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शनिवार, 22 सितंबर 2018

सुधार तो हुआ पर दुनिया हमसे बहुत आगे

देश में हर साल 45 हजार महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हो जाती है, 25 वर्षों में मृत्यु दर में 69 प्रतिशत की कमी आई पर अभी बहुत कुछ करना बाकी

डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) और लैंसेट की रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में हर साल करीब 45 हजार महिलाओं की मृत्यु प्रसव के दौरान हो जाती है। यह आंकड़ा निश्चित रूप से भयावह है। पूरे विश्व में प्रसव के दौरान होने वाली कुल मौतों का 15 प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं। इसके बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्होंने सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (एमजीडी) प्राप्त कर लिया है।

वर्ष 1990, 1995, 2000, 2005, 2010 और 2015 में भारत का मातृ मृत्यु अनुपात क्रमश: 556, 471, 374, 280, 215 और 174 आंका गया। इन 25 साल में देश की मातृ मृत्यु दर में 69 प्रतिशत की कमी आई है। मृत्यु दर के ये घटते आंकड़े निश्चित रूप से सराहनीय हैं। लेकिन आबादी अधिक होने की वजह से अभी भी विश्व की कुल मातृ मृत्यु के आंकड़ों में देश का हिस्सा सबसे ज्यादा है  

ये आंकड़े भले ही प्रभावी लगते हों लेकिन जापान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की मातृ मृत्यु दर की तुलना में हम आज भी कहीं नहीं टिकते हैं। इन देशों में प्रति दस हजार प्रसव में महज 5 से 14 मौतें ही होती हैं। दुनिया के जिन देशों में मातृ मृत्यु दर सबसे कम है उनमें ग्रीस, फिनलैंड और आइसलैंड शामिल हैं। इन देशों में मातृ मृत्यु दर महज 3 है। वहीं सबसे अधिक मृत्य जिस देश में होती है वह है सिएरा लियोन। यहां प्रसव के दौरान मौत का आंकड़ा प्रति दस हजार 1360 है।      

इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा सुधार 90 प्रतिशत मालदीव में रिकॉर्ड किया गया है जबकि कई देशों में मृत्यु अनुपात को लेकर किसी प्रकार का कोई विकास नहीं दिखा। सर्बिया, गुआना और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में तो मातृ मृत्यु दर में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

साल 2015 में हुई कुल तीन लाख तीन हजार मौतों के साथ विश्व स्तर पर मातृ मृत्यु अनुपात में कमी आई है। लेकिन इन आंकड़ों को विकसित, विकासशील और अविकसित देशों में बांटने के बाद जो आंकड़े सामने आते हैं, वे निश्चित रूप से परेशान करने वाले होते हैं। इन आंकड़ों में विकसित देशों की हिस्सेदारी महज 1700 है जबकि शेष संख्या विकासशील और अविकसित देशों के हिस्से में है।

हाईलाइट

जापान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में 2015 में मातृ मृत्यु दर 5 से 14 के बीच रही

भारत में मातृ मृत्यु दर

मातृ मृत्यु दर घट रही है फिर भी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर बहुत ज्यादा है



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