान एवं तकनीक से युक्त बनाकर उनका सशक्तिकरण एवं उनमें आत्मविश्वास का भाव पैदा करना है। इसके चलते वे सरकारी संस्थाओं, बैंक एवं अन्य संस्थाओं से संवाद करने में हिचकेंगी नहीं। महिलाओं, खासकर माताओं का सशक्तिकरण ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बच्चों को संस्कारी बनाकर भावी पीढ़ी को बेहतर बनाने का काम करती हैं। इस कारण अल्पसंख्यक महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित होंगी और अपने अधिकारों पर मजबूती से दावा पेश करेंगी। इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं के नेतृत्व, शैक्षिक कार्यक्रम, स्वास्थ्य, स्वच्छ भारत, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल, महिलाओं के कानूनी अधिकार, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा जैसे विषयों को समाहित किया जाता है। राजग शासन के करीब ढाई वर्षों में अल्पसंख्यक मंत्रालय ने 1.30 लाख से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षित किया है।  



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो