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सोमवार, 18 जून 2018

जल, जमीन के जैविक पहरुए

अच्छा व्यवसाय छोड़कर प्राकृतिक खेती के लिए अपना जीवन लगाने का मन बनाया और बदल दी गांव की तस्वीर

उम्र के जिस पड़ाव पर लोग आराम करना चाहते हैं, अपनों के साथ समय बिताना चाहते हैं और सुकून पसंद करते हैं, ऐसी उम्र में 53 वर्षीय सुनीत साल्वे ने जमा-जमाया व्यवसाय छोड़कर जैविक या प्राकृतिक खेती के लिए अपनी जिंदगी समर्पित की और जल, जमीन, जीवन के संरक्षक बन गए।  

महाराष्ट्र के थाणे जिले में फर्नीचर का अच्छा-खासा बिजनेस करने वाले सुनीत 50 वर्ष के हुए तो वे अगले 10-15 साल कुछ नया और अलग करना चाहते थे। उन्हें प्रकृति अपनी ओर खींच रही थी।

सुनीत का बचपन से ही प्रकृति से लगाव रहा है। उन्होंने अपनी आत्मसंतुष्टि और किसानों के कल्याण के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। उनका मानना है कि डॉक्टर, इंजीनियर और वकील तो हर परिवार के लोग बनना चाहते हैं लेकिन किसान कोई नहीं बनना चाहता। इसी सोच को बदलने के लिए उन्होंने खेती का चुनाव किया।

सुनीत चाहते थे कि ऐसी खेती की जाए, जिससे मिट्टी की ऊर्वरता बनी रहे, और अनाज की गुणवत्ता बढ़े। उनकी इस योजना में मदद की आर्किटेक्ट प्रतीक धनमर ने। दोनों ने मिलकर मुर्बाद के पास एक खाली जमीन तलाशी। इसमें ग्रामीण साल में सिर्फ एक बार धान की खेती करते थे। सुनीत और प्रतीक ने उसी खाली जमीन पर किसानों के साथ काम करने का फैसला किया।

सुनीत और प्रतीक ने मुर्बाद इलाके में खेती के लिए रासायनिक खाद के इस्तेमाल को रोका। पानी के इस्तेमाल और संचयन के लिए उन्होंने एक तालाब बनाया। इससे भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ गया। अब, साल में अधिकतर समय खाली रहने वाली जमीन पर प्राकृतिक तरीके से पालक, गोभी, मेथी, तरबूज, टमाटर, अदरक, पपीता, हल्दी सहित तमाम तरह की सब्जियों और मसालों की खेती की जा रही है। काम के अभाव में गांव छोड़कर बाहर जाने वाले किसान अब सुनीत के प्रयासों से अपनी जमीन पर बेहतरीन पैदावार उगा रहे हैं।



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