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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

देश की धड़कन

स्वयं से पहले देश सेवा-भारतीय सेना का यह आदर्श वाक्य रहा है। भारतीय सेना ने अनेक मौकों पर इसे साबित भी किया है

भारतीय सेना के लिए कर्तव्य, सम्मान, साहस, धैर्य और एकता प्रमुख शब्द हैं। भारतीय सेना हमेशा इन मूल्यों पर खरा उतरती है। सेना एकमात्र संस्था है, जिस पर आज़ादी से अब तक सांप्रदायिकता और विभाजनकारी प्रवृत्तियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। देश में जब भी जाति और धर्म के नाम पर राजनीति और समाज को बांटने की कोशिश हुई, सेना हमेशा विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ खड़ी रही और इन ताकतों से जमकर लोहा लिया। सेना ने पिछले 6 दशकों से पूरी निष्ठा के साथ देश के संविधान की रक्षा की है और आज भी कर रही है। सेना का भारत के स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के निर्माण में  महत्वपूर्ण योगदान रहा है।   इतिहास गवाह है कि भारतीय सशस्त्र बल को जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसने अपने उस दायित्व को बखूबी पूरा किया है। परिस्थिति चाहे अनुकूल रही हो या प्रतिकूल, सेना हर भूमिका और हर माहौल में खरा उतरी है। युद्ध की स्थिति, प्राकृतिक आपदा और नागरिक हिंसा के समय सेना ने हमेशा अपना सहयोग दिया है।   

सैनिकों का जीवन चुनौतियों और कठिनाईयों भरा माना जाता है। सैनिकों को प्रशिक्षित करने के लिए एक संरचना बनाई गई है। इसका उद्देश्य सैनिकों में अनुशासन, कर्तव्य और दृढ़ संकल्प विकसित करना है। सैनिकों का जीवन अप्रत्याशित परिस्थितियों से भरा होता है। इन्हें हमेशा किसी भी परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। भारतीय सेना कई समाजसेवा के कार्य भी करती है। सेना प्राकृतिक आपदा के समय राहत-बचाव का कार्य, पर्वतों पर फंसे और गहरे गड्ढे में गिरे लोगों को बाहर निकालने जैसे कई अन्य कार्य भी करती है। गौरतलब है कि सेना ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सुदूर क्षेत्रों में गोद लिए गए गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं भी मुहैया कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सेना के कार्य को देखते हुए अगर इसे देश के रीढ़ की हड्डी कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। सेना देश के हर संकट के समय संकटमोचन के रूप में हर जगह खड़ी रहती है।



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