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सोमवार, 15 अक्टूबर 2018

लहरों पर तैरेगी परिवहन व्यवस्था

परिवहन के जिन नाव और पानी के जहाज को हम सड़कों और हाईवे के फैलते जाल में फंस कर भूल चुके हैं। आज उन्हीं साधनों की देश को जरूरत है

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी कहते हैं, 'दिल्ली या मुंबई से कोई सामान खरीदने की अपेक्षा दुबई या लंदन से सामान खरीदना सस्ता और आसान है।   उनकी यह बात लोगों को आसानी से भले ही हजम न हो। लेकिन इसके पीछे की हकीकत देश में जलमार्गों की जरूरत को रेखांकित करता है। जब 12 अगस्त को उन्होंने वाराणसी में मालवाहक जहाज वीवी गिरि और जय वासुदेव को हरी झंडी दिखाई, तो उनकी कही गई बातों के मायने समझ में आने लगे।

जय वासुदेव 1400 टन माल बलिया लेकर जा रहा था। वीवी गिरि 55 नवनिर्मित मारुति कार लेकर कोलकाता जा रहा था। यह एक ऐतिहासिक यात्रा थी क्योंकि एक बड़ा मालवाहक राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के माध्यम से इतने लंबे स$फर पर था। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 इलाहाबाद से हल्दिया तक है और इसकी कुल दूरी 1600 किमी है। यह 1986 में अधिसूचित किया गया था लेकिन शायद ही यह कभी इसका कार्गो आंदोलन के लिए प्रयोग किया गया हो। फरक्का से हल्दिया एक अपवाद था, यह एनटीपीसी फरक्का से हल्दिया तक कोयले के ढुलाई के लिए प्रयोग किया जाता था।   

पानी, हर जगह पानी 

भारत नदियों की धरा है। देश में कुल 14,500 किमी जलमार्ग मौजूद है, लेकिन नीति-निर्माताओं का ध्यान महज 4500 किमी (5 राष्ट्रीय जलमार्ग) पर गया है। पश्चिम बंगाल, असम और केरल के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर बाकी किसी का उपयोग नहीं किया गया। भारत में कुल माल और यात्री यातायात के लिए सिर्फ 3.5 प्रतिशत जलमार्ग का प्रयोग किया जाता है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत है। चीन में लगभग 2 लाख मालवाहक जहाज जलमार्ग का प्रयोग करते हैं, जबकि भारत में सिर्फ 1000 जहाजें अंतरदेशीय जलमार्ग पर चलती हैं। 

जलमार्गों के विकास में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बाधक है। मौसम में परिवर्तन के कारण जहाज को गहराई तक पानी नहीं मिल पाता है, इससे इसमें बाधा आती है। भारत में बहुत कम अच्छे बंदरगाह हैं जहां पर माल उतारने और चढ़ाने की उचित सुविधा है। चीन जैसे देशों में मजबूत जलमार्ग प्रणाली है। उनकी जहाजें चालीस हजार टन माल ढोने में सक्षम हैं, जबकि भारत 1,500 टन भार ही ढोने में सक्षम हैं। 

2016 में सरकार ने जलमार्ग का भरपूर प्रयोग करने का फैसला किया। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के तहत 106 नए जलमार्गों को विकसित करने की घोषणा की गई है। सरकार जल मार्ग विकास परियोजना के तहत वल्र्ड बैंक के सहयोग से राष्ट्रीय जलमार्ग को विकसित कर रही है। यह 4200 करोड़ की परियोजना है। सरकार बुनियादी ढांचे के साथ नदी टर्मिनल, चैनल सर्वे, जीपीएस सिस्टम और सूचना पहुंचाने के लिए भी काम कर रही है। सरकार की जलमार्ग को बढ़ावा देने की मुहिम रंग लाती दिख रही है। 

जलमार्ग परिवहन के कई वित्तीय फायदे हैं। जलमार्ग परिवहन का खर्च 50 पैसा प्रति किमी के हिसाब से आता है जबकि रेल और सड़क परिवहन में 1 रुपए और 1.5 रुपए आता है। भारतीय सड़कें कार्गो मूवमेंट के अनुकूल नहीं हैं। माल पहुंचने में देर होने से किराया भी बढ़ जाता है। जलमार्ग के प्रयोग से सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा तथा सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और प्रदूषण भी कम होगा। जलमार्ग में सार्वजनिक और निजी निवेश बढऩे से नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण के चेयरमैन अमिताभ वर्मा ने कहा, 'जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट में निवेश से सिर्फ बिहार में पचास हजार लोगों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध होगा। 

अंतरदेशीय जलमार्ग का विकास कई समस्याओं से निपटने में सहायता करेगा। इसके विकास से कई गुना लाभ होगा और इसका दीर्घकालीन असर रहेगा। सरकार के 2016 में किए गए कामों का असर 2017 में देखने को मिलेगा जब देश तरक्की की नई इबारत लिख रहा होगा। 



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