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शुक्रवार, 25 मई 2018

अशक्त ने बनाई सड़क

शशि पिछले तीन साल से हर रोज़ अपने घर के बाहर सड़क बनाने के लिए खुदाई का काम कर रहे हैं। केरल में रहने वाले इस शख्स के लिए यह काम उतना आसान नहीं है, क्योंकि पेड़ों पर चढ़कर नारियल तोडऩे वाला 59-वर्षीय शशि आंशिक रूप से लकवाग्रस्त है।

18 साल पहले तिरुअनंतपुरम में नारियल के एक पेड़ से गिरने के बाद वह बिस्तर पर पड़े रहने के लिए मजबूर हो गए थे। धीरे-धीरे वह बिस्तर से तो उठे, लेकिन उनका दायां बाजू और पांव लकवे का शिकार बन गया। जीवनयापन के लिए शशि ने ग्राम पंचायत से तिपहिया दिलवाने की गुहार की, ताकि वह कोई काम शुरू कर सके। तब उसे याद दिलाया गया कि उसका घर शहर से सटे जिस ग्रामीण इलाके में है, वहां कोई सड़क ही नहीं है, सिर्फ एक संकरी पगडंडी है। शशि ने बताया, 'पंचायत ने मुझसे कहा कि तुम्हें कोई वाहन देने की कोई तुक नहीं है, क्योंकि तुम लकवाग्रस्त हो। उन्होंने सड़क बनवाने का आश्वासन दिया, लेकिन वह कभी बन नहीं पाई।’ सो, शशि ने खुद खुदाई शुरू कर दी, और फिर रुका ही नहीं। वह हर रोज़ छह-छह घंटे अपनी कुदाल लेकर उस पठार को तोडऩे में जुटा रहता, जिस पर से चढ़कर लोगों को जाना पड़ता था। उसकी इस अदम्य इच्छाशक्ति का परिणाम यह रहा कि अब वहां 200-मीटर की एक कच्ची सड़क है, जो इतनी चौड़ी है कि छोटे वाहन आराम से वहां से गुज़र सकते हैं।



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