sulabh swatchh bharat

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

नोट बदला, अब बदलेगा देश

70 सालों से देश के ताने-बाने को भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, आतंकवाद, माओवाद और काले धन के दीमक ने कितना नुकसान पहुंचाया, इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है। नोटबंदी के साथ इन सबके खिलाफ जो निर्णायक और ऐतिहासिक लड़ाई छेड़ी गई है, उससे देश की दशा और दिशा बदलने वाली है एसएसबी ब्यूरो

 कालेधन के खिलाफ  जारी लड़ाई में विमुद्रीकरण एक बड़ा हथियार है। इसीलिए चाह कर भी विपक्ष नोटबंदी का खुल कर विरोध नहीं कर पा रहा है। नोटबंदी के खिलाफ  देश बंदी का सवाल हो या सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का, विपक्ष को अब तक हर मौके पर मात ही मिली है। वजह तमाम मुश्किलों के बावजूद जनता का नोटबंदी के पक्ष में होना है। यही वजह है कि इतने बडे देश में नोटबंदी से उपजी मुश्किलों के बावजूद कहीं कोई विवाद ये विरोध नहीं हुआ। सवाल यह कि जो बात जनता की समझ में आसानी से आ गई वह बात राहुल गांधी या फि र दूसरे विपक्षी नेताओं की समझ में क्यों नहीं आई?  

ऐसा नहीं है कि नोटबंदी के मुद्दे पर सब कुछ ठीक हो। सरकार खासतौर से प्रधानमंत्री के सामने एक नहीं कई चुनौतियां भी हैं। सरकार बैंकों के सामने लगने वाली कतार के खत्म नहीं होने से परेशान है तो विपक्ष इस मुद्दे पर जनता का साथ नहीं मिलने से। विपक्ष सबसे ज्यादा इस बात से परेशान हैं कि अगर नोटबंदी से कालेधन के खिलाफ  मुहिम अपने अंजाम तक पहुंची तो इससे प्रधानमंत्री का कद और बड़ा होगा। इतना बड़ा कि फि र उन्हें चुनौती देना साझे विपक्ष के लिए लगभग असंभव हो जाएगा। इसीलिए जिस सीपीएम के नेता ज्योति बसु नोटबंदी के लिए इंदिरा गांधी पर दवाब डाल रहे थे, आज वही पार्टी कांग्रेस के साथ हाथ मिला कर विरोध प्रदर्शन कर रही है। सरकार को इस बात का अंदाजा शुरु से था कि सिर्फ  नोटबंदी से ही कालेधन के कुबेरों का पर्दाफाश नहीं किया जा सकता। इसलिए तैयारी कई मोर्चे पर की गई। एक तरफ  उन बैंकों के अधिकारियों के खिलाफ  सबूत जुटाए गए जिन्होंने कमीशन लेकर बड़ी मात्रा में काले धन को सफेद किया, तो दूसरी तरफ  प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की छापेमारी। नतीजा यह कि हर दिन करोड़ों के काले खजाने की खोज की जा रही है। कहीं बाथरूम से नोटों के बंडल मिल रहे हैं तो कहीं दफ्तरों से। सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा का कहना है कि अब तक डाले गए 291 छापे में 302 करोड़ रुपए के मूल्य का कैश और गहने मिले हैं और करीब 2600 करोड़ की अघोषित आय का पता चला है। जिन लोगों ने नोटबंदी के बाद अपने खातों में दो लाख या उससे अधिक जमा कराए हैं अब उनके खाते आयकर विभाग की जांच के घेरे में है। सरकार यह साफ  कर चुकी है कि जो लोग बैंकों में अपना पैसा जमा करा चुके हैं, तो उसका मतलब यह नहीं है कि उनका धन सफेद हो गया। मतलब साफ  है कि सरकार का इरादा हर हाल में काले को काला और सफेद को सफेद करने का है। कर वंचकों के लिए सरकार ने एक और आखिरी मौका दिया है। लगे हाथ सरकार ने पीएम गरीब कल्याण योजना की घोषणा कर जता दिया कि वह इस योजना से मिलने वाले धन का उपयोग गरीबों के कल्याण के लिए होगा।

यह सिलसिला 2017 में परवान चढ़ेगा। कालेधन को सबसे ज्यादा रीयल स्टेट में खपाया जाता है। इसकी जानकारी सरकार को आज से नहीं दशकों पहले से है। बेनामी संपत्ति के खिलाफ 1988 में ही कानून बना लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसे

नोटिफाई करने की जरूरत नहीं समझी। वैसे ही नोटबंदी की सिफारिश 1971 में वांगचू कमिटी ने की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार चुनावी राजनीति के लिए इतना बड़ा फैसला नहीं कर पाई। 1977 में बनी जनता पार्टी की सरकार ने 1978 में बड़े नोटों को खारिज किया, लेकिन मोरारजी सरकार का यह कदम प्रतीकात्मक ही माना गया।

नोटबंदी के बाद बेनामी संपत्ति सरकार के निशाने पर होगी। प्रधानमंत्री इस बात को खुद कबूल कर चुके हैं। गोवा में साफ  तौर पर इस बात के संकेत दिए कि अगला निशाना बेनामी संपत्ति है। सरकार इसके खिलाफ 2017 में मोर्चा खोलेगी। भ्रष्ट बैंक अधिकारियों के खिलाफ  भी बड़े कदम 2017 में ही उठाए जाएंगे।

नोट के साथ देश बदलने की कोशिश 2017 में भी जारी रहेगी। इस बात के साफ  संकेत प्रधानमंत्री दे चुके हैं। वित्त मंत्रालय के पास जमा बैंकों के स्टिंग आपरेशन की सीडी का सच भी 2017 में सामने आएगा। रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को इस बात का निर्देश दे रखा है कि आठ नवंबर के बाद के सीसीटीवी के फुटेज सुरक्षित रखे जाएं। अब तक तो कुछ ही बैंकों की शाखाओं में हुई गड़बडिय़ों का पता चला है, लेकिन 2017 में जब सरकार पूरी तरह जांच करेगी तब वाकई देश के काले कुबेरों की हकीकत सबके सामने आएगी। ऐसा होगा इसका भरोसा प्रधानमंत्री के साथ देश के उन नागरिकों को है जो हर दिन सुबह उठ कर बैंकों की लाइन में लगते हैं।

यह आम धारणा थी कि देश में बड़े फैसले नहीं लिए जा सकते। कई ऐसे मौके आए जिसमें सरकारों ने अपने कदम खींच कर इस धारणा को पुष्ट ही किया। लेकिन विमुद्रीकरण के बाद तस्वीर बदली है। अब लोगों को यह लगने लगा है कि सरकार बड़े फैसले लेने में कोई हिचक नहीं दिखाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को जानते हैं कि काले धन के खिलाफ  मोर्चा खोल कर उन्होंने बड़ा खतरा मोल लिया है। दिसंबर की सर्द और धुंध  में लिपटी रातों में चुनौतियां हैं, खतरे हैं, जोखिम है, सियासत और षडयंत्र भी है, लेकिन इन सबके बीच एक रास्ता भी है जिस पर चल कर देश आगे जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी रास्ते पर चलना चाहते हैं क्योंकि मंजिल उनके सामने है।

अगर नोटबंदी से काले धन के खिलाफ  मुहिम अपने अंजाम तक पहुंची तो इससे प्रधानमंत्री का कद और बड़ा होगा। इतना बड़ा कि फि र उन्हें चुनौती देना साझे विपक्ष के लिए लगभग असंभव हो जाएगा

पाइंटर

देश भर में ईडी और आयकर विभाग ने डाले करीब 291 छापे

302 करोड़ रुपए कैश सहित 3600 करोड़ के काले धन का पता चला

काले धन के बाद बेनामी संपत्ति सरकार के निशाने पर

   



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो