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शनिवार, 21 जुलाई 2018

विजयलक्ष्मी शर्मा - बाल विवाह पर विजय

सामाजिक कुप्रथा बाल-विवाह पर अंकुश लगाने के लिए पहले प्यार और फिर दबाव का सहारा लेती हैं विजयलक्ष्मी। विषम परिस्थितियों में भी अपने मजबूत इरादों के दम पर वह निरंतर इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए आवाज़ बुलंद कर रही हैं

 

अगर इरादें मजबूत हो तो बड़ी सी बड़ी परेशानियां भी घुटने टेकने को मजबूर हो जाती है। कुछ इसी बात को चरितार्थ कर रही हैं राजस्थान के एक छोटे से गांव की विजयलक्ष्मी शर्मा। जिस गांव में हर घर में बाल विवाह होता हो, बाल विवाह जहां के रीति रिवाज में वर्षों से शुमार है। वहां पर इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन विजयलक्ष्मी ने न केवल खुद की बाल विवाह पर रोक लगवाई, बल्कि गांव की कई लड़कियों के लिए भी मददगार बनकर आगे

आई है।

राजस्थान के फागी जिले के झोरिन्डा गांव की 24 वर्षीय विजयलक्ष्मी इस इलाके में बाल विवाह को रोकने के लिए पिछले 10 सालों से काम कर रही हैं। जब वह महज 13 साल की थी, तब उनके घरवालों ने उनकी शादी तय कर दी थी, लेकिन पढ़ाई जारी रखने की चाहत की वजह से उन्होंने अपनी शादी का विरोध किया। उन्हीं दिनों उसके पड़ोस में रहने वाली एक 13 वर्षीय बाल वधु की प्रसव के दौरान मौत हो गई। विजयलक्ष्मी बताती हैं कि उसकी सहेली ममता की आठ साल की छोटी सी उम्र में शादी हुई थी और महज 13 वर्ष की उम्र में वह मां बनी। बच्चे के जन्म के दौरान ही उसकी सहेली की मौत हो गई। इस घटना को देखकर उन्होंने उसी दिन फैसला किया कि वह अब बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठाएगी। बहुत मुश्किल से उन्होंने पहले अपने परिवार वालों को मनाया फिर गांव में इस कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए कदम बढ़ाया। बचपन की घटना से प्रेरित होने के बाद से वह निरतंर बाल-विवाह पर रोक लगाने के लिए काम रही हैं। उन्हें जब भी किसी लड़की की बाल विवाह के बारे में सूचना मिलती है वह उसके घर जाती हैं। लड़की के घरवालों को प्यार से समझाती हैं और रोकने के लिए मनाती हैं। लड़की से खुद बात करती हैं। यह काम काफी चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन वह अपने इरादे पर डटी रहती हैं। अगर प्यार से ये लोग बाल-विवाह रोकने को तैयार नहीं होते हैं तो फिर पुलिस रिपोर्ट और धमकी का सहारा लेती हैं। अपनी टीम लेकर और पुलिस का सहारा लेकर भी वह इस कुप्रथा को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करती हैं। समाज के लिए इस नेक काम करने के दौरान विजयलक्ष्मी को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अक्सर उन्हें काम रोकने के लिए धमकियां मिलती हैं, लोग उन पर फब्तियां कसते हैं, लेकिन इन सबसे विजयलक्ष्मी बिल्कुल भी नहीं घबराती हैं। विजयलक्ष्मी के अनुसार लोगों के विरोध से उन्हें इस कुप्रथा को रोकने के लिए और अधिक प्रेरणा मिलती है। उनका कहना है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक इस कुप्रथा पर पूरी तरह से रोक न लग जाए। विजयलक्ष्मी ने अपनी बेहतरीन पहल से गांव में 25 से ज्यादा बाल विवाहों को होने से रोका है। जिन लड़कियों को बाल-विवाह के चंगुल में जाने से उन्होंने बचाया है उनके लिए वह किसी फरिश्ते से कम नहीं है।  



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