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गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

पर्यावरण बचाने के लिए तीर्थयात्रा

हर साल केरल के सबरीमाला में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और अन्य दूसरे राज्यों के तीर्थयात्री आते हैं।

यहां तक कि मलेशिया और सिंगापुर से भी तीर्थयात्री पधारते हैं। ऐसा अनुमान है कि करीब चार करोड़ तीर्थयात्री यहां आते हैं। ऐसे में उस स्थिति की कल्पना कीजिए कि यहां के पर्यावरण पर इसका कितना दबाव पड़ता होगा। यही कारण है कि पर्यावरणवादी सबरीमाला में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर समय-समय पर चिंता प्रकट करते रहे हैं। इसके मद्देनजर केरल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2011 में सबरीमाला, बम्बा और उसके आसपास के इलाकों में प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगा दी थी। लेकिन फरवरी, 2016 तक इसे लागू नहीं किया जा सका। अंतत: केरल उच्च न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। पवित्र तमिल महीने मरगाझी में भक्त सबरीमाला तीर्थयात्रा के लिए आते हैं। बड़ी संख्या में काली धोती पहने, नंगे पैर चलते लोगों को देखा जा सकता है। दरअसल, इस दौरान काफी संयम और अनुशासन का पालन किया जाता है। जब तक तीर्थयात्रा पूरी नहीं हो जाती, तीर्थ यात्री अपनी दाढ़ी भी नहीं बनाते। हाल ही में तमिलनाडु के मदुरई से सबरीमाला के लिए बीस तीर्थयात्रियों के एक दल ने यात्रा की, जिसमें पर्यावरण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। उसमें साफ तौर पर प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने का निवेदन किया गया। उनके टी-शर्ट पर लिखा था-'हरियाली बचाओ, सबरीमाला बचाओ’ और बिना प्लास्टिक बैग के भगवान अयप्पा का दर्शन करो। स्थानीय लोग सागवान, चंदन और महोगनी के पौधे भी लाए थे। केरल के पथनमथिट्टा में इन लोगों ने वहां के जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को पौधे भेंट कर अपनी यात्रा पूरी की। इस यात्रा के संदर्भ में आर गांधी ने कहा, 'सबरीमाला के पर्यावरण को सुरक्षित रखना जरूरी है। यह अच्छा हुआ कि सबरीमाला में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हम लोगों ने यह तीर्थयात्रा अपने राज्य के साथी यात्रियों में इसके प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए की है।’ जाहिर है भगवान अयप्पा इन तीर्थयात्रियों के इस कार्य से खुश होंगे।

 



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