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शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

सुलभ की सहायता से स्वच्छ होंगे पांच बड़े रेलवे स्टेशन

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने स्वच्छ सप्ताह की शुरुआत की स्वच्छ सप्ताह के दौरान सजे दिखे स्टेशन, शालीनता से पेश आए कर्मचारी

स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत अभियान के तहत रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से स्वच्छ सप्ताह की शुरुआत की। इस मौके पर रेल परिसर में सफाई और स्वच्छता तथा रेल यात्रियों को सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए रेलवे ने नौ दिवसीय जन संपर्क कार्यक्रम चलाने का ऐलान किया। इससे पहले सुरेश प्रभु ने देश के पांच बड़े रेलवे स्टेशनों को स्वच्छ बनाने के लिए सुलभ इंटरनेशनल से हाथ मिलाने की घोषणा की।

इस मौके पर प्रभु ने कहा कि यह महज संयोग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर इसकी शुरुआत हुई, लेकिन यह और भी बेहतर है कि उनकी दूरदृष्टि और लक्ष्यों के साथ स्वच्छ सप्ताह की शुरुआत हुई। इस मौके पर उन्होंने कहा कि रेलवे का संजाल पूरे देश में फैला हुआ है, इसीलिए पूरे देश में संदेश पहुंचाने का इससे बेहतर माध्यम कोई और हो भी नहीं सकता। वैसे तो स्वच्छता का संदेश पूरे देश में पहले ही पहुंच चुका है, लेकिन रेलवे ने स्वच्छता सप्ताह की शुरुआत कर उसे क्रियान्वित करने में अपना योगदान देने का फैसला किया है। देश के हर रेलवे स्टेशन को स्वच्छ बनाने के ध्येय से ही यह आयोजन शुरू किया गया है।

इस आयोजन के तहत 9 दिनों तक न सिर्फ स्टेशनों को स्वच्छ करने पर बल दिया जाएगा बल्कि यात्रियों को भी सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा। क्योंकि स्वच्छता न सिर्फ संस्थागत जरूरत है बल्कि इसे अनवरत रूप से कायम रखने के लिए व्यक्तिगत योगदान की भी आवश्यकता होती है। व्यक्तिगत योगदान के अभाव में यह एक संदेश भर बन कर रह जाएगा। रेलवे को स्वच्छ रखने के लिए संस्थागत प्रयास के साथ ही स्वच्छता के प्रति व्यक्तिगत लगाव आवश्यक है। सरकार तो सुविधा उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसकी उपयोगिता यात्रियों के विवेक पर निर्भर करती है। यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए रेलवे ने डस्टबिन जन संपर्क कार्यक्रम की शुरुआत की है।  

रेलवे स्टेशनों को सुलभ के साथ मिलकर साफ करने की योजना है उनमें गोरखपुर, पुरानी दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और ग्वालियर रेलवे स्टेशन शामिल है। इस अवसर पर सुलभ इंटरनेशनल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देश के बड़े रेलवे स्टेशनों की सफाई और उसकी देखभाल करने के लिए सुलभ आंदोलन के संस्थापक डॉ.विन्देश्वर पाठक की सहायता ली जाएगी। प्रभु ने कहा कि वैसे भी डॉ. पाठक को स्वच्छता में महारथ हासिल है। सुलभ शौचालय के प्रणेता के रूप में वे काफी पहले से ही पूरे देश में लोगों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करते आ रहे हैं।

डॉ. पाठक की कीर्ति का यश देश में ही नहीं वरन विदेशों में भी फैला हुआ है। इसीलिए रेलवे ने देश के पांच महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों को साफ रखने के लिए उनके अनुभवों का लाभ उठाने का निर्णय लिया है। रेलवे ने तय किया है कि इन रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता की व्यवस्था डॉ. पाठक के सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से की जाएगी। स्वच्छता दिवस के रूप में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर सुरेश प्रभु ने 500 किलोग्राम के लड्डू को लोकार्पित किया।

भारतीय रेलवे ने स्वच्छ सप्ताह के तहत सभी स्टेशनों पर सघन स्वच्छता अभियान चलाया। इसके चलते अधिकांश स्टेशनों पर समारोह जैसा माहौल था। सभी स्टेशन सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले पोस्टर और बैनर से सजे थे। इनमें यात्रियों के लिए जो संदेश लिखे थे वे बहुत ही प्रेरणादायी थे। इस संदेश के माध्यम से भारतीय रेलवे को यात्रियों के लिए यात्रा निवास बताया गया है। इसीलिए अपने घर जैसा समझने का अनुरोध किया गया है। इस दौरान रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों की शालीनता भी गजब की दिखी। हर यात्री के साथ बातचीत के दौरान औपचारिक तौर पर वे अपनी टोपी नीचे करते दिखे। इसके अलावा स्टेशन परिसरों के निरीक्षण भी करते दिखे।

हाईलाइट

स्वच्छता में महारथ हासिल डॉ. पाठक के अनुभवों से लाभ उठाने का निर्णय

 

संक्षिप्त खबरें

टीओएफ टाइगर्स अवार्ड 2016

'खेत’ से ख्याति दिलाता टीओएफ टाइगर्स अवार्ड

इस बार का चौंथा टीओएफ टाइगर्स वन्यजीव पर्यटन पुरस्कार 2016 उन महिलाओं और पुरुषों को दिया गया जो विभिन्न तरीकों से भारत और नेपाल में हरित क्षेत्र को पुनर्स्थापित करने में लगे हैं। यह पुरस्कार एक प्रकार से उन अनाम हीरो को मान्यता देता है जिनके कार्यों को यश तो मिला लेकिन उन्हें ख्याति नहीं मिली।

ब्रिटिश उच्चायुक्त डॉमिनिक एस्क्विथ केसीएमजी द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत, प्रकृतिवादी वाल्मिक थापर तथा पुरस्कार पैनल के अध्यक्ष माइक पांडेय समेत कई लोग उपस्थित हुए।  

टीओएफ टाइगर्स वन्यजीव पर्यटन पुरस्कार नौ वर्गों में दिया गया है। पुरस्कार के साथ विजेताओं को 75,000 हजार रुपये तक की राशि भी दी गई।  

इस अवसर पर अमिताभ कांत ने कहा कि अगर जंगलों को बढ़ाना है तो हमें समुदायों और यहां आनेवालों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। यह लक्ष्य महज सरकारी कर्मचारी के बूते नहीं हासिल किया जा सकता है। वन्यजीवों पर 14 किताबें लिखने वाले लेखक वाल्मिक थापर ने तो यहां तक कहा कि वन कर्मचारियों को तो वापस बुला लेना चाहिए, क्योंकि ये लोग पर्यटन प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित ही नहीं हैं। अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय वन्यजीवों का भविष्य पूरी तरह वन्यजीव पर्यटन पर आश्रित है।

 


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