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शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

जन गण का तंत्र

भारतीय गणतंत्र का दिल गांवों में धड़कता है। दिलचस्प है कि इनमें से कई गांवों के आज भी अपने कायदे-कानून और विलक्षण परंपराएं हैं, ऐसे ही सात गांवों के बारे में पढ़ें गणतंत्र दिवस के इस विशेष अंक में

'गणतंत्र यानी एक ऐसा राज्य, जिसमें सर्वोच्च शक्ति लोगों और उसके द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होती है। उसकी सरकार भी लोकतांत्रिक तरीके बनती है, काम करती है।’

छह सप्ताह पहले जब हमने गणतंत्र दिवस पर विशेष अंक निकालने की बात तय की तो हमने इस बात पर खासतौर पर गौर किया। पर क्या हम दुनिया के महज उन 206 संप्रभु देशों में से एक भर हैं, जो अपने औपचारिक नाम में गणतंत्र शब्द का प्रयोग करते हैं? जिस तरह राजनेताओं पर आरोप लग रहे हैं, वह इस सवाल के जवाब को एक अलग दिशा में ले जाएगा। चूंकि हम एक सकारात्मक सोच वाले समाचार पत्र हैं, इसीलिए हमने सोचा कि हम गांवों की तरफ देखें, यह ध्यान में रखते हुए कि सर्वोच्च शक्ति लोगों में निहित है।       

यह देखकर हम चकित रह गए कि वेब पड़ताल के दौरान हमें तमाम ऐसे गांव मिले जो अपनी इस सर्वोच्च ताकत का विविध तरह की सकारात्मकता के साथ इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें महाराष्ट्र का मेंढा-लेखा जैसा गांव भी है, जहां लोग कहते हैं कि यह उनका गांव है। इसी तरह का एक गांव तोबो है, जिसके अपने कायदे-कानून हैं। सिक्किम के दो गांवों लाचेन और लाचुंग में तो 1642 के बाद से किसी तरह का कोई बाह्य प्रशासनिक हस्तक्षेप ही नहीं हुआ है। वेब पड़ताल के बाद हम इन गांवों तक पहुंचकर यहां की दास्तान को पाठकों तक लाने का फैसला किया। हमारी कोशिश है कि पाठक इस बात को समझने के साथ महसूस कर सकें कि हमारे गांवों में हमारा गणतंत्र किस रूप में अंगड़ाई ले रहा है।

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं!



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