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शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

ताबो का बेहतरीन गणतंत्र

हिमाचल के ताबो पंचायत में कई ऐसे नियम-कानून हैं जो देश के सामने एक मिसाल पेश कर रहे हैं। इन नियमों से यहां गणतंत्र की नई अलख जग रही है

देश में संविधान लागू होने के 67 साल बाद भी सांसद और विधायक बनने के लिए कोई न्यूनतम योग्यता तय नहीं है। कोई भी निरक्षर यहां मंत्री बन सकता है और बगैर किसी योग्यता के मुख्यमंत्री। बिना किसी डिग्री के भी ये माननीय बन जाते हैं और उच्चतर डिग्री रखने वाले तमाम लोग नौकरी के लिए जद्दोजहद करते हैं। काफी अर्से से माननीयों के लिए न्यूनतम योग्यता की बात उठती है और फिर ठंडे बस्ते में चली जाती है। संसद और विधानसभाओं की बैठकों में लाखों रुपए प्रति मिनट के हिसाब से खर्च होती है। फिर भी इन माननीयों की उपस्थिति सिफर। लेकिन इसी देश में एक ऐसी पंचायत भी है जहां कोई निरक्षर प्रधान तक नहीं बन सकता। प्रधान बनने के लिए दसवीं पास करना अनिवार्य योग्यता है। वहीं इनके लिए ग्राम सभा की बैठकों में शामिल होना भी है बेहद जरूरी। जो काम देश के संविधान और कानून की वजह से संभव नहीं हो पाया, उसे समाज के मु_ी भर लोगों ने सच कर दिखाया। ग्रामीण स्तर पर बेहतरीन मिसाल पेश कर रही है ताबो पंचायत।

हिमाचल की राजधानी शिमला से 400 किमी दूर लाहौल स्पीति जिले का ताबो पंचायत। सालों भर बर्फ की चादरों में ढंके रहने वाला यह गांव खुद के बनाए कानून की वजह से देश को एक नई राह दिखा रहा है। गांव में पंचायत चुनाव के लिए न्यूनतम योग्यता तो निर्धारित है ही, इसके साथ ही इस पंचायत में और भी कई नियम हैं जो इसे बाकी गांवों से अलग पहचान दिलाती है। 

प्रधान के लिए कड़े कानून

ग्राम प्रधान के लिए दसवीं पास होने के साथ ही एक शर्त यह भी है कि उसका कोई रिश्तेदार ठेकेदार नहीं होना चाहिए। यदि कोई ठेकेदार हो तो उसके रिश्तेदार के प्रधान बनते ही उसके लिए ठेकेदारी पर रोक लगा दी जाती है। ग्राम सभा की बैठकों में गांववासियों की भागीदारी को भी अनिवार्य की गई है। सबसे ज्यादा भागीदारी करने वालों को पुरुस्कार भी दिया जाता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा बैठकों में शामिल होने के लिए यहां के लोगों में होड़ मची रहती है।

शराब-जुआ पर पूर्ण प्रतिबंध

लगभग 1200 लोगों की आबादी वाली ताबो पंचायत में शराब पीने और जुआ खेलने पर पूरी तरह से पाबंदी है। अगर कोई ग्रामवासी यहां शराब पीते हुए पाया जाता है तो 10 हजार रुपए का जुर्माना देना होता है। शराब के साथ-साथ जुआ खेलने पर भी सख्त सजा का प्रावधान है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए कसमें

इस पंचायत में पर्यावरण संरक्षण और साफ-सफाई के लिए भी कायदे कानून हैं। यहां पर पेड़ काटने पर पूरी तरह से पाबंदी है। इसके साथ ही गांव में साफ-सफाई के लिए भी सख्त प्रावधान है। गांव वाले यहां के मोनेस्ट्री (बौद्ध मठ) में जाकर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने की कसम खाते हैं।

100 प्रतिशत साक्षरता

गांव के बेहतरीन कानून की वजह से सभी यहां के सभी निवासियों के लिए शिक्षा अनिवार्य है। गांव में सरकारी स्कूल और मोनेस्ट्री की तरफ से संचालित एक प्राइवेट स्कूल है। यहां पर बच्चों को बेहतरीन शिक्षा मुहैया कराई जा रही है। पंचायत प्रधान डिचन आंगमों के अनुसार गांव के नियम कानून की वजह से पंचायत में शत-प्रतिशत साक्षरता दर है। साथ ही यहां पर अमन-चैन से लोग सुकून की जिंदगी जी रहे हैं। पंचायत में न तो किसी प्रकार का जातीय भेदभाव है और न ही कोई ऊंच-नीच जैसी व्यवस्था। सभी लोग यहां मिलकर खुशी से रहते हैं। 



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