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शुक्रवार, 25 मई 2018

नन्हें वीरों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

नयी दिल्ली। इस वर्ष राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के लिए 25 बच्चों का चयन किया गया है जिनमें 12 लड़कियां और 13 लड़के हैं। उन्हें ये पुरस्कार 23 जनवरी को प्रधानमंत्री देंगे और इसके बाद ये बच्चे गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेंगे।

चयन किए गए बच्चों में दार्जिलिंग उच्च विद्यालय की दो बालिकाएं हैं जिनकी मदद से सीमा पार देह व्यापार के गिरोह का भांडाफोड़ हुआ था। इनके अलावा आठ वर्षीय अरूणाचल प्रदेश की बच्ची भी है जिसने नदी में से अपने दोस्त को बचाने के लिए अपनी जान गवां दी थी। असाधारण वीरता का प्रदर्शन करने के लिए तरह तराह पीजू को मरणोपरांत प्रतिष्ठित भारत पुरस्कार दिया जाएगा जबकि पश्चिम बंगाल की तेजस्विता प्रधान (18) और शिवानी गौंड (17) को प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार के लिए चुना गया है।

तेजस्विता और शिवानी एक अधिकार एनजीओ की स्वयंसेवक हैं। उन्होंने पहले फेसबुक पर एक नाबालिग लड़की से दोस्ती की जो नेपाल से लापता हो गई थी जो आखिरकार एक मानव तस्करी गिरोह की वाहक निकली। तेजस्विता ने संवाददाताओं से कहा, ‘ कक्षा आठ से मैं स्टूडेंट्स एगेंस्ट ट्रैफिकिंग क्लब (एसएटीसी) की स्वयंसेवी थी। इसका संचालन एमएआरजी नाम के गैर सरकार संगठन के तहत होता है जो मानव तस्करी को रोकने के लिए काम करता है। एनजीओ को एक लापता लड़की का पता लगाने के लिए एक अनुरोध मिला और वे चाहते थे कि मैं देह व्यापार के गिरोह का भांडाफोड़ करने वाली योजना का हिस्सा बनूं। मैं और मेरे परिवार को शुरू में संशय था लेकिन हम दोनों ने इसे करने का फैसला किया क्योंकि यह अच्छे के लिए था।’ एमएआरजी (मैनकाइंड एन एक्शन फॉर रूरल ग्रोथ) के लिए काम करने वाले शिवानी के भाई विशाल गौंड ने कहा, ‘ वह गिरोह का भांडाफोड़ करने वाली योजना का हिस्सा बनने को तैयार हो गई जिसे पुलिस, सीबीआई ने बनाया और हमने (एनजीओ) उनकी सहायता की थी।’ शिवानी ने कहा कि योजना के हिस्से के तौर पर हमने एक फर्जी अकाउंट बनाया और लापता लड़की से दोस्ती की और हमसे गिरोह के सदस्यों से एक होटल में मिलने के लिए कहा गया है जो भारत नेपाल सीमा पर कहीं था। तेजस्विता ने कहा कि हालांकि आसपास सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी थे फिर भी हमें डर लग रहा था। हम कांप रहे थे क्योंकि उन्होंने पहुंचने में चार घंटे लिए। अगर चीज़े गलत हो जाएं तो हमारी वैकल्पिक योजना थी अपनी जिंदगी बचाने के लिए भागना। लेकिन हमने किसी तरह से अपना साहस नहीं खोया। तेजस्विता की मां कमलेश राय प्रधान ने कहा कि गिरोह का आखिरकार भांडाफोड़ हो गया और मास्टरमाइंड को पिछले साल दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया। हमें दोनों लड़कियों पर गर्व है। समाज को लड़कियों को बोझ की तरह नहीं बल्कि तोहफे की तरह देखना चाहिए। कम से कम दार्जिलिंग में तो लड़की का जन्म होने पर स्वागत किया जाता है।

 
 


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