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शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

सफाई की नज़ीर बनी टेम्स

लंदन की टेम्स नदी आज सफाई और साफ पानी की मिसाल बन चुकी है। टेम्स की सफाई के लिए अपनाए गए तरीकों पर एक नज़र

हमारे देश में गंगा 'मां’ कही जाती है, तो इंग्लैंड में टेम्स नदी 'फादर’ कहलाती है। दुनिया भर में नदियों से लोगों का ऐसे ही जीवंत रिश्ता है। टेम्स के किनारे बसा है लंदन शहर। आज टेम्स विश्व की सबसे साफ नदियों में एक है। लंदन की खूबसूरती में चार चांद लगाती टेम्स को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कभी यह दुनिया की सबसे प्रदूषित नदी हुआ करती थी। कभी प्रदूषण और बदबू की वजह से लोग इसके किनारे जाने से कतराते थे, लेकिन आज टेम्स का किनारा पर्यटकों का पसंदीदा स्थल बन गया है।   

टेम्स नदी दक्षिण-मध्य इंग्लैंड के कॉटस्वोल्ड नामक पहाड़ी से निकली चार धाराओं के मिलने से बनी है। टेम्स 346 किमी लंबी है। यह ऑक्सफोर्ड, रैडिंग, ईंटन और लंदन से होते हुए आगे जाकर अटलांटिक सागर में मिलती है। प्रदूषण के कारण टेम्स एक नहीं बल्कि दो-दो बार मर कर जिंदा हो चुकी है। आखिरी बार 1957 में जैविक रूप से टेम्स को मृत घोषित कर दिया गया था।

कल-कारखानों की वजह से टेम्स नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित हुई थी। नदी का पानी जहरीला हो गया था। 1878 में टेम्स नदी में एक जहाज डूब गया था। उस जहाज़ में लगभग 700 यात्री सवार थे। जब इस हादसे की जांच रिपोर्ट आई, तब पता चला कि लोगों की मौत जहरीले पानी के कारण हुई थी।

प्रदूषण से संसद ठप्प

टेम्स नदी के एक तरफ प्रसिद्ध 'लंदन आई’ है और दूसरी तरफ ब्रिटेन की संसद। टेम्स के किनारे संसद होने के कारण नदी के प्रदूषण का असर उसकी कार्यवाही पर दिखता था। 1858 की गर्मियों में टेम्स नदी से उठने वाली बदबू के कारण संसद सत्र स्थगित करना पड़ा। लंदन में इस युग को 'द ग्रेट स्टिंक’ का नाम दिया गया।   

सफाई के तौर-तरीके

ब्रिटिश संसद ने 1858 में टेम्स को साफ करने के लिए मॉडर्न सीवेज सिस्टम की योजना बनाई। इस योजना के तहत जमीन के अंदर 134 किमी तक सीवेज सिस्टम लगाया गया। पूरे लंदन शहर को सीवर सिस्टम से जोड़ा गया। सीवर को गलियों में तीन फुट व्यास के पाइप से जोड़ा गया। सीवेज सिस्टम लगने के बाद घरों से निकलने वाला खराब पानी सीवेज ट्रीटमेंट के बाद ही टेम्स में गिरता है। 1885 में 'टेम्स संरक्षण अधिनियम’ भी बनाया गया।

1960 के आसपास टेम्स नदी एक बार फिर नाले में तब्दील हो गई थी। उसे दोबारा साफ करने के लिए 4 बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए। पुरानी सीवर लाइन को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया। सरकार ने टेम्स को साफ करने के लिए कई कानून बनाए। साथ ही यह फरमान भी जारी किया गया कि बिना ट्रीटमेंट के पानी की एक बूंद भी टेम्स में नहीं जानी चाहिए। सरकार ने टेम्स नदी में गंदा पानी गिराने वाले कारखानों और कंपनियों को बंद करने का हुक्म दिया। टेम्स अगस्त 1983 तक एक बार फिर से साफ हो गई। नदी में सैलमन मछलियां फिर से वापस आ गईं। गौरतलब है कि सैलमन मछली को ब्रिटेन में सफाई का प्रतीक माना जाता है। टेम्स को साफ और स्वच्छ रखने के लिए वर्ष 2000 में 'रिवर क्लीन अप’ अभियान शुरू किया गया। आम लोगों को भी इस अभियान से जोड़ा गया। इस अभियान के तहत आम लोग साल में एक दिन पूरी टेम्स को साफ करते हैं। सफाई के लिए सभी लोग सारा सामान अपने साथ लेकर आते हैं। पिछले 16 वर्षों से यह अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है। नदी को साफ बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन इस अभियान की वजह से 346 किमी लंबी टेम्स नदी को साफ रखने में काफी मदद मिलती है।   

मौजूदा वक्त में टेम्स दुनिया की सबसे साफ नदियों में से एक है। 2010 में टेम्स को विश्व की सबसे साफ नदी होने का खिताब मिल चुका है। ब्रिटेन की सरकार और आम लोगों ने मिलकर टेम्स को दो बार साफ किया। टेम्स नदी एक मिसाल के रूप में हमारे सामने है।



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