sulabh swatchh bharat

रविवार, 23 सितंबर 2018

हरियाली बना हथियार

पर्यावरण की रक्षा प्रदूषण से करनी है, तो हरियाली को हथियार बनाना होगा। इस बात को जिले के बहुत लोगों ने समझ भी लिया है। यही कारण है कि हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में पौधे लगाते हैं और उनकी रक्षा भी करते हैं, ताकि पेड़ लहलहा सकें।

भगवानपुर हाट के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरके मंडल एवं पौधा रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी प्रसाद ने कहा कि प्रखंड के सारीपट्टी के किसानों ने प्रदूषण के खिलाफ जो युद्ध छेड़ा है, यह हर गांव में होना चाहिए।

पेंशन राशि से चापाकल

जीरादेई किशुनपुर मिश्रौली निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक नंद किशोर मिश्रा 1989 से पौधरोपण कर रहे हैं। इसके लिए वह ग्रामीणों को भी प्रेरित करते हैं। जिस किसी के घर जाते हैं, वहां भी पौधा लगाते हैं। अब तक वह पांच हजार पौधे लगा चुके हैं। वह जहां पौधरोपण करते हैं, वहां पेंशन की राशि से चापाकल लगवाते हैं, ताकि पौधों को पानी की कमी न हो।

बच्चे की तरह पालते हैं पौधे

तरवारा के उसुरी गांव निवासी प्रेम ङ्क्षसह ने दो एकड़ में बाग लगाया है। वह इसका विस्तार भी करना चाहते हैं। मैरवा के धमौर निवासी ब्रजकिशोर ङ्क्षसह पौधा लगाते रहते हैं। बेटे की तरह उनको पालते हैं। वे उन पौधों को भी लगाते हैं, जिन्हें प्राय: लोग व्यर्थ समझते हैं। पचरुखी प्रखंड के सादिकपुर गांव की अनिला देवी को तो पौधरोपण का इस कदर नशा है कि बरसात के मौसम में घर परिवार की ङ्क्षचता छोड़कर पौधरोपण अभियान में जुट जाती हैं।



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो