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सोमवार, 16 जुलाई 2018

बेघर बच्चों का बनेगा आधार

नई दिल्ली। स्कूलों में नामांकन लेने और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए बेघर बच्चों को आधार कार्ड मुहैया कराए जाएंगे।

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बेघर बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दी है और इसकी औपचारिक तौर पर शुरुआत होनी है। यह बेघर बच्चों के पुनर्वास के लिए क्रमवार दिशानिर्देश है। बेघर बच्चों के लिए अन्य महत्वपूर्ण उपायों में स्वास्थ्य बीमा, बैंक खाते और वित्तीय प्रायोजन शामिल है ताकि बच्चों के चिकित्सा और पौष्टिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।

गैर सरकारी संगठन सेव द चिल्ड्रन की एडवोकेसी डायरेक्टर विदिशा पिल्लै ने कहा, ‘सड़कों पर रहने वाले 80 फीसदी बच्चों की कोई पहचान नहीं है और उन्हें अपने अधिकार और सेवाओं को हासिल करने में यह सबसे बड़ी बाधा है। स्कूल इन बच्चों को नामांकन नहीं देते। उनको स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिलतीं क्योंकि उनके पास पहचान पत्र नहीं होता।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम उन्हें आधार कार्ड मुहैया करा दें तो वे इन सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।’ बाल अधिकार संस्था एनसीपीसीआर और गैर सरकारी संगठन सेव द चिल्ड्रेन ने मानक प्रक्रिया संचालन को तैयार किया है जिसमें चार श्रेणी के बेघर बच्चों के लिए क्रमवार कार्ययोजना तैयार की गई है। ये चार श्रेणी के बच्चे हैं- ‘परित्यक्त या लावारिस बच्चे’, ‘लापता या घर से भागे बच्चे’, ‘सड़क से जुड़े बच्चे या सड़क पर रहने वाले समुदाय के बच्चे’ और ‘सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चे’।



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