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शुक्रवार, 25 मई 2018

ऐसे संवारा बच्चों का भविष्य

अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए एक प्रतिष्ठिïत उद्योगपति ने 15 साल पहले जो पहल की थी, वह समाज के लिए उपयोगी दिखने लगा है

 बात 2003 की है। चार बच्चों के पिता की ब्लड कैंसर से मौत हो गई। इसके बाद मिंडा बाल ग्राम संस्था ने इन बच्चों को गोद ले लिया। उद्योगपति और समाज सेवक शादीलाल मिंडा ने 2001 में मिंडा बाल ग्राम की स्थापना की थी।  

समय बीतने के साथ चारों बच्चे बड़े हो गए। चारों बच्चों में सबसे बड़ी अर्चना (बदला हुआ नाम) हैं। 2011 में 12वीं पास होने के बाद उसका विवाह हो गया। अब अर्चना एक बेटे की मां भी है। वह आनंदपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रही है। 

अर्चना के छोटे भाई उमेश का भी पालन-पोषण मिंडा बाल ग्राम ने ही किया। 12वीं पास होने के बाद इसने इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग एंड न्यूट्रिशन दिल्ली से होटल मैनेजमेंट में एक साल का डिप्लोमा कोर्स किया। इस वक्त वह टाटा स्टार कंपनी की कनॉट प्लेस शाखा में कार्यरत है।

उमेश के छोटे भाई रमेश ने 10वीं पास करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड से आईटीआई का कोर्स किया। इस वक्त वह सैमसंग शो रूम में काम कर रहा है।

चारों भाई-बहनों में कल्पना (बदला हुआ नाम) सबसे छोटी है। मिंडा बाल ग्राम के सहयोग से उसने इंटरमीडिएट यानी 12वीं तक शिक्षा हासिल की। उसके बाद उसने दिल्ली के लाल बहादुर इंस्टीट्यूट से ब्यूटीशियन का कोर्स किया। 

मिंडा बाल ग्राम से जुड़ा यह कोई अकेला मामला नहीं है। मिंडा बाल ग्राम में 20 से अधिक लड़के और लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ग्राम प्रोजेक्ट मैनेजर टीएन तिवारी कहते हैं, 'सभी बच्चे अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।’   

मिंडा बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। बच्चे उन्हे 'बाबूजी’ के नाम से बुलाते हैं। उन्होंने बाल मिंडा ग्राम की स्थापना एक बगीचे की तरह की है। यहां बच्चों को बेहतरीन शिक्षकों द्वारा उच्च गुणवत्तापरक शिक्षा दी जाती है। ये सब सुविधाएं नि:शुल्क प्रदान की जाती हैं। टीएन तिवारी कहते हैं, 'यहां बच्चों को आत्म-निर्भर बनाने के लिए शिक्षा दी जाती है। बच्चों के स्वास्थ्य का भी देखभाल किया जाता है। मिंडा बाल ग्राम बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही शादी भी कराता है।’

वर्तमान में वे लोग पूरे परिवार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं । उनका जोर पर्यावरण के साथ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर है। इसका मकसद बच्चे भविष्य में देश का एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।



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