sulabh swatchh bharat

सोमवार, 16 जुलाई 2018

फ्रॉन्सिस और गांधी के विचारों को पूरा करते कदम

सैंट फ्रॉन्सिस और महात्मा गांधी दोनों के ही विचार एक जैसे थे- शांति, आहिंसा, भाईचारा और प्रेम। इन्होंने इसको पाने के के रास्ते भी सुझाया जिन पर हम चलकर इस लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। एक व्यक्ति तभी इन बातों पर गौर करेगा जब उसके जीवन की मूल जरूरतें पूरी हो जाएं। यही वजह है कि दोनों महान व्यक्तियों ने सफाई, बराबरी और जीवन स्तर में सुधार पर सबसे ज्यादा जोर दिया। इन दोनों के विचारों पर केंद्रित एक सम्मेलन का आयोजन सुलभ इंटरनेशनल में किया गया।

इस सम्मेलन में अमेरिका के कार्डिनल स्ट्रीच यूनिवर्सिटी से  इरिक जॉन डीम्मिट, मिस. मार्था ड्रेक शिफ्लर, माईकल ड्रेक शिफ्लर, नैन्सी माइकल स्टैंडफोर्ड ब्लेयर, मार्क लीविस जेस्नर, मोनिका क्लिंग, डेव जैशमैन और चार्ली मोर कई गणमान्य लोग मौजूद थे। इनके अलावा सुलभ इंटरनेशनल के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक, सेवा ग्राम आश्रम के सचिव और संयोजक जीवीवीएसडीएस प्रसाद, गांधी के विचारों के दर्शनिकज्ञ अनिल दत्त, चंडीगढ़ से प्रोफेसर एम. एल शर्मा, गायत्री विद्या परिषद्, विशाखापत्तनम् से पीवी शर्मा और सुलभ इंटनेशनल से एस.पी. सिंह, आर.सी. झा, बी.बी. सहाय, अरुण पाठक, एसपीएन सिंहा और पंकज जैन आदि मौजूद थे।

सभी अतिथियों ने सुलभ के काम कामकाज के तरीके और उसकी उपलब्धियों को समझा और जाना। खुद सुलभ संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने इन लोगों को सुलभ इंटरनैश्नल, पालम कैंपस का भ्रमण कराया। सुलभ की सोच और डॉ. विन्देश्वर पाठक के त्याग और समर्पण को देख सारे अतिथि काफी प्रभावित और खुश हुए। मार्क लीविस जेझनर ने कहा कि “डॉ. विन्देश्वर पाठक ही सही मायने में गांधी और सेंट फ्रेन्सिस के सच्चे सपूत हैं। हम तो इन दोनों की बातों को सिर्फ पसंद करते हैं पढ़ाते हैं और इस पर वाद- विवाद करते हैं, लेकिन डॉ. पाठक ने इन सिद्धांतो को  अपने जीवन में ढालकर साकार कर दिखाया है। धरातल पर इन विचारों को उतारना किसी जंग से कम नहीं”। सुलभ की सोच को देखकर सभी आश्चर्यचकित थे कि आखिर एक व्यक्ति ने इतना कुछ कैसे सोचा और फिर कैसे इसे प्रभावी ढ़ंग हकीकत में बदला। इस काम को करने के लिए एक टीम तैयार करना भी कठीन टास्क है, लेकिन जिस लयबद्ध तरीके से इनकी टीम काम करती है, इसे देखकर सभी काफी प्रभावित थे। वृंदावन से आई विधवा मांओं और उनके लिए उठाए गए सकारात्मक कदमों को देखकर मिस. मार्था ड्रेक शिफ्लर कहती है “ इन महिलाओं से मिलकर बहुत खुशी हुई, इनकी आंखों की सादगी और मन की सुन्दरता इनके चेहरे पर साफ झलकती है। डॉ. पाठक ने इनकी जिन्दगी में जो रोशनी लाई है, मैं इसके लिए इनका धन्यवाद करना चाहुंगी। अंधेरे से उजाले की ओर इनके कदम कभी नहीं बढ़ते अगर इनके साथ डॉ. पाठक का हाथ नहीं होता”। चाहे वो स्वच्छता रथ हो या सुलभ वाटर एटीम या फिर गरीब बच्चों की जिन्दगी में एक नई सुबह सुलभ का स्कूल सभी कुछ प्रेरणा स्रोत है। 



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो