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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

जैविक खेती पर्यावरण हितैषी

होशंगाबाद। देश में जैविक खेती की वकालत करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज कहा कि यह केवल पर्यावरण हितैषी ही नहीं है बल्कि इससे धरती की उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है।

जिले के बनखेड़ी इलाके के गोविंद नगर में एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, ‘जैविक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल होती है, बल्कि इससे धरती की उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है।’ उन्होंने कहा कि भारत की अधिकांश जनता गांवों में निवास करती है। जब हमारा समाज खेती को धर्म के आधार पर करने लगेगा तो भारत एक विकसित और उन्नत राष्ट्र बन जायेगा।
भागवत ने कहा कि रासायनिक खेती का प्रभाव पंजाब राज्य में देखने को मिल रहा है, वहां खेती खराब हो गयी है। आरएसएस प्रमुख ने बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में केवल 19 प्रतिशत जंगल ही रह गये हैं। अब अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर ही इसे संतुलित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन सनातन धर्म का आधार हैं यदि इनको नष्ट किया गया तो देश प्रगति नहीं कर सकता है। भागवत ने कहा कि भारत को विश्व गुरू बनाने के लिये हमें सामाजिक सौहाद्र को बढ़ाकर एकता के साथ रहना चाहिये।


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