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सोमवार, 20 अगस्त 2018

रॉबिन हुड आर्मी!

रॉबिन हुड गरीबों का मसीहा था। अमीरों के शोषण से उन्हें मुक्ति दिलाता था। उसी रॉबिन हुड के नाम से एक ऐसी आर्मी है जो गरीबों और भूखों का पेट भरती है

एक तरफ विकास की तरफ भारत काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद आज भी देश में लगभग 20 करोड़ लोग हर रात भूखे सोने को मजबूर हैं। इस बात पर यकीन करना मुश्किल है, लेकिन हकीकत यही है। आजादी के छह दशक बाद भी लाखों लोग कई-कई दिनों तक भूखे रहने को मजबूर हैं। भुखमरी की समस्या इतनी व्यापक है कि लाखों लोग कुपोषण का शिकार हैं। दाने-दाने को मोहताज भूखे लोग हर गली-मुहल्ले और नक्कड़ पर कहीं न कहीं दिख ही जाते हैं। लेकिन एक संस्था ऐसी भी है जो इन लोगों की भूख मिटाने के लिए बेहतरीन पहल कर रही है। इस संस्था का नाम है रॉबिन हुड आर्मी।

कैसे पड़ा नाम रॉबिन हुड आर्मी

रॉबिन हुड आर्मी नाम रखने के पीछे भी रोचक कहानी है। दरअसल इस संस्था का नाम ऐतिहासिक रॉबिन हुड के नाम पर रखा गया है। जिस तरह से रॉबिन हुड अमीरों से धन लेकर गरीबों को देता था ठीक उसी तरह यह संस्था अमीरों के यहां से खाना इक_ा करके गरीब-जरूरतमंदों और भूखों को देती है। इस संस्था को शुरू करने वाले नील घोष और आनंद सिन्हा पुर्तगाल में रहते थे। वहां पर री-फूड नाम की एक संस्था अमीरों के घरों से खाना इक_ा करके गरीबों को देती थी। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने इस काम की शुरुआत की। हर जरूरतमंद को भोजन मुहैया कराने और देश से भुखमरी की समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से इन लोगों ने 2014 में रॉबिन हुड आर्मी नामक स्वयंसेवी संस्था बनाई। महज छह लोगों द्वारा मिलकर शुरू किए गए इस संस्था में आज छह हजार से ज्यादा वॉलेंटियर्स जुड़े हुए हैं।

कैसे काम करती है रॉबिन हुड आर्मी

कुछ लोगों के समूह से शुरू यह स्वयंसेवी संस्था जरूरतमंदों और भूखों को हर दिन खाना खिलाने का काम करती है। संस्था से जुड़े अधिकांश वॉलेंटियर्स युवा नौकरी पेशा लोग हैं। जो इस नेक काम से जुडऩा चाहते हैं, वे वॉलेंटिर्स की तरह इस संस्था में शामिल हो जाते हैं। देश-विदेश में फैले ये वॉलेंटियर्स अपने-अपने इलाके में एकत्रित होकर स्थानीय स्तर पर रेस्टोरेंट, होटल, समारोह स्थल और आम लोगों से मिलते हैं और वहां से खाना इक_ा करते हैं। आमतौर पर रेस्टोरेंट, होटल और शादी-विवाह या अन्य समारोह में बचे खाना को जमा करते हैं, ताकि एक तरफ तो खाने की बर्बादी के, वहीं दूसरी तरफ जरूरतमंद लोगों की भूख मिटाई जा सके। देश-विदेश में फैले रॉबिन हुड आर्मी के 67 हजार से ज्यादा वॉलेंटिर्स हर दिन हजारों भूखे लोगों को खाने का निवाला देकर उनकी जिंदगी की राह आसान कर रहे हैं। भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी रॉबिन हुड आर्मी के स्वयंसेवक काफी बढ़-चढ़कर जरूरतमंदों को खाना मुहैया कराने का काम कर रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली से शुरू हुई यह संस्था आज अपने 6715 वॉलेंटिर्स के माध्यम से 30 शहरों में अपनी बेहतरीन सेवा दे रही है। भारत से सटे पाकिस्तान के लाहौर, इस्लामाबाद, करांची और बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रॉबिन हुड आर्मी के काफी वॉलेंटिर्स भूखों को भोजन करा रहे हैं।

आम लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत

रॉबिन हुड आर्मी ने युवाओं को इस काम के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कॉलेज स्टूडेंट्स प्रोग्राम की शुरुआत भी की है। हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज और जामिया मिल्लिया इस्लामिया, मुंबई के संत जेवियर और पुणे के डीवाई पाटिल कॉलेज में युवाओं को इस मुहिम से जोडऩे के लिए इस संस्था की तरफ से कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिस तरह से देश के कुछ युवाओं ने रॉबिन हुड आर्मी की शुरुआत कर एक बेहतरीन पहल की है और हजारों भूखे-जरूरतमंदों की राह आसान किया है।

भारत में जहां हर रात 20 करोड़ लोग भूखे सोते हैं, वहीं विश्व में ऐसे लोगों की आबादी 800 मिलियन से ज्यादा है। ऐसी स्थिति में अगर रॉबिन हुड आर्मी की तरह समाज के अन्य लोग भी आगे आएं, तो न तो खाने की बर्बादी होगी और न ही कोई भूखा सोने को मजबूर रहेगा।

अगर आप भी इस संस्था से जुड़कर सहयोग करना चाहते हैं तो सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए इससे जुड़ सकते हैं।

https://www.facebook.com/robinhoodarmy

https://twitter.com/rha_india



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