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बुधवार, 19 सितंबर 2018

पत्थरों का संगीत

भारत के महान शिल्पी राम सुतार को दुनिया भर में गांधी की प्रस्तर प्रतिमाएं बनाने के लिए जाना जाता है

पत्थर का कोई भी हो बड़ा या छोटा, उसका रंगा काला हो या भूरा, वह बेहद कठोर हो या संगमरमर की तरह मुलायम, छेनी और हथौड़े की चोट उसकी पूरी संरचना को तितर-बितर करने के लिए काफी है। लेकिन जब छेनी और हथौड़े को चलाने वाला हाथ राम सुतार का हो  तब पत्थरों की संरचना एक नई शक्ल लेती है और उसके अंदर का संगीत फूट कर बाहर आता है । पत्थरों के गीत को पहचानने और उसे दुनिया के सामने पेश करने का जो हुनर राम सुतार के हाथों में है, वह किसी दूसरे हाथ में नहीं।

राम सुतार शिल्पी नहीं, मूर्ति गढऩे वाले मूर्तिकार नहीं, एक संगीतकार हैं। छेनी और हथौड़ा उनके साज हैं और पत्थर का टुकड़ा सुरों का खजाना। सुतार के शिल्प का एक ही सूत्र है- गांधीवाद। गांधीवादी राम सुतार अपने शिल्पों में गांधी को ही रचते हैं। मूर्ति चाहे जिसकी बने गांधीवाद के सूत्रों के सहारे ही उसे राम सुतार तराशते हैं। शांति और सदभाव छेनी और हथौड़े के हर निशान में खोजे जा सकते हैं। महात्मा गांधी की विभिन्न मुद्रओं वाली एक-दो नहीं तीन सौ से ज्यादा मूर्तियां तराश चुके राम सुतार की मूर्तियां दुनिया के करीब तीन सौ शहरों में लगी हुई हैं। 

गांधीवादी शिल्पी राम सुतार पत्थर से तलवार तराशेंगे यह किसी ने सोचा नहीं था, लेकिन 91 वर्षीय राम सुतार को जब पंजाब सरकार ने वार मेमोरियल के लिए 150 फीट लंबी तलवार बनाने को कहा तो वो इसके लिए तुरंत तैयार हो गए। ऐसा करना उन्हें बेहद कलात्मक और रोमांचक लगा। पत्थर की यह तलवार दुनिया की सबसे लंबी तलवार होगी। अब तक एक हजार से ज्यादा मूर्तियां तराश चुके राम सुतार इस उम्र में भी घंटों अथक काम करते हैं। निरंतर काम करने की प्रेरणा उन्हें महात्मा गांधी से मिली है। महाराष्टï्र में जन्म लेने वाले राम सुतार महात्मा गांधी से तब मिले जब वे विनोबा भावे से मिलने धुले गांव गए थे। महात्मा गांधी के कहने के बाद उन्होंने अपनी रेशमी टोपी आग के हवाले कर दी थी। इस घटना का जिक्र राम सुतार अक्सर किया करते हैं। बापू की हत्या के बाद राम सुतार ने महात्मा गांधी की पहली मूर्ति बनाई। तब से लेकर अब सैकड़ों मूर्तियां तराश चुके राम सुतार बाबा साहेब अंबेडकर से लेकर शिवाजी तक की मूर्तियां तराश चुके हैं। नर्मदा में बनने वाली सरदार पटेल की प्रतिमा  के मुख्य शिल्पी राम सुतार ही हैं। अरब सागर में लगने वाली शिवाजी की प्रतिमा को भी सुतार के नेतृत्व में ही तराशा जा रहा है। पत्थर के बेजान टुकडों में जीवन और विचारों के सूत्र पिरोने का उनका सफर जारी है। पत्थरों को जीवन के अंत तक तराशते रहने की इच्छा रखने वाले राम सुतार कुरूक्षेत्र में कृष्ण-अर्जुन के रथ को तराश चुके हैं और यह जानते हैं-कर्मण्ये वाधिकारस्ते ....।



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