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शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

प्रदूषण का पर्याय एल्बे सफाई की नजीर बनी

कुछ साल पहले तक जो नदी लोगों के लिए प्रदूषण का पर्याय थी, गंदगी के कारण जिसमें मछलियां जिंदा नहीं रह पाती थीं, वही जर्मनी की एल्बे नदी आज सफाई के मामले में दूसरे देशों की नदियों के लिए नजीर बनी हुई है

जर्मनी की एल्बे नदी कुछ वर्षों पहले तक प्रदूषण का पर्याय थी। पानी में गंदगी का स्तर कितना ज्यादा था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदूषण के कारण उसमें रहने वाली मछलियों को अल्सर हो जाता था, और वह मर जाती थी। नदी में हमेशा प्लास्टिक और कूड़े-कचरे तैरते रहते थे। लेकिन आज एल्बे नदी की गिनती दुनिया की सबसे साफ नदियों में से एक में होती है। इतना ही नहीं अपनी सफाई की वजह से वह अब दूसरे देशों की नदियों के लिए नज़ीर बन गई है।

उत्तरी सागर की ओर जाने के लिए एल्बे नदी महत्वपूर्ण जल मार्ग है। यह नदी हैंबर्ग से होते हुए ही उत्तरी सागर में जाकर मिलती है। कहने का मतलब हैंबर्ग एल्बी नदी के तट पर बसा है। मालूम हो कि हैंबर्ग जर्मनी का एक औद्योगिक शहर है। स्वाभाविक रूप से वहां कई औद्योगिक कारखाने और कंपनियां हैं। कभी नदी किसी शहर को बसाने के लिए वरदान साबित होती थी, आज वही शहर उस नदी के लिए अभिशाप बन बैठे हैं। एल्बे नदी और हैंबर्ग नदी का संबंध भी कुछ ऐसा ही है। एल्बे नदी के दूषित होने का सबसे प्रमुख एक कारण हैंबर्ग शहर से निकलने वाले कूड़े का निस्तारन बेहतर तरीके से नहीं होना माना जा रहा था।

इस शहर से निकलने वाला कूड़ा-कचरा तथा रासायनिक पदार्थ पहले एल्बे नदी में जाता था। एल्बे का प्रदूषित पानी चेक गणराज्य तथा हैंबर्ग से होते हुए उत्तरी सागर में मिल जाता था।

उत्तरी सागर में पहुंचा प्रदूषण

एल्बे नदी के प्रदूषण का असर उत्तरी सागर में भी देखने को मिलने लगा था। 1988 में एक रिसर्च किया गया था। रिसर्च की रिपोर्ट अचंभित करने वाली थी। रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक एल्बे से उत्तरी सागर में जाने वाले पानी के साथ कई जहरीले रासायनिक तत्व भी सागर में जा रहे थे। रिसर्च में अत्यंत विषैला रसायनिक यौगिक पेंटाक्लोरोफिनोल मिला था तथा अन्य रसायनों में 1000 टन फॉस्फोरस, 23 टन सीसा और 16000 टन नाइट्रोजन मिला था।

जागरुकता से साफ हुई नदी

एल्बे नदी इतनी प्रदूषित हो चुकी थी कि वहां की जनता परेशान हो गई थी। नदी को प्रदूषणमुक्त कर उसे साफ करने के लिए कई स्वयंसेवी संगठनों ने आवाज उठानी शुरू कर दी। सरकार ने जनता की मांग को गंभीरता से लिया और फिर उसे साफ करने के लिए मुहिम चलाई। सरकार ने अपनी इस मुहिम में कई स्वयंसेवी संगठनों को भी अपने साथ जोड़ा। इतना ही नहीं एल्वे को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए सरकार ने पर्यावरण और प्रदूषण से बचाने के लिए कई सख्त कानून भी बनाए।

सरकार ने ऐसे उद्योग और कारखाने को बंद करने का आदेश दिया जिनका कचरा व रासायनिक पदार्थ एल्बे में जाता था। नाले के पानी को सीवेज सिस्टम से साफ किया जाने लगा। सरकार व एनजीओ ने आम लोगों को नदियों की अहमियत बताई तथा सफाई के प्रति जागरूक किया। वहां के आम लोगों ने भी एल्बे को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जर्मनी सरकार की एल्बे को साफ करने की मुहिम को वहां की अवाम का भी अपार समर्थन मिला। एल्बे को साफ करने की मुहिम 2013 में रंग लाई, जब उसमें करीब 200 पॉरपॉइल मछलियां व अन्य जलीय जीव-जन्तु पाए गए।

आम जनता के समर्थन और सरकार की कोशिशों की वजह से आज एल्बे दुनिया की चुनिंदा साफ नदियों की पहली कतार में खड़ी है। उसका पानी अब साफ और स्वच्छ हो चुका है तथा जलीय जीव-जन्तुओं और मनुष्यों के अनूकुल हो गया है। इसके पीछे जर्मनी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा वहां के आम लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। वर्तमान में प्रदूषण के कारण दयनीय हालात में पहुंच चुकी दुनिया के अन्य देशों की नदियों के लिए एल्बे नदी एक मिसाल है। जो साफ व स्वच्छ रूप में हमारे सामने मौजूद है।



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