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मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

आपका अपना रेडियो

आकाशवाणी से देश दुनिया का समाचार तो पीढिय़ों से सुना समझा जा रहा है। लेकिन जमाना जनता के रेडियो का है। अपना रेडियो, अपनी खबर, अपनों के मुंह से सुनने का सुख अलग होता है

जालंधर जिले के सीचेवाल के किसान सुलखान सिंह 'अवतार कम्युनिटी रेडियो' पर प्रसारित होने वाले कृषि कार्यक्रम को प्रतिदिन सुनते हैं। इससे उन्हें कृषि की नई तकनीक, खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान और मौसम की जानकारी स्थानीय भाषा में मिल जाती है। केंद्र सरकार सुलखान जैसे देश के लाखों किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी तथा छात्रों को शैक्षिक जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से कम्युनिटी रेडियो स्थापित करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही है। कम्युनिटी रेडियो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर स्थानीय भाषा में कार्यक्रम प्रसारित होता हैं और इसमें काम करने वाले लोग भी स्थानीय होते हैं। जिससे श्रोता स्वयं को इससे जुड़ाव महसूस करता है। देश में कम्युनिटी रेडियो के श्रोताओं की बड़ी तादाद है।

'गुडगांव की आवाज़' कम्युनिटी रेडियो की स्टेशन मैनेजर वंदना थपलियाल कहती हैं, 'कम्युनिटी रेडियो जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा संचालित रेडियो है।' इस वक्त देश में 245 से अधिक कमर्शियल रेडियो स्टेशन हैं, लेकिन इससे इतर लगभग 179 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन भी चल रहे हैं। देश में कम्युनिटी रेडियों की पहुंच तकरीबन दो करोड़ 50 लाख श्रोताओं तक है। हाल ही में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने ऐलान किया कि सरकार नार्थ ईस्ट के सात राज्यों में कम्युनिटी रेडियो स्थापित करने पर 90 प्रतिशत सब्सिडी तथा अन्य राज्यों में स्थापित करने पर 75 प्रतिशत सब्सिडी देगी।

एक कम्युनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित करने में तकरीबन 15 लाख रुपए का खर्च आता है। अभी तक सरकार अधिकतम 7 लाख 50 रुपए की सब्सिडी ही मुहैया कराती थी। सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में कम्युनिटी रेडियो स्थापित करने के लिए वर्ष 2002 में नीति बनाई थी तथा एनजीओ के लिए वर्ष 2006 में बनाई। इस नीति के मुताबिक, ये रेडियो एनजीओ या शैक्षिक संस्थानों की तरफ से स्थापित किए जा सकते हैं और इस पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में 50 प्रतिशत स्थानीय लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। इन रेडियो के एंटीना की ऊंचाई 30 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और इसे 5 किमी से 10 किमी तक का रेंज कवर करना चाहिए। 

तेजी से खुल रहे हैं कम्युनिटी रेडियो

इस पर खबरें तथा जानकारी स्थानीय भाषा में प्रसारित होने के कारण यह काफी लोकप्रिय हो रहा है। यूं तो भारत में पहला कम्युनिटी रेडियो वर्ष 2004 में चैन्ने की अन्ना यूनिवर्सिटी में 'अन्ना एफ एम' के नाम से स्थापित हुआ था, लेकिन उसके बाद साल दर साल इसकी संख्या बढ़ रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2007 में देश में मात्र 28 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन थे जबकि वर्ष 2015 में इसकी संख्या बढ़कर 184 हो गई। सरकार के सब्सिडी देने के फैसले के बाद इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।

कम्युनिटी रेडियो से फायदा

इसके द्वारा लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा स्वच्छता के प्रति जागरुक किया जाता है। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में 'रेडियो जामिया' नाम से कम्युनिटी रेडियो संचालित होता है। इसकी रेंज 10 किमी तक है। इसे विश्वविद्यालय के छात्र ही संचालित करते हैं। इस पर छात्रों के लिए शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित होता है और साथ ही आसपास की बस्तियों के लोगों को जागरूक करने मकसद से स्वास्थ्य संबंधित कार्यक्रम भी प्रसारित होते हैं।

झांसी के किसान राजाराम पटेल 'रेडियो बुंदेलखंड' पर रोजाना खेत-खलिहान कार्यक्रम सुनते हैं। वह बताते हैं, 'रेडियो पर खेत-खलिहान प्रोग्राम सुन रहा था। उसमें मुझे कृषि वैज्ञानिक का नंबर मिला। कृषि वैज्ञानिक से बात करने के बाद गोबर और गोमूत्र से खाद तैयार की। इससे अब हमें रसायनिक उर्वरक की जरूरत नहीं पड़ती है।'

जालंधर जिले के सीचवाल इलाके में 'अवतार कम्युनिटी रेडियो' लोगों को वातावरण के प्रति जागरूक करता है। इससे लोग आसपास के गंदे नालों को साफ तथा स्वच्छ रखने में योगदान दे रहे हैं। ओडिशा के खुर्दा में 'रेडियो किसान' संचालित होता है। इस पर किसानों के लिए खेती से संबंधित कार्यक्रम प्रसारित होता है। तथा किसानों को मौसम की भी जानकारी दी जाती है। यह तूफान के समय आसपास के लोगों को आगाह भी करता है। केंद्र सरकार ने इसे वर्ष 2015 में किसानों की सहायता करने के लिए सम्मानित किया था।  

गांवों में आज भी मेनस्ट्रीम मीडिया की पहुंच कम ही है। ऐसे में कम्युनिटी रेडियो लोगों की आवाज़ को बुलंद कर रहे हैं। सरकार ने किसानों, छात्रों तथा आम लोगों को अपनी आवाज़ उठाने के लिए एक मंच देने के मकसद से सब्सिडी की मात्रा बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार का यह फैसला भविष्य के लिए क्रांतिकारी कदम साबित होगा।



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