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मंगलवार, 13 नवंबर 2018

सुप्रीम कोर्ट - सेना के असैन्य सहायकों की सहायता

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह जोखिम भरे इलाकों में सेना के लिए काम करने वाले सहायकों (पोर्टर) को बेहतर भुगतान, चिकित्सा सुविधा, बढ़ी हुई आर्थिक सहायता और सेवा से अलग होने की स्थिति में 50,000 रुपए की प्रस्तावित राशि से अधिक का अनुदान देने के लिए एक योजना तैयार करे। यह सहायक राजौरी, जम्मू और पुंछ जैसे इलाकों में भारतीय सेना की मदद करते हैं और इनकी संख्या करीब 12,000 है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र से यह भी कहा कि इनको स्थायी करते समय इन सहायकों के बड़े हिस्से को ध्यान में रखा जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को कार्यकाल के फायदे मिल सकें, जिन्होंने न्यूनतम सेवा की अवधि पूरी की है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की पीठ ने यह निर्देश जारी किया और यह भी कहा कि ये सहायक समाज के बहुत गरीब तबके से आते हैं और उनके पास शायद शैक्षणिक योग्यता नहीं हो लेकिन वे सेना को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं तथा सीमावर्ती इलाकों में अभियानों का अभिन्न हिस्सा होते हैं। न्यायालय ने आदेश दिया कि इन सहायकों के लिए योजना को तीन महीने में अंतिम रूप दिया जाए।



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