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शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

लेफ्टिनेंट कर्नल आर.एस. जमवाल - बहादुर पर्वतारोही

लेफ्टिनेंट कर्नल जमवाल ऐसे बहादुर अधिकारी हैं, जिन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया है

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था, 'ऊंचाई तक जाने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है, भले ही वह ऊंचाई एवरेस्ट की हो या आपके कैरियर की।’ लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर सिंह जाट रेजिमेंट से हैं। वह अब तक एक या दो नहीं, बल्कि तीन बार एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं। वह विश्व की सबसे ऊंचे शिखर 8848 पर चढ़ चुके हैं। यह कारनामा वे मई 2012 और मई 2013 में कर चुके हैं। पिछले साल वह एक बार फिर इंडियन आर्मी के 14 सदस्यों के साथ इस ऊंची चोटी पर चढऩे में कामयाब हुए।

जमवाल जम्मू-कश्मीर के सांबा के एक छोटे-से गांव बधोरी से ताल्लुक रखते हैं। पहले उन्होंने आर्मी के डोंगरा रेजिमेंट में एक जवान के रूप में ज्वॉइन किया था। आम जवानों की तरह वह गैर कमीशन रैंक से रिटायर होते, लेकिन उनका हौंसला बुलंद था। उनके मन में आगे बढऩे की चाह थी। कड़ी मेहनत के दम पर वे भारतीय सेना अकादमी में शामिल होने में सफल रहे। इसके बाद इन्हें 2002 में जाट रेजिमेंट में अधिकारी के पद पर तैनात किया गया। वह भारतीय सेना के प्रतिष्ठित 'हाई एटिट्यूूड, वॉरफेयर स्कूल (एचएडब्ल्यूएस)’ गुलमर्ग से पार्वतारोहण का कोर्स किया। इसके बाद उन्हें वहां एक प्रशिक्षक के रूप में तैनात किया गया। अब तक जमवाल दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप और आस्ट्रेलिया की ऊंची चोटियों सहित कई अन्य पर्वतों पर भी चढ़ चुके हैं।

अप्रैल 2015 में एवरेस्ट अभियान बहुत ही चुनौतियों भरा रहा। उस समय हिमालय में भूकंप के झटके आ रहे थे और इस वजह से बड़े पैमाने पर हिमस्खलन हो रहा था। उस समय जमवाल की टीम खुंभु जलप्रपात के पास थी। वह कहते हैं, 'जब मुझे पता चला कि हिमस्खलन हो रहा है, तो मैं चिल्लाया-भागो यह खतरे से बचने के खिलाफ दौड़ थी। हम लोग जिदंगी बचाने के लिए 20,0000 फीट ऊंचाई पर दौड़ रहे थे। आस-पास दरारें थी। कभी भी पैर फिसलकर किसी दरार में जा सकता था।’ जमवाल की टीम ने उस परिस्थिति से सामना करने के साथ ही कई और लोगों को हताहत होने से बचाया। 

पर्वतारोहण में साहसिक कारनामे ने जमवाल को प्रसिद्ध कर दिया, लेकिन देश सेवा के प्रति उनके जज्बे ने उनको असली हीरो बना दिया। वे जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में लोगों को बचाने के लिए अनगिनत रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हुए। मांउट केदार डोम और गुरेज के रेस्क्यू ऑपरेशन में रणवीर सिंह ने कई सैनिकों और नागरिकों की जान बचाई। रणवीर सिंह ने इन दोनों अभियानों का नेतृत्व भी किया। इनकी टीम ने एवरेस्ट पर तथा अन्य शिविरों से 4000 किलो नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे को साफ किया था। जामवाल सिर्फ पहाड़ों पर ही नही चढ़ रहे हैं, बल्कि कई अन्य साहसिक कार्य भी कर रहे हैं।



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