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बुधवार, 12 दिसंबर 2018

देश की पहली दृष्टिहीन डॉक्टर

सच है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस कहावत को साकार कर दिखाया है नालासोपारा की 24 वर्षीय डॉक्टर कृतिका पुरोहित ने।

दृष्टिहीन कृतिका ने अपने मजबूत इरादों से न केवल डॉक्टर बनने का सपना सच कर दिखाया है, बल्कि अपने जैसे अनेक दिव्यांगों के लिए जिंदगी में कुछ करने की उम्मीद भी जगाई है। दृष्टिहीन होने के कारण कृतिका को अपने मुकाम तक पहुंचने में कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा, लेकिन कुछ करने की जिद के आगे सारी परेशानियां झुक गईं। कृतिका बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं। तीसरी क्लास में उनकी आंखों की रोशनी वाली ऑप्टिकल नस में दिक्कत आ गई। इससे उन्हें दोनों आंखों से दिखाई देना बंद हो गया, लेकिन डॉक्टर बनने का सपना देखना उन्होंने नहीं छोड़ा। कृतिका ने बताया, 'देश में दृष्टिहीन लोगों के लिए फिजियोथेरपी में डिप्लोमा और सर्टिफिकेशन कोर्स तो है, लेकिन डिग्री कोर्स नहीं है। मैं डिग्री कोर्स में ऐडमिशन लेना चाहती थी। इसके लिए मुझे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।’ कृतिका ने केईएम अस्पताल से फिजियोथेरेपी में डिग्री कोर्स किया। उन्हें महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल फॉर ऑक्यूपेशनल थेरपी ऐंड फिजियोथेरपी (मुंबई) का सर्टिफिकेट मिला। वह शायद सरकार द्वारा प्रमाणित देश की पहली नेत्रहीन डॉक्टर हैं। अब वह निजी प्रैक्टिस करती हैं और आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहती हैं। 



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