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सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

तकनीक का फिल्मी तमाशा

फिल्मों के ब्लॉकबस्टर होने की गारंटी अब मेगा स्टार्स और मेगा बजट नहीं रही। जमाना वीएफएक्स यानी स्पेशल विजुअल इफेक्ट का है। 'बाहुबली’के ब्लॉकबस्टर होने के पीछे वीएफएक्स की बड़ी भूमिका रही। यही वजह है कि आज वीएफएक्स का कारोबार अरबों रुपए का है

कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? ये सवाल पिछले दो वर्षों से सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। तेलुगु फिल्मों के निर्देशक एस. एस. राजामोली ने अपनी इस धुआंधार काव्य रचना बाहुबली: द बिगनिंग से अंतरराष्ट्रीय ख्याति पाई है। हालांकि इस तरह की कहानी पर पहले भी कई बार फिल्में बन चुकी हैं। 'बाहुबली’अपने विजुअल्स की गुणवत्ता और भव्यता की वजह से पहले बनी सभी फिल्मों से जुदा रही। फिल्म की किसी भी सीन को ले लें चाहे वो झरने का सीन हो या फिर खूबसूरत गानों के फिल्मांकन का या फिर विशाल महल का दृश्य या युद्ध मैदान का विहंगम दृश्य, हर एक दृश्य फिल्म को एक बड़ा ब्लॉकबस्टर बनाती है। इस फिल्म के स्पेशल विजुअल इफेक्ट ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मापदंड स्थापित किया है। इस फिल्म ने हॉलीवुड फिल्में जैसे 'अवतार’, '300’और 'लॉर्ड ऑफ रिंग्स’को मुंहतोड़ जवाब दिया है। इस फिल्म के बाद 'धूम-3’, 'मोहनजोदाड़ो’, 'कबाली’और 'सुल्तान’जैसी फिल्मों में वीएफएक्स का काफी इस्तेमाल किया है।  

वीएफएक्स के मायने

वीएफएक्स का मतबल होता है 'स्पेशल विजुअल इफेक्ट’है। इस इफेक्ट को पोस्ट प्रोडक्शन के दौरान लगाया जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो ये वे फिल्म के किसी दृश्य का वो हिस्सा हैं जो किसी भी वजह से फिल्मांकन के दौरान शूट नहीं किया जा सका। उदाहरण के तौर पर कोई ऐसा कोई ऊटपटांग सा प्राणी जो सच में हो ही नहीं सकता हो या बनाया ही नहीं जा सकता हो। ये कोई ऐसा बड़ा सेट भी हो सकता है जिसे बनाने में बहुत खर्च आए। जिन स्टंट्स को सचमुच में करना बहुत खतरनाक हो सकता है उन्हें भी वीएफएक्स की मदद से पोस्ट प्रोडक्शन के समय बनाया जाता है। विजुअल इफेक्ट्स में ऐसे कोई भी इफेक्ट्स हो सकते हैं जो कि फिल्मांकन के दौरान सीधे कैमरे से नहीं लिए जा सकते थे।     

हॉलीवुड की फिल्मों में विजुअल इफेक्टï्स का इस्तेमाल पिछले छह दशकों से हो रहा है। उस समय में इसके इस्तेमाल के लिए कई तरह के एलिमेंट्स को मिलाकर एक भ्रामक स्थिति बनाई जाती थी जिसे कैमरे से फिल्मांकन के समय ही कैद किया जाता था। आज कल इसे पूरी तरह से कंप्यूटर की मदद से किया जाता है। पहले इसे ऑपटिक्ल कंपोजिटिंग की तकनीक से किया जाता था। इसमें फिल्मों की कई सतहों को जोड़कर फिर उसे एक्सपोज कराया जाता था।  

सीजीआई का मतबल होता है कंप्यूटर जेनरेट्ड इमेज। इसे भी वीएफएक्स तकनीक में जोड़ा गया है। सीजीआई का इस्तेमाल कंप्यूटर में 3डी मॉडल बनाने के लिए किया जाता है। इसी की मदद से बनाए गए 3डी मॉडल ऑब्जेक्ट्स 3जी इमेज के रूप में तैयार होते हैं। विजुअल इफेक्ट्स में जो तत्व इस्तेमाल किये जाते हैं इनमें लाइव एक्शन प्लेट भी शामिल है, जिससे सेट पर ही शूट किया जाता है। ऐसी चीजें जो कैमरे में अलग से शूट की जाती हैं, जैसे कि आग लगना, मॉडल या फिर मिनिएचर या कोई भी ऐसी दूसरी चीजें जो कंप्यूटर से बनाई गईं हों। इसीलिए सीजीआई विजुअल इफेक्ट का ही एक तरीका है। आजकल काफी विजुअल इफेक्ट्स ऐसे बनाए जाते हैं, जो कि सीजीआई एलिमेंट से बनते हैं लेकिन इसे विजुअल इफेक्ट शॉट कहा जाता है।  

बढ़ती सल्तनत

सलमान खान की 'सुल्तान’ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाल मचाया। तीन सौ करोड़ का व्यवसाय करने के बाद ये फिल्म साल 2016 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई। हालांकि यह फिल्म पहलवानी को लेकर बनाई गई थी लेकिन इसका स्तर किसी भी बॉलीवुड की फिल्म के मुकाबले काफी ऊंचा था। हालांकि इस फिल्म के लिए सलमान ने अपनी बॉडी बिल्ड पर काफी मेहनत की है, लेकिन जैसी फिल्म पर्दे पर उभरकर आई है इसकी सफलता में वीएफएक्स का बड़ा योगदान है।  

जब 'सुल्तान’के प्रोड्यूसर यशराज ने की इस फिल्म से जुड़े वीएफएक्स के हिस्से को सोशल मीडिया पर रिलीज किया, तो सब दंग रह गए। अगर ये वीएफएक्स इस्तेमाल नहीं किए गए होते तो फिल्म में वो बात निकलकर नहीं आती जो हमने महसूस की। इससे पहले भी बड़े बजट की फिल्में जैसे कि 'बाहुबली’, 'रॉ-वन’, 'क्रिश’, 'धूम थ्री’, 'रेडी’, 'रास लीला रामलीला’जैसी फिल्मों में इसका इस्तेमाल किया गया है। ये प्रोडक्शन अपनी सफलता और लोकप्रियता के लिए काफी हद तक वीएफएक्स और सीजीआई तकनीक पर निर्भर करते है। निर्देशक राजामोली ने फिल्म 'बाहुबली’में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वी श्रीनिवासन को विजुअल इफेक्ट्स सुपर वाईजर बनाया था। शेखी बघारते हुए कहा जाता है कि फिल्म में 90 फीसदी सीजीआई वर्क किया गया है। जिनमें कि 2500 वीएफएक्स शॉट का इस्तेमाल हुआ है। हैदराबाद की मकूता वीएफएक्स स्टूडियो भारत में इस काम के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। फिल्मों में इस्तेमाल किए गए 50 फीसदी कं प्यूटर से बनाए गए दृश्य यहीं तैयार किए जाते हैं।

गेनिंग मोमेंटम : तेज होती चाल

गेनिंग मोमेंटम पोस्ट प्रोडक्शन व्यवसाय जितना लोकप्रिय तो नहीं हुआ, फिर भी इससे जुड़े अब तक 300 एनिमेशन, 40 वीएफएक्स और 85 विकसित स्टूडियो चल रहे हैं। इनमें 15 हजार पेशेवर लोग काम कर रहे हैं। इससे पता चलता है की इस क्षेत्र की चाल तेज हो रही है। शेफिल्ड हल्लम यूनिवर्सिटी के एनिमेशन और वीएफएक्स विभाग में सीनियर लेक्चरर कहते हैं 'मुझे विश्वास है कि एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट व्यवसाय का भारत में भविष्य बहुत ही उज्ज्वल है।’सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं इनकी जरुरत यूके और यूएसए की गेम डिजाईन करने वाली कंपनियों में भी बहुत है। ये कंपनियां हमेशा युवा, प्रतिभावान लोगों की तलाश में रहती हैं। इसके अलावा भारत में बहुत बड़ा फिल्मों और मीडिया का व्यवसाय है।     

जानने वाली बात यह है कि आज भारत में वीएफएक्स व्यवसाय 45.5 अरब रुपए का करोबार कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले 2020 तक यह बढ़कर 87.1अरब रुपए तक पहुंच जाएगा। इससे पता चलता है कि फिल्म बनाने की प्रक्रिया एक बदलाव के दौर से गुजर रही है। भारत में बनने वाली और पश्चिम से बनने के लिए आई हुई फिल्मों के लिए भारतीय मीडिया और मनोरंजन कारोबार वीएफक्स में अपार संभावनाएं तलाश रहा है। आज ज्यादातर फिल्म निर्माता अपनी सीमाओं को बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं और से वीएफएक्स को ध्यान में रखते हुए कहानियां लिखवा रहे हैं।       

टीवी के टीआरपी का फंडा

पहले पौराणिक और डरावनी कहानियों पर आधारित धारावाहिक काफी पसंद किए जाते थे। उनमें इस तरह के कुछ इफेक्ट्स इस्तेमाल होते तो थे लेकिन वे इतने साधारण होते थे कि उन पर कभी कुछ लिखा नहीं गया। अब यह इंडस्ट्री में भी बॉलीवुड को देखते हुए वीएफएक्स के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। भारतीय टीवी इंडस्ट्री भी आज वीएफएक्स में काफी पैसा और ऊर्जा लगा रही है। सुपरनेचुरल और पौराणिक कहानियां काफी पसंद की जा रही हैं। ऐसा लगता है कि इंडस्ट्री बेहतरीन क्वालिटी के सूपर इफेक्ट्स दर्शकों को देने का मन बना चुकी है। हाल में आए कुछ धारवाहिक जैसे कि 'सिया के राम’, 'नागार्जुन’, 'ब्रह्मïराक्षस’और 'चन्द्रनंदनी’जैसे धारावाहिकों में जिस तरह के इफेक्ट्स देखने को मिले हैं वे चकित करने वाले हैं। क्रिएटिव डायरेक्टर संदीप सिकंद के मुताबिक टेलीफिल्मस छोटे पर्दे को मजबूत बनाने के लिए वीएफएक्स काफी कारगर साबित हो रहें हैं। संदीप, एकता कपूर की बालाजी टेलीफिल्मस से जुड़े हुए हैं। यह धारावाहिक 'ये है मोहब्बतें’के क्रिएटिव डायरेक्टर भी है। संदीप के मुताबिक, 'छोटा पर्दा कहनी कहने का एक बड़ा माध्यम हो गया है और हम हमेशा अपनी इस किस्सागोई को और बेहतर करने की कोशिश में जुटे रहते हैं’। इस समय में जबकि दर्शक प्रोडक्शन हाउस को लेकर वफादार है वीएफएक्स के रूप में हमें पसंदीदा बनने का एक मंत्र मिल गया है। यही वजह है कि इतने कम समय वाले और व्यस्त शिड्यूल में इतना समय लगाने वाले और महंगे वीएफएक्स को इस्तेमाल करने का रिस्क उठाने से भी निर्माता हिचक नहीं रहे। डेली सोप के निर्देशक रोहित राज कहते हैं, ' पहले वीएफएक्स बनवाना बहुत ही महंगा था और ये कितनी सफाई से बनेगा इसके लिए भी सोचना पड़ता था। लेकिन अब काफी लोग इसे कर रहे हैं।’तीन-चार साल पहले आई फिल्म 'बाहुबली’के वीएफएक्स को देखने के बाद बॉलीवुड की फिल्मों में इसके इस्तेमाल का चलन काफी बढ़ गया है। 'बाहुबली’जैसी फिल्में वीएफएक्स को मुख्यधारा में ले आई हैं। टीवी हमेशा से ही फिल्मों को देखकर प्रभावित हुआ है इसीलिए यह छोटे पर्दे पर भी इसका चलन काफी बढ़ गया है। वर्टेक्सवोल्ट जैसा अग्रिणी वीएफएक्स स्टूडियो जिसने 'महादेव’, 'हातिम’और 'सिया के राम’जैसे काव्यों पर आधारित धारावाहिकों के लिए काम किया है, वे आज धारावाहिकों के पर्दे पर शुरु होने से पहले 9 से 12 महीनों तक लगातार काम करते हैं। वीएफएक्स डिजाइनर हार्दिक गज्जर कहते हैं कि हमारी टीम में 130 लोग है जो दो शिफ्टों में काम करते हैं। जिससे वीएफएक्स प्रसारण से पहले तैयार हो जाए। 'सिया के राम’के लिए हमारी टीम ने धारावाहिक शुरु होने से 8 महीने पहले से ही काम करना शुरू कर दिया था।

टीवी को और बेहतर बनाने, 'छोटा भीम’और 'बाल हनुमान’जैसे सफल एनीमेटेड वीएफएक्स बनाने के बाद अब 'चाचा चौधरी’और 'साबू’जैसे कॉमिक चरित्रों को गेम और एनिमेशन में ढालने की अपार संभावनाएं हैं। भारतीय और विदेशी फिल्म निर्माताओं के भारतीय पोस्ट-प्रोडक्शन स्टूडियो पर बढ़ते भरोसे को देखते हुए घरेलू वीएफएक्स कलाकारों और कारोबार का भविष्य काफी उज्ज्वल दिख रहा है। 



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