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रविवार, 24 जून 2018

अपने गड्ढ़े आप भरेंगी सड़कें !

बेंगलुरु। आपने कभी सोचा था कि टूटी हुई सड़कें अपनी मरम्मत खुद करती हो? नहीं न। लेकिन ऐसा होने जा रहा है। टूटी हुई सड़कें अपनी मरम्मत खुद करेंगी, इसके लिए भारतीय प्रोफेसर ने एक खास तरीका ईजाद किया है।

इन सड़कों को बनाने में कोई अतिरिक्त लागत भी नहीं लगेगी। आधुनिक मटीरियल और तकनीक के इस्तेमाल से उन्होंने ऐसी सड़कें बनाई हैं जो खुद को रिपेयर कर सकती हैं और जो किफायती के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं। नागपुर से आने वाले नेमकुमार बनथिया यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में सिविल इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट में प्रफेसर हैं। 34 साल पहले कनाडा पहुंचने के बाद बेहतर सड़कों की उनकी खोज शुरू हो गई।
बेंगलुरु से करीब 90 किलोमीटर दूर एक गांव में बनथिया आधुनिक सड़कों के निर्माण के एक प्रजेक्ट पर काम कर रहे हैं। कनाडा-इंडिया रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सलेंस के तहत बतौर साइंटिफिक डायरेक्टर काम कर रहे बनथिया ने भारतीय सड़कों को नई जिंदगी देने का तरीका ईजाद किया है। यह सड़कें काफी किफायती हैं। इन सड़कों के निर्माण में सीमेंट की खपत आम सड़कों के मुकाबले करीब 60% है और उसकी जगह पर राख का इस्तेमाल हुआ है।



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