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सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

स्किल इंडिया के साथ रोजगार

स्किल इंडिया योजना ने अब तक लाखों लोगों की जीवन-शैली बदल दी है। देश को नए मुकाम पर ले जाने वाली इस योजना से युवा सिर्फ हुनरमंद ही नहीं हो रहे, बल्कि उन्हें रोजगार भी मिल रहा है|

राकेश कुमार एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। स्नातक तक की शिक्षा हासिल करने के बावजूद वह बेरोजगार है। जिस कारण वह अवसाद का शिकार हो गया। 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से विभिन्न रोजगारपरक कोर्स कराए जा रहे हैं। उसे उम्मीद है कि इससे कोर्स करने के बाद उसे नौकरी जरूर मिल जाएगी।
राकेश कहते हैं, 'मैंने अपने दोस्तों के साथ स्किल इंडिया ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का दौरा किया और हमने देखा कि यहां प्रशिक्षण प्रोफेशनल प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा है। मैंने इलेक्ट्रिकल कोर्स में दाखिला लिया। मेरी ट्रेनिंग शुरू हुए 40 दिन हो गए और इस दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा। अब मैं खुद से 2 बीएचके, 3 बीएचके और इंडस्ट्रियल हाउस वायरिंग कर सकता हूं अब मुझे विश्वास हैं कि मुझे मनचाही नौकरी मिल जाएगी।
कुछ ऐसी ही कहानी राजस्थान के धौलपुर गांव की रुक्मिणी की भी है। वह स्किल इंडिया के तहत कपड़ा सिलने का प्रशिक्षण हासिल किया है। इससे रुक्मिणी को एक नया मुकाम मिला। कोर्स करने के बाद महिलाएं सिलाई का काम करके 7000 रुपए प्रति माह कमा सकती हैं। वह बताती हैं, हमें सिलाई का 7 दिनों तक प्रशिक्षण मिला था। हमें एक सिलाई मशीन भी दी गई तथा उसे उपयोग करने का तरीका भी बताया गया। शिक्षा महत्वपूर्ण है लेकिन व्यावहारिक काम करने के लिए स्किल की जरूरत पड़ती है। यह लोगों को रोजगारपरक बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। यह डिग्री प्रोग्राम नहीं है। सरकार का मकसद है कि युवा पीढ़ी सिर्फ डिग्री ही हासिल न करें बल्कि उनमें रोजगारपरक स्किल विकसित हो।  
मौजूदा सरकार ने पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाया और अलग से कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय बनाया। इस मंत्रालय ने पिछले एक साल में देश में कौशल विकास और पास्थितिकी तंत्र में भारी निवेश किया है।
स्किल इंडिया प्रोग्राम 2014 में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया।  इसने लोगों की जीवन-शैली को बदल दिया है। यह भारत को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। इससे युवाओं को रोजगार हासिल करने में मदद मिल रही है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने महज़ 15 महीने में लाखों लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया है और कई लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया। यह मंत्रालय स्किल विकसित करने के लिए बनाया गया और अब तक स्किल के विकास में 73 फीसदी का उछाल आया है। चीन में 80 प्रतिशत लोगों के पास रोजगारपरक स्किल है। नेशनल सेंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक भारत में महज़ 4 प्रतिशत लोगों के पास रोजगारपरक स्किल है।    
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के लक्ष्य को पूरा करने की तीन-चौथाई जिम्मेदारी केंद्र की होती है, जबकि शेष राज्य सरकार की होती है। केंद्र सरकार कुल खर्चे का 25 प्रतिशत वहन करती है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री राजीव प्रताप रुडी के मुताबिक, यह युवाओं को सशक्त बनाने और रोजगारपरक प्रशिक्षण देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
केंद्र सरकार ने 2015 के बजट में 5040 करोड़ रुपए कौशल विकास के लिए आवंटित किया था। स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत अधिकतर गांव के लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके तहत शार्ट टर्म कोर्स कराए जा रहे हैं जिसकी अवधि दो-तीन महीने की होती है। यह कोर्स रिटेल, वायरिंग, प्लंबिग, इंफार्मेशन टेक्नोलाजी, खाद्य प्रसंस्करण इत्यादि में कराए जा रहे हैं। स्किल इंडिया के तहत प्रशिक्षण लेने के बाद आज बहुत से लोग मुंबई, पुणे, हैदराबाद और दिल्ली जैसे महानगरों में नौकरी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मकसद युवाओं को भविष्य के हिसाब से तैयार करना है। वह चाहते हैं कि सभी को रोजगार मिले। युवाओं को समर्थ बनाने के लिए ही पीएम ने यह योजना शुरु की।
कैबिनेट ने नेशनल अप्रेंटिस प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 2019-20 तक 50 लाख लागों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें 10 हजार करोड़ रुपए की लागत आएगी।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 60 लाख लोगों को सेक्टर विशेष के हिसाब से प्रशिक्षित किया जा चुका है और 40 लाख लोगों को वोकेशनल कोर्स का प्रमाण पत्र दिया जा चुका है और ये लोग विभिन्न इंडस्ट्रीज में काम कर रहे हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना- 1 के तहत 19 करोड़ 7 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया था। इस स्कीम से लाखों लोग को लाभ हो चुका है।



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