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सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

अक्षय ऊर्जा, अक्षय जीवन

विकास का सारा सपना, जनहित की बहुत सारी योजनाएं अंधेरे में घिरे गांवों के कच्चे रास्तों पर भटक जाती हैं। देश के हर गांव को रौशन करने की सरकार की योजना परवान पर है

सुंदरवन में प्रकाश एक सपने की तरह था लेकिन यह सपना सिर्फ सुंदरवन में ही सच नही हुआ हैं बल्कि भारत के दूसरे सैकड़ों गांव भी सोलर लालटेन के प्रकाश से जगमग हैं। सोलर लालटेन ग्रामीण महिलाओं के जीवन में प्रकाश फैला रहे हैं। लक्ष्मी सहित गांव की अन्य महिलाएं उद्यमी बन गई हैं। वह सोलर लालटेन को दिन में चार्ज करती हैं और फिर उसे किराये पर देती हैं। सोलर लालटेन से गांव के लोगों की जिंदगी तेजी से बदल रही है। पहले महिलाओं को रात के अंधेरे में खाना बनाना पड़ता था। लेकिन अब इससे खाना बनाने में आसानी होती है। गांव में युवाओं की एक टीम सोलर लालटेन की तकनीक और इसकी बारीकियां सीख रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य देश को अक्षय ऊर्जा पर निर्भर बनाना है। भारत ने 2017 तक 55000 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा को पवन ऊर्जा और बायोगैस के माध्यम से इसकी क्षमता को

दोगुना करने की नई पहल शुरू की है। बिजली, कोयला और अक्षय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक भारत वर्ष 2017 के अंत तक अपनी अक्षय ऊर्जा की क्षमता को चार गुना करेगा।

उन्होंने बताया कि आज भारत की सौर क्षमता 4500 मेगावाट है तथा इस साल इस क्षमता को 2000 मेगावाट बढ़ाने का लक्ष्य है।

भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा गया है। 2015 में कोच्चि एयरपोर्ट पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है। देश में दिल्ली मेट्रो, रेलवे, टोल प्लाजा तथा किसान भी सौर ऊर्जा पर कुछ हद तक निर्भर हो रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश में तो सौर ऊर्जा से संचालित एक ब्लड बैंक है। केंद्र सरकार का प्रमुख फोकस स्पीड, स्किल और स्केल के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति और सुधार लाने पर है।

सूर्य मित्र कौशल विकास योजना

सरकार 'सूर्य मित्र कौशल विकास योजना  का व्यापक पैमाने पर प्रचार-प्रसार कर रही है तथा इसके तहत बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित कर रही है। मार्च 2017 तक भारत की सौर विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया का अनुमान है कि सौर ऊर्जा से दस हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। मौजूदा वक्त में भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 5129.81 मेगावाट है और यह मार्च 2017 तक दस हजार मेगावाट बढऩे की उम्मीद है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और तमिलनाडु में कई बड़ी परियोजनाएं इसमें शामिल हैं। मौजूदा वक्त में सोलर ऊर्जा उत्पादन के मामले में 11वें नंबर पर है।

गणना करना

2014 में प्रधानमंत्री ने देश के सौर ऊर्जा उत्पादन को 100 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा। उस वक्त देश की अक्षय ऊर्जा क्षमता 33.8 गीगावाट था। जनवरी 2015 में पवन तथा बायो मास से 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। 

बिजली, कोयला तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार 'हम आज इसीलिए अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना कर रहे हैं ताकि भविष्य में हमारे बच्चों को सस्ती और पर्याप्त बिजली मिल सके।       

सरकार के 31 सितंबर 2016 के आंकड़े के मुताबिक वर्तमान समय में भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 306358 मेगावाट है, जिसमे थर्मल (कोयला, गैस और डीजल) से 213228 मेगावाट तथा छोटे बिजलीघरों से 44236 मेगावाट जबकि अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन तथा बायोमास) से 5780 मेगावाट बिजली पैदा होती है। 

उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसीज, वल्र्ड एनर्जी आउटलुक 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 23.7 करोड़ लोगों के पास बिजली की सुविधा नहीं है। सरकार बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए कोयला और अन्य अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर रही है। भारत का 2030 तक 850 गीगावाट बिजली कोयले और अक्षय ऊर्जा से उत्पादन करने की योजना है। सरकार की योजना लगभग 40 प्रतिशत बिजली अक्षय ऊर्जा से उत्पादन करने की है। इससे भारत के पास कोयला ऊर्जा की टोकरी में शेष बचा रहेगा।

बायो मास पावर प्लांट

बायो मास पावर प्लांट सिर्फ बिजली ही नहीं उत्पन्न करता है बल्कि यह कृषि अवशिष्टï वस्तुओं को भी एक तटस्थ तरीके से निपटाता है। सरकार बायो मास पावर प्लांट स्थापित करने के लिए 20 लाख रुपए प्रति मेगावाट की आर्थिक सहायता मुहैया कराती है। तथा 15 लाख रुपए प्रति मेगावाट सह उत्पादन परियोजनाओं मसलन, शुगर मिल स्थापित करने के लिए देती है। इस तरह के प्लांट्स स्थापित करने में तकरीबन 5 से 6 करोड़ की लागत लगती है जबकि इसका दाम लगभग 3.25 रुपए से 4 रुपए किलोवाट प्रति घंटे आता है।  

अक्षय ऊर्जा अभी अपने प्रारंभिक अवस्था में है और भविष्य में इसकी मांग बढऩे की उम्मीद है। इससे प्रदूषण भी नहीं होता है। अक्षय ऊर्जा के उपयोग से गांवों में खुशियों की बहार आएगी। इससे गांव में विज्ञान और तकनीक जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेगी। ।



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