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सोमवार, 17 दिसंबर 2018

शराब माफिया से भिड़ीं महिला आईपीएस अफसर

छह महीने में 1044 चौपाल लगा कर महिला आईपीएस अधिकारी ने सालों से सक्रिय कच्ची शराब के कारोबारियों की नकेल कसी

चुनाव के आते ही पूरे उत्तर प्रदेश में अवैध शराब का धंधा एकदम से बढ़ जाता है, पर सूबे का उन्नाव जिला इसमें अपवाद है। यहां महिला आईपीएस अफसर नेहा पांडेय ने अवैध शराब की बिक्री और खपत पर एक तरह से बैन लगा रखा है। उन्नाव में 2015 में जहरीली शराब के कारण 41 लोगों की जान चली गई थी। 2008 बैच की आईपीएस अफसर नेहा पांडेय की पहल इसी हादसे का नतीजा है। जब वह यहां पुलिस अधीक्षक के तौर पर आईं तो कच्ची शराब के धंधे के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। दिलचस्प है कि उन्नाव का नाम अगर चमड़े के काम के लिए प्रसिद्ध है तो यह अवैध शराब के उत्पादन के लिए बदनाम भी है। यहां तकरीबन सभी गांवों में मिथाइल अल्कोहल से बनने वाले अवैध शराब के ठेके हैं। 

नेहा जब 2016 में यहां आईं तो शराब माफिया पर शिकंजा कसने के लिए उन्होंने जिले के पुलिस और दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक की। यह काम आसान नहीं था, क्योंकि यहां शराब माफिया को सफेदपोशों के साथ कई प्रभावशाली लोगों का संरक्षण हासिल है। नेहा ने कच्ची शराब का उत्पादन रोकने से ज्यादा जरूरी इसकी खपत को रोकना समझा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से महिलाओं और परिवारों के बीच जागरुकता फैलाने को कहा।

महिला शक्ति ने किया कमाल

आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े उन्नाव का शुमार देश के उन जिलों में है जहां सस्ती देसी शराब की खपत सबसे ज्यादा है। अपने एक सर्किल आफिसर डॉ. हृदेश कठेरिया की सलाह पर नेहा ने जिले के सभी 1044 पंचायतों में चौपाल लगाने का फैसला किया, ताकि शराब के खिलाफ मुहिम की पहली शुरुआत घर से हो और इसके लिए खासतौर पर महिलाएं सामने आएं। उन्होंने इन चौपालों को 'समाधान आपके द्वार’ नाम दिया। पहले महिलाएं, फिर उनके पति-बच्चों का जुड़ाव इस मुहिम के लिए एक बड़ा कदम था। वैसे जो पहली चौपाल लगी, उसमें खासे कम लोग आए थे। इसकी वजह यह रही कि सदियों से महिलाएं पितृसत्ता और सामाजिक व्यवस्था के अधीन रही हैं। उन्हें घर की चौखट से बाहर निकालना और अपने पुरुष साथी के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के लिए राजी करना कोई आसान काम नहीं था। उन्नाव में महिलाओं की साक्षरता दर महज 55 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 65 फीसद है। इसी तरह यहां लैंगिक अनुपात भी 1000 पुरुषों पर मात्र 901 महिलाओं का है, जबकि राष्ट्रीय औसत 940 महिलाओं का है। 

नुक्कड़ नाटकों और जादू से बनी बात

शराब के खिलाफ मुहिम में महिलाओं और परिवार के दूसरे सदस्यों के कम जुड़ाव से युवा आईपीएस अफसर नेहा परेशान नहीं हुई। इसके लिए उसने एक अनोखे तरीके को अमल में लाया। पहली चौपाल के निराशाजनक अनुभव के बाद उन्होंने नुक्कड़ नाटकों और मैजिक शो की मदद ली। इन कार्यक्रमों को खासतौर पर शराब के दुष्प्रभाव को ध्यान में रखकर बनाया गया था। यही नहीं, इसमें इस बात को बताया-समझाया गया कि कच्ची शराब बनाने वालों के विरोध से पहले इसका घर में निषेध जरूरी है।

इस अनोखी पहल के नतीजे रोमांचित करने वाले थे। दूसरी चौपाल में महिलाएं बड़ी संख्या में आईं और एक प्रेरक संदेश के साथ अपने-अपने घरों को लौटीं। इस बारे में स्थानीय महिला कमला देवी बताती हैं, जिस तरह का कार्यक्रम हुआ और जिस तरह संदेश दिए गए, वे चकित करने वाले थे। हम लोग खासे भरोसे और जागरुकता के साथ घर लौटे। यह सब पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा हम लोगों के साथ सीधे संपर्क के कारण संभव हुआ।

देखते-देखते 'समाधान आपके द्वार’ कार्यक्रम की चर्चा हर तरफ होने लगी। यहां की महिलाओं को इस तरह के कार्यक्रम से शराबी पतियों से निपटने के अलावा दहेज प्रताडऩा और अन्य किस्म की घरेलू हिंसा से लेकर राशन कार्ड और एलपीजी कनेक्शन लेने तक का समाधान घर बैठे ही मिल गया।  

180 दिन में 1044 चौपाल

महज छह महीने के भीतर नेहा और उनकी टीम ने 1044 ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाई। साथ ही उन्होंने हर पंचायत में अपनी तरफ से एक महिला को इस बात के लिए नियुक्त किया कि वह दो तरफे संवाद के जरिए किसी भी समस्या का तत्काल समाधान मुहैया कराएं। इसी तरह की एक महिला नींबूकली ने बताया, 'हम कच्ची शराब के कारण होने वाली मौतों की संख्या में इजाफा देख रहे थे। लोग इस कारण स्थायी तौर पर अंधे भी हो रहे थे, पर अब हम लोगों ने इसका समाधान निकाल लिया है। हम इसकी खपत को तो रोकने में सफल हैं ही, इसकी बिक्री को भी अपने क्षेत्र में नहीं होने दे रहे हैं।’ दिलचस्प है कि नींबूकली वह महिला है, जिसने अवैध शराब के कारण पति और बेटा दोनों खो दिया है। दरअसल, ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के खिलाफ नेहा पांडेय के जरिए एक आवाज़ मिली है। यही वजह है कि सभी नेहा और उनके सहयोगियों की खूब मदद करते हैं।    

 

 नेहा पांडेय की मुहिम ने देखते-देखते इस कदर रंग पकड़ा कि सैकड़ों कच्ची शराब बनाने वाले ठिकाने तोड़ दिए गए, 29 शराब माफिया को धर दबोचा गया, 30 हजार लीटर से ज्यादा ब्रिकी के लिए तैयार कच्ची शराब की जब्ती हुई। नेहा कहती हैं, 'समाधान आपके द्वार’ के जरिए एक मामूली पहल ने देखते-देखते एक साल के भीतर जिले के ग्रामीणों की जीवनशैली को बदलकर रख दिया। अब हम चुनाव में अवैध शराब पर हर लिहाज से पक्की रोक के लिए काम कर रहे हैं।’



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