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बुधवार, 23 मई 2018

समावेशी राष्ट्रवाद

संकीर्ण मानसिकता वाले तत्वों को राष्ट्रवाद परिभाषित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसे बहुलतावाद के संदर्भ में देखा जाना चाहिए

 

प्रतिष्ठित विद्वान अर्नेस्ट गेलनर ने अपनी पुस्तक 'नेशंस एंड नेशनलिज्म’ में राष्ट्रवाद की व्याख्या एक ऐसे राजनीतिक सिद्धांत के रूप में की है, जिसके मुताबिक राजनीतिक और राष्ट्रीय इकाई को एक दूसरे के अनुकूल होना चाहिए। गेलनर एवं अन्य आधुनिकतावादी राष्ट्रवाद को 18वीं सदी में विकसित औद्योगिक युग के बाद की परिघटना के रूप में देखते हैं, जब इसने नया स्वरूप ग्रहण किया। जब संसाधनों पर अधिकार जताने के लिए दबाव बढ़ा, तो आधुनिक समाजों में अपने आपको राजनीतिक दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए एकरूपता दिखाने की प्रवृत्ति बढऩे लगी। राष्ट्रवाद उनको आपस में जोडऩे वाले एक कारक के रूप में दिखाई पड़ा और इसने उनकी पहचान की आकांक्षा को संतुष्टि प्रदान करने में मदद की। भारतीय संदर्भ में राष्ट्रवाद की अपनी कुछ विशिष्ट खासियत है। अन्य आधुनिक राष्ट्रों की भांति यहां सांस्कृतिक और नस्लीय पहलू गायब है। हमारे देश में जाति, नस्ल और संस्कृति की विविधता इसे विशिष्ट सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान करती है, लेकिन कभी-कभार जातीय या नस्लीय भेदभाव की घटनाएं इसकी समावेशी बुनियाद पर चोट पहुंचाती हैं, जिन पर भारतीय राष्ट्रवाद की अवधारणा निर्भर है। इससे सबसे अधिक पीडि़त उत्तर पूर्व भारत के लोग होते हैं, जो अक्सर नस्लीय भेदभाव का सामना करते हैं। हाल में सरकार ने उत्तर पूर्व को देश के अन्य विकसित क्षेत्रों के समकक्ष लाने के लिए जो कदम उठाए हैं, वह प्रशंसनीय है। इस दिशा में ऊर्जा परियोजनाओं का विकास, परिवहन व्यवस्था में सुधार, रोजगार निर्माण, नस्लीय समस्याओं का समाधान जैसे कुछ छोटे कदम उठाए गए हैं, लेकिन अब भी इनके प्रति शेष भारत के लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। 

राष्ट्रवाद की आड़ में कट्टरता के बढऩे का खतरा हमेशा बना रहता है, जिसे नष्ट करने की जरूरत है। भारत की अवधारणा वर्ग, जाति, धर्म, क्षेत्र जैसी किसी संकीर्णता पर आधारित नहीं है। हमारे पूर्वजों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता की जो परिकल्पना की थी, वह केवल भौतिक संदर्भ में ही नहीं थी, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए भी थी। एक राष्ट्र के रूप में हमें अपनी विविधतापूर्ण समृद्ध विरासत को संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों से बचाना है। 

 



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