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शनिवार, 17 नवंबर 2018

तकनीक से बदलेगी दुनिया

आनेवाले समय में डिजिटल मेश से फिजिकल और वर्चुअल वल्र्ड की दूरी खत्म होगी। डिजिटल इंडस्ट्री में आनेवाले ये सभी बदलाव आईटी इंडस्ट्री के साथ-साथ बिजनेस और आम लोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होंगे

20वीं सदी में लोगों के जीवन में दखल देने वाली टेक्नोलॉजी आज 21वीं सदी के दूसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते जीवन का ऐसा अभिन्न हिस्सा बन गई है, जिसके बगैर मानव जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है। टेक्नोलॉजी इन्वेंशन, इनोवेशन, क्लाउड कम्प्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के बढ़ते प्रयोग की वजह से टेक्नोलॉजी ट्रेंड काफी तेज रफ्तार से विकसित हो रही है। विकसित होते टेक्नोलॉजी से आने वाले समय में मानव जीवन निश्चित ही और भी सरल व सुगम होगा, लेकिन इसके साथ ही मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर उसकी निर्भरता और अधिक बढ़ेगी।

गार्टनर की एक रिपोर्ट के अनुसार आनेवाले समय में डिजिटल मेश से फिजिकल और वर्चुअल वल्र्ड की दूरी खत्म होगी, वहीं डिजिटल वल्र्ड में बने रहने के लिए हर दिन स्मार्ट मशीन की जरूरत होगी। आज के समय में अधिकांश संस्थान डिजिटल बिजनेस की राह पर है और तेजी से अल्गोरिथमिक बिजनेस की तरफ बढ़ रहे हैं। डिजिटल और अल्गोरिथमिक बिजनेस के लिए जरूरी है इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और उसमें बदलाव। डिजिटल इंडस्ट्री में आनेवाले ये सभी बदलाव आईटी इंडस्ट्री के साथ-साथ बिजनेस और आम लोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होंगे।

 

डिवाइस मैश में आएगी क्रांति

आनेवाले समय में डिवाइस मैश में काफी तेजी से विस्तार देखा जाएगा। डिवाइस मेश में शामिल हैं, मोबाइल डिवाइस, वियरेबल डिवाइस, कंज्यूमर एंड होम इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस, ऑटोमोटिव डिवाइस, एन्वायरमेंटल डिवाइस व अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस। टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से इंडस्ट्री और आम लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस। आने वाले कुछ समय में लोग एप्लीकेशन का इस्तेमाल करने और सूचना व जानकारी के लिए या लोगों से संपर्क साधने के लिए, सोशल कम्युनिटीज में संपर्क स्थापित करने और संपर्क बनाए रखने के लिए, सरकार से संपर्क करने के लिए और व्यापार के लिए व अन्य सभी कार्यों के लिए भी डिवाइस पर ही आश्रित हो जाएंगे। मोबाइल क्रांति आने के बाद से डिजिटल इंडस्ट्री मोबाइल यूजर्स को केंद्रित  करते हुए बेहतर सेंसर्स का इस्तेमाल करके डिजिटल डिवाइस के निर्माण में काफी तेजी लाई है। सेंसर की वजह से डिवाइस बेहतर तरीके से काम करता है। बेहतर डिवाइस के आने से लोग इसके प्रति काफी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ऑफिस का स्मार्ट सिस्टम हो या घरों में इस्तेमाल होने वाले तकनीक, या फिर कोई अन्य तकनीक सभी कुछ डिवाइस पर ही केंद्रित है। अभी वर्तमान में कोई भी डिवाइस अकेले काम करता है, लेकिन आने वाले समय में डिवाइस में सेंसर्स के बेहतर इस्तेमाल की वजह से एक डिवाइस से कई काम हो सकते हैं।

इसे कुछ इस तरीके से समझा जा सकता है कि सेंसर का इस्तेमाल बढऩे पर किसी एक डिवाइस के जरिए ही घर के सभी डिवाइस का इस्तेमाल संभव हो पाएगा। जैसे मोबाइल से ही आप अपना फ्रीज, टीवी, कंप्यूटर, कार, बाइक व अन्य बाकी सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को संचालित कर सकेंगे।

 

डिवाइस समझेगा उपभोक्ताओं की पसंद

उपभक्ताओं के अनुभव के आधार पर डिवाइस मेश किसी भी समय और जगह पर उसे उसके इंटरेस्ट की जानकारी देने का काम करेगा। दरअसल यह डिवाइस और लोकेशन के बीच की कंटिन्यूटी को बनाए रखने की एक प्रक्रिया है। हाइपर लोकेशन टेक्नोलॉजी एम्बिएंट यूजर एक्सपेरिएंस की राह आसान करता है। हाइपर लोकेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से डिवाइस उपभोक्ता की पसंद को समझने में सक्षम हो जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर ऐसा डिवाइस लेकर कोई यूजर किसी होटल की तलाश में जाता है तो डिवाइस को यह पता होता है कि यूजर किस तरीके की होटल की तलाश कर रहा है और डिवाइस उसी तरीके के होटल के बारे में जानकारी देते हुए वहां तक पहुंचाने का काम करता है। दरअसल, यह डिवाइस यूजर के इमोशनल स्टेट, हैबिट्स, इंटरेस्ट, सोशल इंटरएक्शन, ग्रुप डायनामिक्स, लाइट, प्रेशर, न्यॉइज, एटमॉस्फेयर जैसे ह्यूमन और फिजिकल एलिमेंट्स व एक्सपीरियंस के आधार पर कार्य करता है।  आज के समय में स्मार्टफोन के एप्स में इस्तेमाल होनेवाले सेंसर से अलग है यह।

 

अब आसान होगी 3डी पिं्रटिंग

वैसे तो 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी ने पिछले कुछ समय से 3डी प्रिंटिंग को काफी आासान बना दिया है। लेकिन एडवांस्ड 3डी प्रिटिंग टेक्नोलॉजी से विकसित धातु व मिश्रधातु, कार्बन, फाइबर, ग्लास, कंडक्टिव इंक, इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉर्मास्यूटिकल्स और बायोलॉजिकल मेटेरियल्स प्रिंट करना बेहद आसान हो जाएगा। 3डी प्रिंटर में इनबिल्ड न्यू प्रैक्टिकल एप्लीकेशन कई सेक्टर के कार्यांे के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा। इससे एयरोस्पेस, मेडिकल, ऑटोमोटिव, एनर्जी और मिलिट्री सेक्टर जैसे कई सेक्टर को अपने उपकरणों के निर्माण में काफी फायदा होगा। इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी स्टूडेंट्स और अन्य क्रिएटिव प्रोफेशनल कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स को टेस्ट करने, डिजाइन तैयार करने और अपनी स्किल्स को इंप्रूव करने में यह काफी मदद करेगा। इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, इंजन पार्ट्स व फूड आइटम बनाने के साथ-साथ बोन, स्कीन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में भी यह अहम भूमिका निभाएगा। आनेवाले समय में 3डी प्रिन्टेबल मेटेरियल्स का काफी तेजी से इस्तेमाल बढ़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2019 से इसका ग्रोइंग रेट 64.1 प्रतिशित सीजीआर (कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) होगा।

 

क्या है 3डी प्रिंटर

इसका नाम 3डायमेंश्नल प्रिंटर है। इस प्रिंटर के माध्यम से कठिन व जटिल ढांचों को आासनी से घर में भी तैयार किया जा सकता है। इसके माध्यम से छोटी-मोटी हर चीज आसानी से बनाई जा सकती है। कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर की मदद से कोई भी वस्तु, आकृति या संरचना की थ्री डायमेंशनल तस्वीर बनाने और उसे 3डी प्रिंटर से पिं्रट करने पर वह आकृति उसी रूप में सामने आ जाती है। इसके अलावा 3डी कैमरा से तस्वीर लेकर या सामान्य कैमरे से लिए तस्वीर को 3डी स्कैनर से स्कैन करने के बाद 3डी प्रिंटर से प्रिंट देने पर यह उसी आकृति के रूप में प्रिंट होकर सामने आता है।

सभी जानकारी एक डिवाइस से आनेवाले समय में कुछ ऐसे डिवाइस का निर्माण हो रहा है जिसके जरिए सभी सभी तरह की सूचनाओं और डाटा को प्राप्त करना संभव हो पाएगा। दरअसल, डिजिटल मेश सूचनाओं को उत्पन्न करेगा, इनका इस्तेमाल करेगा और इसे भेजने का काम करेगा। इसका मतलब यह है कि आप एक ही डिवाइस से सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यानी की टेक्स्चुअल, ऑडियो और वीडियो इंफॉर्मेशन के साथ ही सेंसर और कॉन्टेक्स्चुअल इंफॉर्मेशन भी प्राप्त कर सकेंगे। गार्टनर की भविष्यवाणी के अनुसार वर्ष 2020 और उसके आसपास 25 अरब ऐसे डिवाइस तैयार हो जाएंगे जो सभी तरह की सूचनाएं देने में सक्षम होंगे। हालांकि ऐसे डिवाइस के निर्माण से लोगों को निश्चित तौर पर फायदा होगा, लेकिन आशंका यह भी है कि ये डिवाइस लोगों के लिए परेशानियों का कारण भी बन सकते हैं।

 

इंटेलीजेंट बनेगी मशीन

एडवांस मशीन लर्निंग में डीप न्यूरल नेट्स(डीएनएन) क्लासिक कम्प्यूटिंग और इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट के परे चलकर एक सिस्टम का निर्माण करता है जो स्वतंत्र रूप से दुनिया का पता लगाती है। डीप न्यूरल नेट्स (डीएनएन) मशीन लर्निंग का एक एडवांस फॉर्म डाटा सेट्स है, जो मशीन को इंटेलीजेंट बनाता है। डीएनएन हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर पर आधारित मशीन अपने आसपास के सभी फीचर और सभी जानकारियों को काफी तेजी से ग्रहण कर कर लेती है। एक डिवाइस के जरिए सभी सूचना मुहैया कराने में यह मदद करता है। मशीन को फास्ट बनाने के साथ कई और खूबियां इसमें मौजूद है।

 

ब्रेन से कंट्रोल होगा डिवाइस

माइंड रीडिंग मशीन मनुष्यों के दिमाग को समझने का काम करेगी। ऐसी मशीन जब किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लगा दी जाएगी तो वह डिवाइस अपने उपयोगकर्ता (यूजर) के माइंड को पढ़कर उसके अनुकूल कार्य करेगा। आईबीएम के अनुसार बहुत जल्द यह संभव हो जाएगा कि उपभोक्ता अपने इलेक्ट्रॉनिक आइटम को अपने ब्रेन से संचालित कर सकेंगे। उन्हें किसी प्रकार से इन डिवाइस को हाथ लगाने की जरूरत नहीं होगी। इतना ही नहीं डिवाइस में पासवर्ड लगाने की भी कोई जरूरत नहीं होगी। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अपने यूजर के माइंड में चल रही बातों को आसानी से समझ जाएंगे और उसी के अनुरूप कार्य करेंगे। जैसे यदि किसी उपभोक्ता को अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार को कॉल करना है और उसके मन में यह विचार आता है तो मोबाइल में माइंड रीडिंग मशीन इनबिल्ट होने की वजह से मोबाइल दिमाग में चल रहे विचार को समझ जाएगी और उपभोक्ता के दोस्त को कॉल लगा देगा।

 

स्मार्ट मशीन लेंगी स्वयं फैसले

मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी के विकसित होने से स्मार्ट मशीन स्वतंत्र होकर कार्य करने में सक्षम हो जाएंगी। स्मार्ट मशीनें जैसे कि रोबोट्स, ड्रोन, सेल्फ ड्राइविंग कार, ऑटोनोमस व्हिकल्स, वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट्स (वीपीए), स्मार्ट एडवाजर्स समेत कई और अन्य ऐसे उपकरण बगैर मानवीय हस्तक्षेप या दिशा-निर्देश के निर्णय लेने में सक्षम होंगे और सभी तरह के समस्याओं का समाधान कर सकेंगे। गूगल नाउ, माइक्रोसॉफ्ट कोर्टाना और एप्पल सीरी जैसे वर्चुउल पर्सनल असिस्टेंट्स ऑटोनोमस एजेंट के रूप में उभर कर सामने आएंगे। अभी तक स्मार्ट मशीन को कार्य करने के लिए डायरेक्शन की जरूरत होती है लेकिन बहुत जल्द ये मशीनें खुद अपने निर्णयानुसार कार्य करने लगेंगी। अब तक रोबोट्स केवल उन्हीं बातों को करता है जो उसके सिस्टम में इनबिल्ट किया जाता है लेकिन आने वाले समय में यह संभव हो जाएगा कि वह आम लोगों से बिल्कुल आम आदमी की तरह इंटरएक्ट करेगा और वह जो पढ़ेगा या बोलेगा उसका अर्थ भी समझेगा। रोबोटस के अलावा अन्य स्मार्ट मशीनें भी अपनी टेक्नोलॉजी की वजह से स्वतंत्र होकर कार्य कर सकेगा। गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार ऑटोनोमस सॉफ्टवेयर अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे। भविष्य में वहीं कंपनियां आगे निकल पाएंगी जो ऐसे सशक्त सॉफ्टवेयर बनाएंगी।

 

हैकिंग नहीं होगी अब आसान

डिजिटल बिजनेस और अल्गोरिथमिक इकोनॉमी की वजह से हैकर इंडस्ट्री का तेजी से विकास हुआ है। जिस रफ्तार से हैकर इंडस्ट्री तेजी से अपना दायरा फैला रही है आने वाले समय में डिजिटल इंडस्ट्री के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। ऐसे में हैकर की समस्या से निपटने के लिए संस्थान ज्यादा से ज्यादा क्लाउड बेस्ड सर्विस को उपयोग में लाने की प्लानिंग कर रहा है और कस्टमर और पार्टनर को सिस्टम से जोडऩे के लिए एपीआई खोल रही है। आईटी लीडर हैकिंग से निपटने के लिए बेहतर उपाय कर रही है, वहीं एप्लीकेशन को भी ऐसे कारगर बनाया जा रहा है कि वह अपने को आसानी से प्रोटेक्ट कर सके और हैकर कि गिरफ्त में नहीं आ पाएं। आनेवाले समय में डिजिटल इंडस्ट्री काफी तेजी से अडेप्टिव सिक्यूरिटी आर्किटेक्चर की तरफ अग्रसर होगी।

 

बेहतर निर्माण के लिए एडवांस आर्किटेक्चर

डिजिटल मेश और स्मार्ट मशीन को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल इंडस्ट्री में एडवांस्ड कम्प्यूटिंग आर्किटेक्चर की जरूरत होगी। हाई पावर्ड और अल्ट्रा एफिशिएंट न्यूरोमोर्फिक आर्किटक्चरर्स के जरिए एडवांस्ड सिस्टम आर्किटेक्चर विकसित किया जा सकता है। न्यूरोमोर्फिक आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी एफपीजीए के साथ हाईली इफिशिएंट आर्किटेक्चर के इस्तेमाल से मिमिक न्यूरो-बायोलॉजिकल सिस्टम्स हाई एनर्जी एफिशिएंसी के साथ एक टेराफ्लोप से ज्यादा तेज स्पीड देने में सक्षम हो जाएगी। जीपीयू और एफपीजीए (फील्ड प्रोग्रामेबल गेट ऐरेयज) से बना यह सिस्टम ह्यूमन ब्रेन की तरह काम करेगा जैसा कि स्मार्ट मशीन में इस्तेमाल किया जाता है।

 

मेश ऐप करेगा डिजिटल विस्तार

मेश ऐप और सर्विस आर्किटेक्चर डायनामिक आर्किटेक्चर और यूजर एक्सपेरिएंस में वेब स्केल परफॉर्मेंस, फ्लैक्सिबिलिटी एंड एजिबिलिटी (लचीलता और तेजी) प्रदान करने में सक्षम बनाता है, जो डिजिटल मेश का पूर्ण विस्तार करता है।

 

विस्तार का आधार आईओटी प्लेटफॉर्म्स

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) प्लेटफॉम्र्स मेश ऐप और सर्विस आर्किटेक्चर में सहायक है। आईओटी प्लेटफॉम्र्स का मैनेजमेंट, सिक्यूरिटी, इंटिग्रेशन व अन्य टेक्नोलॉजी आईओटी में बिल्डिंग, मैनेजिंग और सिक्यूरिंग एलिमेंट्स का आधार स्थापित करने का क्षमता प्रदान करता है। आईओटी डिजिटल मेश और एम्बिएंड यूजर एक्सपेरिएंस का एक महत्वपूर्ण व अतिआवश्यक पार्ट्स है जो इसे सक्षम बनाता है। किसी कार्य या उपक्रम में आईओटी के इस्तेमाल के लिए आईओटी प्लेटफॉर्म्स की जरूरत होगी। 

 

क्या है आईओटी

आईओटी का पूरा नाम 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ है। आईओटी एक ऐसा माध्यम है जहां इंटरनेट के जरिए घर का रेफ्रिजेरेटर, वाशिंग मशीन, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिस्टम जैसे सभी टेक्नोलॉजी व डिजिटल गैजेट्स जुड़ें होते हैं और एक डिवाइस से कंट्रोल होता है। सब कुछ डिवाइस पर आधारित होता है और डिजिटल गैजेट्स को चलाने के लिए मानवीय हस्तक्षेप कम से कम

होता है।



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