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बुधवार, 25 अप्रैल 2018

सैयामी खेर - संयम में सैयामी

क्रिकेट की मध्यम तेज गेंदबाज सैयामी खेर ने अचानक क्रिकेट का गेंद छोड़ कर एक्टिंग की बॉलिंग शुरू कर दी। लेकिन 'मिर्जियाÓ में उन्होंने अपना पहला ओवर ही गलत डाला। इन दिनों वह फिर मॉडलिंग में व्यस्त हैं। उनसे ताजा मुलाकात में गोपा सी की कई नई बातें हुईं

'मर्जिया' के बाद?

मैं इन दिनों फिर अपने मॉडलिंग के इंडोर्समेंट को लेकर व्यस्त हूं। फिल्मों के कुछ ऑफर भी मेरे पास आए है, पर मैं कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती हूं। 'मिर्जिया' मेरी उम्मीदों पर नहीं खरी उतरी, इस बात का मुझे भी अफसोस है। पर आप तो जानते हैं कि मेरा नाम संस्कृत शब्द संयम से आया है। इन दिनों मैं वही बरत रही हूं। मीडिया से भी कम मिल रही हूं। पर जल्द ही मैं कुछ अच्छी बातों की घोषणा करने वाली हूं।

आप तो खिलाड़ी बनना चाहती थीं, फिर एक्टिंग में आना कैसे संभव हुआ ?

आप ठीक ही कह रहे हैं। बचपन से खेल में मेरी ज्यादा रुचि ओर ध्यान-ज्ञान था। मैं क्रिकेट ओर बैडमिंटन खेलती थी। महाराष्ट्र स्टेट क्रिकेट टीम से भी खेला है। पक्की टॉमबॉय थी। जिस उम्र में मेरी हमउम्र लड़कियां फैशन और मेक-अप के बारे में सोचती थीं, मैं शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए स्वीमिंग, साइकिलिंग आदि करती थी। इसी वजह से खेल कोटे में मुझे मुंबई के सेेंट जेवियर्स कॉलेज में दाखिला भी मिला।

क्या मुंबई में आते ही आपको बड़े परदे का ऑफर मिला था ?

आते ही नहीं...यहां आकर ही मैंने तय किया कि मैं पेशेवर खिलाड़ी बनूंगी। लेकिन उसके लिए जिस फिटनेस लेबल की जरूरत पड़ती है,वह मेरा नहीं था। इसलिए महिला क्रिकेट की राष्ट्रीय टीम से आमंत्रण मिलने पर भी मैं अंतत: सेलेक्ट नहीं हो पाई। राष्ट्रीय दल में ही खेल नहीं पाई ,तो और क्रिकट खेलने का कोई मतलब नहीं था। मेरा चेहरा ठीक-ठाक था। इसलिए मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे। रैंप पर कई बड़े ब्रांड के लिए मॉडलिंग की है। वैसे मॉडल के तौर पर मुझे आाशातीत लोकप्रियता मिली एक पेय पदार्थ के कैलेंडर की वजह से।

मगर मॉडलिंग का मतलब ही फिल्मों की तरफ  कदम बढ़ाना होता है ?

नहीं...नहीं, लेकिन मेरे मामले में ऐसा नहीं हुआ है। मैं कालेज की पढ़ाई के दौरान नाटकों की तरफ  आकृष्ट हुई। नादिरा बब्बर और नीरज कबीर के वर्कशॉप में ऐक्टिंग सीखा। यहीं मेरा अभिनय देखकर ही थियेटर के लोगों को लगा कि मैं अभिनय ठीक ही करुंगी। सभी ने मुझे फिल्मों में ट्राई करने के लिए उत्साहित किया।

आप उषा किरण जैसी अत्यंत भाव प्रवण अभिनेत्री की नातिन हैं। फिर तेलुगु फिल्मों से कैरियर शुरू करने का क्या मतलब था ?

मेरे पापा अद्वैत खेर और मां उत्तरा म्हात्रे भी मॉडल थे। मां तो 1982 में फेमिना मिस इंडिया वल्र्ड भी हुई थी। लेकिन मम्मी-पापा ने चाहा था कि मुझे और मेरी दीदी को ग्लैमर की दुनिया से हमेशा दूर रखें। इसीलिए नासिक में सेटल किया था। सच्ची बात तो यह है कि जब मुझे तेलुगु फिल्म ''रे' का ऑफर मिला,उस समय मैं जमकर मॉडलिंग कर रही थी। मैं अभिनय करने के लिए बहुत सहज ढंग से राजी हो गई। इसके अलावा मैं किसी को भी अपने कैरियर को बनाने के लिए कोई श्रेय देने के लिए तैयार नहीं हूं। यहां तक मैंने आज तक कभी तन्वी आंटी या शबाना आंटी से कोई मदद नहीं मांगी है।

आपके बचपन का बहुत सारा वक्त रेस्तरां में काम करके बीता है

नासिक में हमारा 'आंगन, 'बॉम्बे टॉकिज और 'तंदूर नाम के तीन रेस्तरां थे। 'आंगन बंद हो गया। लेकिन दो थे। स्कूल के बाद मैं और दीदी रेस्तरां के रसोई घर में ही पड़े रहते थे। इससे यह मत सोचिएगा कि मम्मी-पापा के रेस्तरां में कुछ भी खाने की इजाजत थी। मेरे लिए मम्मी-पापा खाना लेकर आते थे। इसके बाद जब हम थोड़े बड़े हुए, तो मम्मी-पापा को होटल मैनेज करने में मदद करने लगे। ऑर्डर लेना ,खाना सर्व करना ...अपने होटल में मैंने क्या नहीं किया है।

क्या आप खाना बना सकती है ?

बहुत अच्छी तरह से...मेरे हाथ से रुमाली रोटी बहुत अच्छी बनती है। तरह-तरह के स्वीट डिश के अलावा और भी कई आइटम्स मैं बहुत अच्छा बना लेती हूं।   



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