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गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

ग्रामीण भारत ने दिखाया रास्ता

ग्रामीणों को खुले में शौच जाने से रोक कर प्रसिद्ध हुआ डब्बा ढोल गैंग

मध्य प्रदेश के रतनपुर गांव की महिलाओं को सवेरे जगने की आदत थी। यह आदत मजबूरी की थी ताकि किसी के जगने से पहले वे खेतों में जाकर शौच क्रिया से निवृत हो सकें। एक दिन अचानक गांव की कुछ महिलाओं को आत्मबोध हुआ और उनमें से 10 महिलाओं के बीच घर के पास ही शौचालय बनाने पर आपसी सहमति बनी। उनलोगों ने गड्ढे खोदे और सभी को पुराने बेडशिट एवं साडि़य़ों से चारों ओर से घेर दिया ताकि निजता बनी रहे। उनकी मेहनत रंग लाई। स्थानीय प्रशासकों की नज़र उन पर पड़ी जिन्होंने शौच मुक्त समिति गठित करने के लिए प्रोत्साहित किया था। एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन युवा फोरम के साथ मिलकर समिति ने खुले में शौच जाने के खिलाफ अभियान चलाया। दृढ़तापूर्वक किए गए प्रयास की बदौलत गांव का अधिकांश भाग खुले में शौच जाने से मुक्त हो गया। सीटी बजाकर, टॉर्च से रोशनी दिखाकर तथा भजन गाकर खुले में शौच जाने वालों को हतोत्साहित किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में पिपलिया मिरा गांव का डब्बा ढोल गैंग काफी प्रसिद्ध है। इस गैंग का नेतृत्व 12 वर्षीय धर्मसेना के हाथ में है। इस गैंग के लड़कों को गले में सीटी बांधे हुए गांव और उसके आस-पास के खेतों में घूमते सहज ही देखा जा सकता है। इस गैंग से सदस्यों का मुख्य काम खुले में शौच करने वालों को पकडऩा है तथा पानी के बर्तन को खाली कर देना है जो वे अपने साथ ले गए हों। नाम पर धब्बा लगाने की रणनीति ने जबरदस्त रूप से अपना काम किया है। इसी वजह से हाल ही में पिपलिया मिरा खुले में शौच से मुक्त गांव घोषित किया गया है। इस प्रकार मिली सफलता के बाद डब्बा ढोल गैंग पड़ोस के गांवों के बच्चों को प्रशिक्षित कर अब अपने क्रियाकलाप को और भी आगे बढ़ा रहा है।

अगर आपके गांव के 220 घरों में से महज 12 घरों में शौचालय है तो फिर खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के संकल्प लेने से पहले आपको दो बार सोचना होगा। लेकिन छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव जिला स्थित केस्ला गांव की पंचायत सचिव रशिदा रवानी ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने अपने कुछ स्वयंसेवकों के साथ यह संकल्प लिया कि अपने गांव को खुले में शौच मुक्त करने के बाद ही वे ईद मनाएंगी। उन्हें गांव वालों को घर में शौचालय बनाने के बारे में समझाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा। इसके बाद लोगों को शौचालय के उपयोग करने के लिए प्रेरित करना पड़ा। इतना प्रयास करने के बाद भी ईद के दो दिन बाद ही आधिकारिक रूप से खुले में शौच से मुक्त गांव घोषित होने की सूचना मिली। लेकिन केस्ला वासियों के लिए यह दोहरा उत्सव था।                  

महिलाओं के प्रति अपने नज़रिए के लिए हरियाणा और हरियाणवी दोनों ही बदनाम हैं। लेकिन ओंटकर गांव की महिलाएं अपने मर्दों के रवैए से हतोत्साहित नहीं होती हैं। गांव को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए वे काफी सक्रिय रही हैं। यहां लगातार बैठकें आयोजित की जाती हैं जहां स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विस्तार से चर्चाएं होती हैं तथा क्रियान्वयन के लिए ठोस योजनाएं तैयार की जाती हैं। उन लोगों ने 'मेरे घर में शौचालय बनाओ पिया जी’ नाम से एक गीत भी बनाया है।



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